चमत्कारी मंत्र जिससे लाखों मरीज ठीक हुए (ओशो) [Osho] 


मंत्र का अर्थ
है
जो
बारबार
पुनरुक्त
करने
से
अपनी
शक्ति
को
अर्जित
करें
I
जिसकी पुनरुक्ति शक्ति संचय
करें. जिस विचार को भी
बारबार
पुनरुक्त
करोगे
वह
धीरेधीरे
आचरण
बन
जाएगा
I
जिस विचार को बारबार
दोहराएंगे,जीवन
में
वह
प्रकट
होना
शुरू
हो
जाएगा
I
जो भी आप  है, वह आपके
द्वारा
अनंत
बार
कुछ
विचारों
को
दोहराए
जाने
का
परिणाम
है
I

सम्मोहन पर बड़ी
खोज हुए I आधुनिक
मनोविज्ञान  सम्मोहन
के बड़े गहरे
तलो  को
खोजा है I सम्मोहन की प्रक्रिया
का
गहरा
सूत्र
एक
ही
है
कि
जिस
विचार
को
भी
वस्तु
में
रूपांतरित
करना
हो,
उसे
जितनी
बार
संभव
हो
उसे
दोहराने
से
उसकी
लीक
मन
में
बनने
लगती
है
I
 
लीग  बनने से मन
का
वही
मार्ग
हो
जाता,
जिससे
नदी
बह
जाती. अगर एक गड्ढा खोदकर
रास्ता
बना
दी
जाए
तो
नहर
बन
जाती
वैसे
ही
अगर
मन
में
लीग
 
बन जाए किसी
भी
विचार
की,
तो
विचार
परिणाम
में
आना
शुरू
हो
जाते
हैं
I

फ्रांस में बहुत
बड़ा मनोवैज्ञानिक हुआ
माल कुएं’ ने
लाखों लोगों को
केवल मंत्र के
द्वारा  ठीक
किया I लाखों  मरीज
सारी दुनिया से  उसके
पास पहुंचते और
उसका इलाज बहुत
छोटा सा था,
वह मरीज को
कहता था तुम
यही दोहराए चले
जाओ कि तुम
बीमार नहीं हो,
स्वस्थ हो, स्वस्थ
हो रहे हो’I  इस
वाक्य को दिन-रात,  सोते-जागते
हर समय कोई
भी कार्य करने
के दौरान स्मरण
किया जाए I हर
समय एक विचार
को दोहराते रहो
कि मैं स्वस्थ हूं मैं
स्वस्थ
हूं,
मैं
निरंतर
स्वस्थ
और
चमकदार
हो
रहा
हूं’
I
कठिन से कठिन  रोग
के मरीज सिर्फ
इसी युक्ति से
ठीक हुए I उसके
पास सारी दुनिया
से लोग पहुंचने
लगे, लेकिन बात
तो बहुत छोटी
है, साधारणतः  जब आप
ठीक होते हैं
किसी बीमारी से
तो मनोवैज्ञानिक कहते
हैं उसमें दवा
का काम केवल
10% ही होता है
I
बाकी 90% की पूर्ति
तो मनोभाव से
होती है I इसलिए
डॉक्टर के कहने
पर रोगी दवा
को दिन में
4 बार लेते कभी
8 बार लेते I  जब भी
दवा को लेते
हैं तभी मन
में यह भाव
आता है कि
अब मैं ठीक
हो जाऊंगा ठीक
दवा मिल गई I
होम्योपैथी की गोलियों
में कुछ भी
नहीं होता लेकिन
उससे भी उतने
ही मरीज ठीक
होते हैं जितने
एलोपैथी से I अच्छा
डॉक्टर अगर पानी
भी दे दे
तो आप ठीक
हो जाएंगे, क्योंकि
सवाल दवा का
नहीं अच्छे डॉक्टर
का है I अच्छे
डॉक्टर पर आपको
भरोसा होता है,  भरोसा
तिरुपति बन जाता
है, आप जानते
हैं कि अच्छे
डॉक्टर ने इलाज
किया I  इसलिए
जो डॉक्टर आप
से कम फीस
लेता है शायद
वह आपको ठीक
ना कर पाए,
जो डॉक्टर आपसे
ज्यादा फीस लेता
है वही आपको
ठीक कर पाएगा क्योंकि
जब आपकी जेब
ज्यादा खाली होती
है तो भरोसा
बनने लगता है
कि  बड़ा
डॉक्टर है, आप
जैसे बड़े मरीज
को तो बड़ा
डॉक्टर चाहिए I पश्चिम में
एक रिसर्च हुआ
जिसमें डॉक्टर ने एक
ही बीमारी के
50  मरीजों
पर यह प्रयोग
किया गया I 50 में
से 25 को वास्तविक
दवा दी गई
और 25 को सिर्फ
पानी दिया गया I
लेकिन पता किसी
को भी नहीं
है कि किस
को पानी दिया
गया, किस को
दवा दी गई I
मरीजों को पता
नहीं वह सभी
को दवा मानकर  ले
रहे हैं I हैरानी
हुई कि  जितने मरीज दवा
से ठीक हुए
उतने ही मरीज
पानी से भी
ठीक हुए, दोनों
का प्रतिशत बराबर
रहा I

