Depression – डिप्रेशन (अवसाद) के बारे में ओशो [Osho] के महत्वपूर्ण विचार और समाधान (उपचार)
डिप्रेशन को अपना
डिप्रेशन मत बनाएं
I जब भी तुम्हें
डिप्रेशन या अवसाद
हो तो याद
रखो, उस क्षण
की प्रतीक्षा करो
जब डिप्रेशन चला
जाएगा I कुछ भी
हमेशा नहीं रहता I
डिप्रेशन में आने
पर जब डिप्रेशन
चला जाए उसकी
प्रतीक्षा करो I अत्यंत जागरूकता
के साथ, क्योंकि
डिप्रेशन की काली
अंधेरी रात के
बाद सुबह होगी
और सूरज उगेगा
I यदि तुम उस
क्षण में जागे
रह सको तो
तुम आनंदित होगे
कि तुम डिप्रेशन
से गुजरे, तुम
अनुभव रहित होगे
कि तुम विषाद
ग्रस्त थे, क्योंकि
विषाद के बिना
जीवन की यह
किरण संभव न
थी I
लेकिन हम क्या
करते हैं? हम
एक अंतहीन दुष्चक्र
में चले जाते
हैं, पहले हम
डिप्रेशन में जाते
हैं फिर उसके
कारण एक दूसरा
डिप्रेशन खड़ा कर
लेते हैं I यदि
तुम्हें डिप्रेशन है तो
ठीक है उसमें
कुछ भी गलत
नहीं, बल्कि यह
एक सुंदर घटना
है क्योंकि तुम
इससे सीख लोगे
और तुम्हारी प्रेरणा
होगी I लेकिन तुम दुखी
हो जाते हो
कि मुझे डिप्रेशन
क्यों हुआ? मुझे
डिप्रेशन नहीं होना
चाहिए I फिर तुम
डिप्रेशन से लड़ने
लगते हो I पहला
डिप्रेशन तो ठीक
है लेकिन तुम्हारा
दूसरा डिप्रेशन है
वह अवास्तविक है,
पर यह अवास्तविक
डिप्रेशन तुम्हारे मन पर
बादल बनकर छा
जाएगा I तुम वह
क्षण चूक जाओगे
जो वास्तव डिप्रेशन
के बाद आया
होता I जब डिप्रेशन
में हो तो
पूरी तरह डिप्रेशन
में चले जाओ
बस विषाद ग्रस्त
रहो I अपने डिप्रेशन
के कारण डिप्रेशन
में मत जाओ I
उससे लड़ो मत
उससे ध्यान हटाने
की कोशिश मत
करो, उसे धकेलने
का प्रयास मत
करो I उसे प्रकट
होने दो I अपने
आप वह चला
भी जाएगा I
जीवन एक
प्रवाह है, यहां
कुछ भी सदा
एक सा नहीं
रहता I तुम्हारी जरूरत नहीं
है, नदी अपने
आप बह रही
है यदि तुम
नदी को धक्का
देने की कोशिश
करो, तो तुम
मूर्ख के अतिरिक्त
और कुछ नहीं I
नदी अपने आप
बहती है और
उसे बहने दो I
जब डिप्रेशन
में हो तो
होने दो, उसके
कारण डिप्रेशन में
मत जाओ I यदि
तुम चाहोगे कि
उस से जल्दी
छुटकारा हो तो
वह तुम्हें और
घेर लेगा I यदि
तुम डिप्रेशन से
लड़ोगे तो एक
नया डिप्रेशन पैदा
कर लोगे, जो
कि खतरनाक है.
पहला डिप्रेशन
तो अस्तित्व गद
था I दूसरा तुम्हारा
बनाया हुआ है,
वह अस्तित्व नहीं
है मानसिक है I
फिर तो तुम
मन की खाई
और कंदराओं में
फस जाओगे I यदि
तुम डिप्रेशन में
हो तो, प्रसन्न
हो कि तुम
डिप्रेशन में हो
I उसे पूरी तरह
प्रकट होने दो,
और तुम यह
देखोगे कि अचानक
डिप्रेशन विदा हो
जाएगा और तुम
एक संक्रमण से
गुजर जाओगे I आकाश में
कोई बादल नहीं
रहेंगे सब कुछ
स्पष्ट होगा, एक क्षण
के लिए स्वर्ग
तुम्हारे लिए अपने
द्वार खोल देगा I यदि
तुमने डिप्रेशन को
अपना डिप्रेशन नहीं
बनाया है, तो
तुम स्वर्ग के
इस द्वार में
प्रवेश कर सकोगे,
और एक बार
तुम्हारा उस द्वार
से परिचय हो
जाए, तो तुम
यह सीख गए
कि जीवन विपरीत
परिस्थितियों का उपयोग
करता है, एक
शिक्षक की तरह,
इसलिए मैं कहता
हूं कि डिप्रेशन
में हो तो
उसे स्वीकार करो,
उससे लड़ो मत,
उससे लड़ोगे तो
और जायदा एक
दूसरा डिप्रेशन आप
पैदा करोगे I
संसार में एक
भी व्यक्ति ऐसा
नहीं है जिसको
निराशा ना हो
I निराश होना, डिप्रेशन में
होना बिल्कुल स्वभाविक
है I हर आदमी
चाहे वह कितना
ही अमीर हो
कितना ही सफल
हो कभी ना
कभी अपने जीवन
में निराश होता
है I निराशा या
डिप्रेशन हर आदमी
के जीवन में
कभी-कबार आते रहते
हैं, इसमें कुछ
भी ऐसा भावुक
नहीं है I यह
बिल्कुल नेचुरल चीज है,
तो इसे ज्यादा
अपने ऊपर हावी
ना होने दें I
हमारे जो मनोभाव
हैं, वह एक
बादल की तरह
होते हैं, जो
आते हैं और
चले जाते हैं I
कोई भी मनोभाव
चाहे क्रोध, नफरत,
गुस्सा, प्यार, कोई
भी मनोभाव हमेशा
नहीं टिकता I हमारी
मनोस्थिति समय के
साथ बदलती रहती
है I
इसलिए डिप्रेशन
में
यदि
आप
हैं,
तो
इसके
लिए
एक
सरल
उपाय
हैं
कि
आपको
किस
बात
का
डिप्रेशन
है?
