ध्यान की ज़बरदस्त,आसान वैज्ञानिक तकनीक


आँखों से ध्यान करने की एक अदभूत विधि

जब हम ध्यान कर रहे होते है तो हमारी आँखों की स्तीथि सही होना बहुत जरुरी होता है क्योकि  ध्यान के दौरान हमारीआँखों की क्या स्तीथि है इस बात पर तय होता है की यह ध्यान गहरा होगा या नहीं I इस बात का ध्यान के दौरान मन के भागने को लेकर गहरा सम्बन्ध है I अगर हम इस  नियम को समझ लेंगे तो हम ध्यान में और गहरे उतर पाएंगे I ध्यान की अगर हम छोटी-छोटी बातों का ख़्याल रखेंगे तो ध्यान बहुत अच्छे से कर पाएंगे और समझ भी पाएंगे I ऐसा कहा जाता है की ‘The Eyes are the windows of the Soul’ और अगर यह सच है तो हम आँखों के द्वारा भी अपनी आत्मा तक पहुंच सकते है I अपनी आत्मा तक पहुंच कर परमात्मा को जान सकते है और यही मानव जीवन का लक्ष्य होता है  लेकिन दिखने वाली वस्तुये अपने आप ही हमारे सामने आती है और काफी दूर तक हम देख भी सकते है जबकि दूशरी इन्द्रियों का हम काफी दूर तक प्रयोग नहीं कर सकते I दिनभर में 80% डाटा हम अपनी आँखों से ही देखते और समझते है इसलिए हम यह कह सकते है की आँखे बहुत महत्वपूर्ण है I मेडिकल साइंस के हिसाब से हमारी brain के बाद अगर कोई complex organ यदि कोई है तो वो हमारी आँखे है I केवल योग ही नहीं बल्कि मेडिकल साइंस और साइकोलॉजी भी इस बात पर कार्य कर रही है I एक तकनीक पर काम किया जा रहा है जिसका नाम है EMDR (Eye Movement Desensitisation & Reprocessing) इस विधि का प्रयोग 1987 से किया जा रहा है और इस विधि से मानसिक रोगों का इलाज़ भी किया जा रहा है I

साइकोलोजिस्ट ने मेडिकल साइंस की मदद से यह सिद्ध किया है की आँखों की movement का सीधा सम्बन्ध हमारे मन से है I अगर हम आँखों को स्थिर कर ले तो मन अपने आप स्थिर होना शुरू हो जाएगा I यह तथ्य योग ने हज़ारों साल पहले ही बता दिया था की ध्यान में अगर हम अपनी आँखों की स्तिथि सही कर ले तो मन अपने आप हमारे काबू में आना शुरू हो जाएगा I

Neuro Psychologist Marcel Kinsbourne ने यहाँ तक रिसर्च किया है की हमारी आँखों की position का हमारे दिमाग के Hemispheres के साथ सीधा सम्बन्ध है जैसे स्वरयोग में हमारी नाक से चलने वाली साँसों का हमारी brain के दोनों hemispheres के साथ सीधा सम्बन्ध है I आश्चर्य की बात है की जैसा विज्ञान कह रहा है वही हज़ारों साल पहले योग ने बता दिया था I

अपनी आँखों की position का ध्यान में प्रयोग कैसे करना है I नीचे तीन आँखों की position की बात बताई जा रही है:-

(1) आँखे धरती की ओर करके बंद कर लेना I

(2) आँखे सामने की ओर करके बंद कर लेना I

(3) आँखे ऊपर की ओर करके बंद कर लेना I

प्रथम(1st) position में आप महसूस करेंगे की जब आप आँखों को धरती की ओर देखते हुए आँखे बंद करके ध्यान करेंगे तो ध्यान बिलकुल भी नहीं लगेगा और जल्द ही नींद में जाने की संभावना होगी I

द्रितीय (2nd position) में आप अपनी आंखें सामने की ओर रख कर जब आप बंद आँखों से ध्यान करने की कोशिश करेंगे तो आपके मन में बहुत से विचार आयेंगे और मन बार-बार भगा कर ले जाएगा और ध्यान में ठहर नहीं पायेगा I

तृतीय (3rd) position (Best position of Eye)- जब आप आँखों को ऊपर की ओर देखते हुए ध्यान करेंगे तो आप देखेंगे और महसूस करेंगे की आपकी आँखों की इस position ने आपके मन को रोकना शुरू कर दिया है और आपका ध्यान लगाने लगा है I

