त्वचा के किसी भी हिस्से में त्वचा को खुरचने की अनुभूति होना ही खुजली है। खुजली में एक शरीर में एक तरह का सेनसेशन होता है जो कि त्वचा को नोंचने (Scratch) या खुजलाने पर मजबूर कर देता है। कई बार खुजली (Khujli) सामान्य हो सकती है लेकिन कई बार यह त्वचा संबंधी किसी बीमारी या अंदरूनी किसी बड़ी बीमारी का संकेत भी हो सकती है। इचिंग या खुजली को स्वास्थ्य की भाषा में प्रूराइटस भी कहते हैं। कई बार व्यक्ति बिना खुजली भी खुजलाता है, ऐसा व्यक्ति के तनाव में होने या अकेलापन महसूस करने के कारण होता है।…
Author: News India Web
हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त नींद बहुत ही जरूरी है। इंसान के शरीर को नींद की उतनी ही जरूरत है जितनी खाने पीने की। पर्याप्त नींद नहीं लेने से हमारी कार्यक्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है।हर उम्र में शरीर की नींद की अवधि की जरूरत बदलती है। नवजात शिशु 18 घंटे तक सोते हैं तो वयस्कों को औसतन आठ घंटे की नींद की जरूरत होती है।पर्याप्त नींद के अभाव का सीधा असर हमारे शरीर की चयापचय प्रक्रिया (Metabolic Process) पर पड़ता है और इससे मधुमेह (Diabetes), वज़न का बढ़ना (Weight Gain), उच्च रक्त चाप (High Blood…
यह एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में, खांसने, छींकने (sneezing) या उसके संपर्क में रहने से फैल जाता है। वातावरण में ज्यादा आद्रता होने पर भी फ्लू फैलता है। इसके कारण लोगों को वायरल बुखार, सर्दी जुकाम, संक्रमण, सिर दर्द और टायफाइड जैसी बीमारियां हो जाती हैं। इंफ्लूएंजा में ठंड और गरमी बारी बारी से लगते रहते हैं और बुखार 100 से 103 डिग्री तक हो सकता है लेकिन बीमारी बढ़ने पर बुखार 106 डिग्री तक भी पहुंच जाता है। सामान्य फ्लू का प्रभाव दिसंबर से अप्रैल तक रहता है। फ्लू होने पर शरीर को हाइड्रेट करते रहना बहुत…
ज्यादातर 1 से 14 साल के बच्चे एवं 65 वर्ष से ऊपर के लोग इसकी चपेट में आते हैं। मस्तिष्क ज्वर, दिमागी बुखार (Dimagi Bukhar) और जापानी इन्सेफेलाइटिस के नाम से पहचानी जाने वाली इस जानलेवा बीमारी का शिकार अधिकांशतः बच्चे ही होते हैं। देश के 19 राज्यों के 171 जिलों में जापानी इन्सेफेलाइटिस का असर है। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार सहित दूसरे राज्यों के 60 जिले इन्सेफेलाइटिस से ज्यादा प्रभावित हैं। कारण : जापानी इन्सेफेलाइटिस विषाणु (Japanese Encephalitis Virus)• रेबिज वायरस• हरपीज सिंप्लेक्स• पोलियो वायरस• खसरे के विषाणु• छोटी चेचक विषाणु• जापानी इन्सेफेलाइटिस विषाणु• सेंट लुइस विषाणु• पश्चिमी…
शरीर के ऐसे हिस्से जहां हड्डियां मिलती हों, जोड़ कहलाते हैं, जैसे घुटने (knee), कंधे (shoulder), कोहनी (elbow) आदि। इन्हीं जोड़ों में कठोरता (stiffness), सूजन (swelling), किसी तरह की तकलीफ जो दर्द का कारण बने, जोड़ों में दर्द कहलाती है। जोड़ों में दर्द एक आम समस्या है जिसमें लगातार अस्पताल जाने या दवा (medicine) खाने की जरूरत नहीं होतीअर्थराइटिस (arthritis) जोड़ों में दर्द का सबसे आम कारण है लेकिन जोड़ों में दर्द (Jodo me Dard) कई अन्य वजहों जैसे कि लिगामेंट (ligaments), कार्टिलेज (cartilage) या टेंडोंस में से किसी भी संरचना में चोट के कारण से भी हो सकता है।…