यदि
आपके
साथ
पास्ट
में किसी आदमी ने
आपको
धोखा
दिया
है
या
आपके
साथ
कुछ
बदतमीजी
की
है
या
कुछ
भी
आपके
साथ
गलत
हुआ
है,
अथवा आपने समय या पैसे की बहुत बर्बादी की है यदि आप उसके
कारण
डिप्रेशन
में
है
तो
उसको
दूर
करने
का
एक
बहुत
ही
सरल
उपाय
है
कि
उस
चीज
को
आप
स्वीकार
कर
लीजिए
I
महत्वपूर्ण एवं मुख्य उपाय निम्नलिखित है
आप एक
कमरे
में
लेट
जाएं
और
लेटने
के
बाद
3 मिनट
तक
अपने
मन
को
यह
सुझाव
दें
कि
‘मेरा
शरीर
बिल्कुल
शिथिल
है,मेरा
शरीर
बिल्कुल
शिथिल
हो
रहा
है’
I उसके बाद 3 मिनट यह
सुझाव
आपको
देना
है,
तो
आप
देखोगे
कि
आपका
शरीर
बिल्कुल
शिथिल
होने
लगा
है,
पूरी
तरह
I दो–तीन मिनट तक
यह
सुझाव
देने
के
बाद,
आप
अपनी
सांसो
पर
आए
और
अपने
आप
को
यह
सुझाव
दें
कि
‘मेरी
सांसे
बिल्कुल
शिथिल
हो
रही
है’,
अब जब
आप
3 मिनट
तक
यह
सुझाव
दोगे तो आपकी सांसे
शिथिल
होने
लगेगी
I तीसरा स्तर
है
मन
उसके
बाद
3 मिनट तक
अपने
आप
को
यह
सुझाव
देना
है
कि
‘मेरा
मन
पूरी
तरह
शिथिल
हो
रहा
है’,
मेरा
मन
पूरी
तरह
शिथिल
है’
I
(आप चाहे तो
3-3 मिनट
के
यह
शेड्यूल्स
अपने
मोबाइल
में
रिकॉर्ड
कर
सकते
हैं)
उसके बाद में,
आपको
अपने
मन
को
यह
सुझाव
देना
है
कि
जो
कुछ
भी
पास्ट
में
आपके
साथ
हुआ
है
अथवा आपने समय या पैसे की बहुत बर्बादी की है, आप उसको
स्वीकार
कर
रहे
है
I आपके साथ
जो
भी
घटना
हुई
है
या
किसी
ने
भी
कुछ
गलत
किया
है
या
धोखा
दिया
है
कुछ
भी
अथवा आपने समय या पैसे की बहुत बर्बादी की है, उस घटना को
आप
स्वीकार
करें
I एक बार यदि कोई
चीज
स्वीकार
हो
जाती
है
तो
हमारा
उसकी
तरफ
ध्यान
जाना
बंद
हो
जाता
है
I यदि आप डिप्रेशन में
हो
तो
आप
उसे
स्वीकार
करो
I
डिप्रेशन और चिंता
इन
में
अंतर
क्या
होता
है?
यह अंतर होता
है कि डिप्रेशन
होता है कि
आप पास्ट में
जी रहे है,
की आपके साथ
पास्ट में कुछ
गलत हुआ है अथवा
आपने समय या पैसे की बहुत बर्बादी की है, जिसके
कारण आप डिप्रेशन
में जी रहे
है I चिंता
मतलब आपको भविष्य (फ्यूचर) का डर
सता रहा है I
दोनों के बीच
में यह बेसिक
डिफरेंस होता है
I डिप्रेशन और चिंता
के बीच में
यह मूल अंतर
होता है I आप
डिप्रेशन में हो
तो उसका मुख्य
जो कारण है जिसके
कारण आप डिप्रेशन
में हो उसको
स्वीकार कर लो,
तो आपका ध्यान
उस तरफ जाना
बंद हो जाएगा
और आप जल्द
ही डिप्रेशन से
बाहर निकल जाओगे I
![अवसाद के बारे में ओशो के विचार OSHO ABOUT DEPRESSION (Thoughts & Overthinking) [Remedy of Overthinking, Depression,Mental disorder, Insomnia,Sleeplessness]](http://newsindiaweb.in/wp-content/uploads/2024/03/cropped-Purple-Blue-Modern-Technology-Logo-1_page-0001.jpg)