अतः जब भी आप कभी भी ध्यान करे तो अपनी आँखों की position ऊपर की ओर रखकर Gazing (एकटक देखना) करें I आप यह महसूस करेंगे की जैसे-जैसे आपकी आँखों की gazing (एकटक देखना) ऊपर से नीचे की ओर आएगा आपका ध्यान/मन विचारों से भरता जाएगा और आपका मन अस्थिर होने लगेगा I अतः यह सतप्रतिशत (100%) सही है की हमारी आँखों की position का हमारे मन में उभरते विचारों से सीधा सम्बन्ध है Iयह बड़े काम की तकनीक है और एकदम 100% सकारात्मक परिणाम देती है I आप इसका प्रयोग कही भी कर सकते है I आप कही भी बैठे हो चाहे ट्रेन,बस,ऑफिस कही भी आंखें जितनी ऊपर हो सके उतनी ऊपर की ओर करके अपनी आंखें बंद कर दीजिये फिर देखिये कमाल कैसे अचानक विचार रुकने लगते है I आप इसे कही भी अपने ऑफिस में, यात्रा करते हुए आदि परिस्थितियों में भी कर सकते है I

आप बिना कुछ किये सिर्फ अपनी आँखों की position को ऊपर की ओर करके आंखें बंद कर लेनी है, आप अपने आप ध्यान में चले जाओगे I कोई मंत्र की भी जरुरत नहीं है इसमें परन्तु अगर आप चाहो तो कोई मंत्र भी जप सकते हो I

ध्यान की ज़बरदस्त,आसान वैज्ञानिक तकनीक

यह विधि Spiritual Psychology में प्रयोग की जाती है, मानसिक बीमारी में एक therapy के रूप में I इस विधि से आपको तुरंत सकारात्मक परिणाम मिलेगा I आपका मन कितना भी चंचल हो तुरंत नियंत्रण में आ जाएगा और चमत्कारी तरीके से आपका ध्यान अपने आप ही लग जाएगा एवं आपका मन पूरी तरह से शांत और स्थिर हो जाएगा I जिनका मन बहुत अधिक चंचल होता है उनके लिए ये बहुत ही लाभकारी विधि है I

इस विधि में चेतना के मुख्यतः दो (2) इन्द्रियों (आँख और कान) पर प्रयोग किया जाता है I ध्यान दें, जब हम चेतना का एक साथ दो (2) इन्द्रियों पर प्रयोग करते है तो हमारा ध्यान तेजी से घटित होता है I ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारा चंचल मन इस तकनीक से अपने आप रुकने लगता है और स्थिर एवं शांत हो जाता है I

इसकी शुरुवात हम किसी भी आरामदायक आसान पर भी कर सकते है I इसमें दो (2) इन्द्रियों का प्रयोग करेंगे, हमारी आँख और कानों का | Nostril (नासिका छिद्र/नाक) में आने-जाने वाली साँस पर भी अवलोकन किया जाएगा लेकिन केवल विधि की प्रमाणिकता के लिए I

General method- किसी भी खुली,हवादार जगह पर एक आरामदायक आसन में बैठ जाए और अपने शब्दो में ईश्वर से प्रार्थना कीजिये I जब प्रार्थना समाप्त करे तो ईश्वर को धन्यबाद से करें I

अब थोड़ी देर अपनी आने-जाने वाली साँसों पर ध्यान दीजिये I आप गौर करेंगे की जैसे-जैसे आप अपनी आने-जाने वाली साँसों का अवलोकन करेंगे आपका मन अपने आप ही शांत होता चला जाएगा I लेकिन अपनी साँसों का लम्बे समय तक अवलोकन करना बहुत कठिन है I

विधि: आपको अपने दोनों आँखों से Left (बायीं) ओर देखना है और Right (दायीं) कान (Ear) से आस-पास की आवाज़ों को सुनना है I आप कोई संगीत या मंत्र भी चला सकते है, हल्की आवाज़ में I बस इस स्तिथि में कुछ देर बने रहना है I

वैज्ञानिक विश्लेषण:- 

इस से यह होगा की आपके Brain (दिमाग) का Right (दाहीना) हिस्सा (Right Hemisphere of Brain) activate (सक्रिय) होना शुरू हो जाएगा एवं Left Nostril (बायीं नासिका छिद्र) चलने लगेगा जिसको स्वरयोग में इंगला नाड़ी (चंद्र स्वर) चलने लगेगा और मन के विचार थमने लगेंगे एवं मन अपने आप ही शांत और स्थिर हो जाएगा I

यानी जिस तरफ आप अपनी दोनों आँखों से देखोगे उसी तरफ का स्वर (नाड़ी)/Nostril (नासिका छिद्र) चलने लगेगा और उसका उल्टा हिस्सा Brain का Half Hemisphere part activate (सक्रिय) होने लगेगा जिससे आपके मन के विचार थमने लगेंगे I

अब इसका उल्टा (vice versa) करना है I

इसी तरह हमे इसका उल्टा भी करना है यानी अपनी दोनों आँखों से दायीं ओर (Right side) देखना है और बायीं कान (Left Ear) से आस-पास की आवाज़ सुनना है I आप कोई संगीत या मंत्र भी हल्की आवाज़ में चला सकते है I इस स्तिथि में कुछ देर बने रहना है I