यह बहुत ही सूक्ष्म विषाणु (Virus) से होता है। शुरू में जब रोग धीमी गति से व मामूली होता है तब इसके लक्षण दिखाई नहीं पड़ते हैं, लेकिन जब यह गंभीर हो जाता है तो मरीज की आंखे व नाखून पीले दिखाई देने लगते हैं। जिन वायरस से यह होता है उसके आधार पर मुख्यतः पीलिया तीन प्रकार का होता है (Types of Jaundice) वायरल हैपेटाइटिस ए, वायरल हैपेटाइटिस बी तथा वायरल हैपेटाइटिस नॉन ए व नॉन बी। शरीर में एसिडिटी के बढ़ जाने, काफी दिनों तक मलेरिया रहने, पित्त नली में पथरी अटकने, ज्यादा शराब पीने, अधिक नमक और…
घुटना शरीर का सबसे बड़ा तथा जटिल जोड़ है। यह एक सायनोवियल जोड़ (Sinovial Joint) का उदाहरण हैं। इस जोड़ में मुख्यत चार हड्डियों, लगभग 15 मांसपेशियों के अलावा एक और महत्त्वपूर्ण चीज़ होती है जिसे कारटीलेज (Cartilage) कहते हैं।दैनिक जीवन में चलने-फिरने, चढ़ाव चढ़ने, सैर करने, व्यायाम करने, व्यायाम करने से घुटनों के जोड़ों में स्थित कारटीलेज का क्षय होता है|कारटीलेज में द्रव या कोलोजन, रक्त प्रवाह के अभाव में कठोर होने लगता है।घुटनों का दर्द (About Knee Pain in Hindi)यह रोग पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में ज्यादा पाया जाता है। इसका कारण है महिलाओं में माहवारी बन्द होने…
News India Webन्यूज़ इंडिया वेब पोर्टल, डिजिटल मीडिया हिंदी न्यूज़ चैनल है जो देश प्रदेश की प्रशाशनिक, राजनितिक इत्यादि खबरे जनता तक पहुंचाता है, जो सभी के विश्वास के कारण अपनी गति से आगे बढ़ रहा है |
पेट के निचले हिस्से में या मुत्राशय में तेज दर्द पथरी की निशानी हो सकती है। यह एक ऐसी समस्या है जो किसी भी इंसान को हो सकती है। गुर्दे की पथरी में जो दर्द होता है वह बेहद असहनीय हो जाता है। इस बीमारी को समझना और इससे दूर रहने के उपाय जानना बेहद आवश्यक है।गुर्दे की पथरी (About Kidney Stone in Hindi)गुर्दे की पथरी (Gurde ki Pathri) की समस्या तब पैदा होती है जब गुर्दे (Kidney) के अंदर छोटे-छोटे पत्थर बन जाते है। ये आमतौर पर मध्य आयु यानि चालीस साल या उसके बाद पता लगने शुरू होते…
कुष्ठरोग (Leprosy) माइकोबैक्टेरियम लेप्री (Mycobacterium Leprae) और माइकोबैक्टेरियम लेप्रोमेटॉसिस (Mycobacterium Lepromatosis) जीवाणुओं के कारण होने वाली एक दीर्घकालिक बीमारी (Chronic Disease) है। यह मुख्य रूप से मानव त्वचा (Skin), ऊपरी श्वसन पथ की श्लेष्मिका (Mucous Membrane of Upper respiratory Track) , परिधीय तंत्रिकाओं (Peripheral Nerves), आंखों और शरीर के कुछ अन्य क्षेत्रों को प्रभावित करती है। यदि कुष्ठरोग (Kushth Rog) का उचित समय पर उपचार न किया जाये तो यह रोग बढ़ सकता है, जिससे त्वचा, नसों, हाथ-पैरों और आंखों में स्थायी क्षति हो सकती है। कुष्ठरोग के प्रकार (Types of Leprosy)कुष्ठरोग सामान्यतः तीन प्रकार का होता है, जो निम्न…