इसलिए जब कभी
कोई पहली बार
दवा खोजी जाती
है, तो सब
मरीज ठीक होते
हैं, फिर धीरेधीरे संख्या
कम होती जाती
है I इसलिए हर
दवा दोतीन
साल से ज्यादा
नहीं चलती क्योंकि
जब पहली दफा
दवा खोजी जाती
है, तो बड़ा
भरोसा पैदा होता
है कि अब
खोज ली गई
है असली दवा I
सारी दुनिया में
मरीज उससे प्रभावित
होते, फिर धीरेधीरे भरोसा
कम होने लगता
है,  कि
कभी कोई मरीज
उससे ठीक नहीं
होता, कभी कोई
जिद्दी मरीज मिल
जाता है जो
सुनता नहीं, जिसके
कारण दूसरे मरीजों
का भरोसा भी
समाप्त होने लगता
है I धीरेधीरे
दवा का प्रभाव
खो जाता है,
इसलिए हर दोतीन साल
में नई दवाएं
खोजनी पड़ती है I
दवाओं का भी
प्रभाव विज्ञापन ठीक से
किया जाए तो
ही होता है,
तो हर अखबार,
पत्रिका, रेडियो, टेलीविज़न, सब
तरफ से प्रचार
होना चाहिए  Iप्रचार जायदा कारगर
होता है I जितनी
दवा के तत्व
उससे जायदा क्योंकि
वही प्रचार आप
को  सम्मोहित
करेगा, वह प्रचार
मंत्र बन जाता
है I अखबार खोला
एस्ट्रो’, रेडियो खोलाएक्सप्रो’
टेलीविजन पर गए
एसप्रो’ बाजार में निकले
एसप्रो’ और बोर्ड
पर भी लिखा
हैएस प्रो’,
जो कुछ भी
करूं यहएक्सप्रो’
पीछा करती फिर
वह बीमारी से
भी बड़ा सिरदर्द
बन जाती फिर
वह सिर दर्द
को हरा देती I

मंत्र का अर्थ
है
किसी
चीज
को
बार
बार
उतारो
I
यह सूत्र कह रहा
है
कि
किसी
मंत्र
की
जरूरत
अगर
तुम
समझ
लो
तो,
चित्त
की
प्रक्रिया
ही
पुनरुक्ति
है
I
तुम्हारा मन करता क्या
रहा
है?
जन्मोंजन्मों
से
सिर्फ
दोहरा
रहा
है,
हम
रोज
वही
दोहराते
हैं,
जो
हमने
कल
किया
था,
जो
परसों
किया
था,
वही
हम
आज
भी
कर
रहे
हैं,
वही
हम
कल
भी
करेंगे,
अगर
ना
बदलें
और  तुम जितना ही
वही
करते
जाओगे,
जो
बरसों
से
कर
रहे
हो,
उतनी
ही
पुनरुक्ति
प्रगाढ़
होती
जाएगी
और
हम
झंझट
में
इस
तरह
फस
जाएंगे
की
पहचान
मुश्किल
हो
जाए
I

लोग मेरे
पास आते वह
कहतेसिगरेट नहीं
छूटती’, सिगरेट मंत्र बन गई I
उन्होंने सिगरेट को अनेकों
बार दोहराया है
I
1 दिन में 24 सिगरेट पी
रहे हो, मतलब
एक 1 दिन में
24 बार सिगरेट को दोहरा
रहे हो I

बारबार
दोहराया
है
और
सालों
से
दोहरा
रहे
हो,
और
आज
अचानक
उसे
छोड़
देना
चाहते
हो
I
लेकिन जो चीज मंत्र
बन
जाए
उसे
अचानक
नहीं
छोड़ा
जा
सकता
I
तुम छोड़ दोगे उस
से
क्या
फर्क
पड़ता
है?
तेरा
पूरा
मन
करेगा,
पूरा
शरीर
उसको
मांगेगा,
उसी
को
तुम
तलब
कहते
हो
I
तलब
का
मतलब
हुआ
कि
जिस
चीज
को
तुमने
मंत्र
बना
लिया
उसे
अचानक
छोड़
देना
चाहते
हो
I
वह बस का नहीं
होता
जो
चीज
मंत्र
बन
गई
है,
उसको
विपरीत
मंत्र
से
तोड़ना
होगा
I

रूस में एक
प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक है I वह
एकमात्र ऐसा अकेला
आदमी है जिसने
तकलीफ वाले मरीजों
को ठीक करने
में सफलता पाई
है I अगर आप
सिगरेट पीने के
रोगी हो गए
हैं, और उसे
छोड़ना चाहते हैं, परंतु
छोड़ नहीं पाते I
तो वह मनोवैज्ञानिक
इस मंत्र का
प्रयोग करता और
उसके मंत्र जरा
तेज होते I वह
आपको सिगरेट देगा,
जैसे ही आप
सिगरेट हाथ में
लेंगे आप को
बिजली का झटका
लगेगा I पूरा शरीर  कॉप
जाएगा, सिगरेट हाथ से
छूट जाएगी I वह
मनोवैज्ञानिक अपने अस्पताल
में आपको भर्ती
रखेगा I लेकिन जब भी
आप सिगरेट पिएंगे  तभी
आप को बिजली
का झटका लगेगा
I
सिगरेट से ज्यादा
गहरा हो जाएगा  बिजली
का झटका I सिगरेट
का नाम सुनकर
आपको कपकपी आने
लगेगी I पीने का
रस तो दूर,
एक वैराग्य का
उदय हो जाएगा I
उस मनोवैज्ञानिक ने
हजारोंलाखों रोगियों को
इस मंत्र से
ठीक किया I

वह कहता
है कि जो
लोग बुरी आदतों
से ग्रस्त हो
गए हैंI जब
तक उनको विपरीत
आदतें दी
जाए, जो पहली
आदत से जायदा
मजबूत हो, तब
तक  इससे
कोई छुटकारा संभव
नहीं है I तुम्हारा
जीवन जैसा भी
है, तुम्हारे मन
का ही परिणाम
है और तुम दोहराए
चले जाते हो I
तुम क्रोध से
बाहर भी होना
चाहते हो, लेकिन
रोज क्रोध को
दोहराए चले जाते
हो I

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