वैज्ञानिक विश्लेषण :- इस से यह होगा की आपके Brain का Left हिस्सा (Left Hemisphere of Brain) activate (सक्रिय) होना शुरू हो जाएगा और Right Nostril (दायीं नासिका छिद्र) चलने लगेगा जिसको स्वरयोग में पिंगला नाड़ी या सूर्य स्वर का चलना कहते है I ऐसा करने से आपका मन अपने आप शांत और स्थिर हो जाएगा और आपके मन के विचार थमने लगेंगे I

ऐसा करने से आपके Brain के दोनों Hemispheres (Right & Left both part) activate (सक्रिय) हो जाएगा जिशसे आपकी बहुत सी बीमारियाँ विशेषतर मानसिक बीमारियाँ (Depression/अवसाद) तो अपने आप ही ठीक होने लगेगी I

जिस तरफ आप देख रहे हो उस तरफ का स्वर (Right/Left Nostril) नाड़ी अपने आप चलने लगेगा, यही इस विधि की प्रमाणिकता है I

एकपाद आसन (सुष्मना नाड़ी को चलाने वाला आसन)

इस आसन से व्यक्ति की सुष्मना नाड़ी अपने आप चलने लगती है I इस आसन को करने के लिए आपको Left (बायीं) पैर पर खड़ा होना है I दो (2) मिनट के लिए खड़े रहना है I शुरू में दिक्कत होगी पर धीरे-धीरे अभ्यास हो जाने से एकपाद आसन होने लगेगा I जब इसका अच्छे से अभ्यास हो जाए तो दोनों Nostrils (नासिका छिद्र) में चलने वाली साँसों को देखना (चेक) करना है I आपको देखना है की हमारे दोनों Nostrils (दायीं एवं बायीं नासिका छिद्र से आपकी साँस एक सामान बराबर चल रही है I यदि हां तो आपका ये आसन (एकपाद आसन) सफल हो रहा है मतलब आपका सुष्मना नाड़ी चल रहा है (जागृत है) I

अब अगर आपका सुष्मना नाड़ी चल रहा है तो आपको बैठ जाना है और दोनों आँखों को थोड़ा ऊपर की ओर उठाते हुए आँखें बंद कर लेनी है और बंद आँखों को भी ऊपर की ओर ही रखना है I आँखें बंद हो परन्तु आपकी आँखें ऊपर की ओर होनी चाहिए I आप चाहे तो आँखों को थोड़ा खोल भी सकते है I जितनी देर इस स्तीथि में आप रह सकते है, आपको बने रहना है I आपको जो अनुभव होगा वो कमाल का होगा I इस विधि (आसन) से आपका मन पूरी तरह स्थिर और शांत हो जाएगा I

Source : ‘Yoga my Life’ YouTube channel by आचार्य हरीश (PHD in Yogic Science) (Bihar school of Yoga), मुंगेर I

YouTube video name एक वैज्ञानिक ध्यान विधि 


See below for the details of Topics related to the above post


Source- Google Search & Wikipedia Functions of the Right & Left Hemispheres of Brain

The left side of the brain is responsible for controlling the right side of the body.
It also performs tasks that have to do with logic, such as in science
and mathematics. On the other hand, the right hemisphere coordinates the
left side of the 
body, and performs tasks that have do with creativity and the arts.



Binaural beatsWikipedia]    

https://en.wikipedia.org/wiki/Beat_(acoustics)#Binaural_beats

Binaural beats
MENU
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To experience the binaural beats perception, it is best to listen to this file with headphones on
moderate to weak volume – the sound should be easily heard, but not
loud. Note that the sound appears to pulsate only when heard through
both earphones. Time duration of 10 seconds
MENU
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Binaural Beats Base tone 200 Hz, beat frequency from 7 Hz to 12.9 Hz. Time duration of 9 minutes.

A binaural beat is an auditory illusion perceived when two different pure-tone sine waves, both with frequencies lower than 1500 Hz, with less than a 40 Hz difference between them, are presented to a listener dichotically (one through each ear).

For example, if a 530 Hz pure tone is
presented to a subject’s right ear, while a 520 Hz pure tone is
presented to the subject’s left ear, the listener will perceive the auditory illusion of
a third tone, in addition to the two pure-tones presented to each ear.
The third sound is called a binaural beat, and in this example would
have a perceived pitch correlating to a frequency of 10 Hz, that being
the difference between the 530 Hz and 520 Hz pure tones presented to
each ear.[citation needed]

Binaural-beat perception originates in the inferior colliculus of the midbrain and the superior olivary complex of the brainstem, where auditory signals from each ear are integrated and precipitate electrical impulses along neural pathways through the reticular formation up the midbrain to the thalamusauditory cortex, and other cortical regions.[6]

Some potential benefits of binaural beats therapy may include: reduced stress, reduced anxiety, increased focus, increased concentration, increased motivation, increased confidence, and deeper meditation.
However, research is inconclusive about the clinical benefits of
binaural beat therapy, hence it is best not to replace traditional
treatments for stress and anxiety with this type of intervention until
conclusive evidence is presented. Binaural beat therapy is today (2020)
not part of standard care for any condition.[7]


                                                                       ***End***        

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