शरीर के ऐसे हिस्से जहां हड्डियां मिलती हों, जोड़ कहलाते हैं, जैसे घुटने (knee), कंधे (shoulder), कोहनी (elbow) आदि। इन्हीं जोड़ों में कठोरता (stiffness), सूजन (swelling), किसी तरह की तकलीफ जो दर्द का कारण बने, जोड़ों में दर्द कहलाती है। जोड़ों में दर्द एक आम समस्या है जिसमें लगातार अस्पताल जाने या दवा (medicine) खाने की जरूरत नहीं होती
अर्थराइटिस (arthritis) जोड़ों में दर्द का सबसे आम कारण है लेकिन जोड़ों में दर्द (Jodo me Dard) कई अन्य वजहों जैसे कि लिगामेंट (ligaments), कार्टिलेज (cartilage) या टेंडोंस में से किसी भी संरचना में चोट के कारण से भी हो सकता है। जोड़ शरीर का अहम हिस्सा होते हैं जिनके कारण उठना- बैठना, चलना, शरीर को मोड़ना आदि संभव हो पाता है। ऐसे मे जोड़ों में दर्द होने पर पूरे शरीर का स्वास्थ्य प्रभावित होता है।
कारण :
- उम्र बढ़ने के साथ
- हड्डियों में रक्त की आपूर्ति में रूकावट आना
- रक्त का कैंसर होना
- हड्डियों में मिनरल यानि की खनिज की कमी होना
- जोड़ों पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ना
- जोड़ों में इंफेक्शन होना
- हड्डियों का टूटना
- मोच आना या चोट लगना
- हड्डियों में ट्यूमर आदि की शिकायत होना
- अर्थराइटिस
- बर्साइटिस
- ऑस्टियोकोंड्राइटिस
- कार्टिलेज का फटना
- कार्टिलेज का घिस जाना लक्षण : • जोड़ों को मोड़ने में परेशानी होना
• जोड़ों का लाल होना
• जोड़ों में खिंचाव महसूस होना
• जोड़ों पर कठोरता होना
• चलने- फिरने में दिक्कत होना
• जोड़ों में अकड़न आना
• जोड़ों में सूजन और दर्द
• जोड़ों में कमजोरी होना आयुर्वेदिक उपचार : • मालिश (Massage)
मालिश से शरीर के दर्द में बेहद आराम मिलता है, यही प्रक्रिया जोड़ों के दर्द में भी लागू होती है। नारियल, जैतून, सरसों या लहसुन के तेल से प्रभावित हिस्से की मालिश करें। हल्के हाथों से दबाव देते हुए दर्द वाले हिस्से को मलें। ऐसा करने से दर्द से राहत मिलेगी। • गर्म और ठंडी सिकाई (Cold and Hot Compress)
जोड़ों के दर्द से निजात के लिए गर्म और ठंडी सिकाई करने से भी बहुत आराम मिलता है। गर्म सिकाई करने से रक्त संचार बेहतर होता है वहीं ठंडी सिकाई से सूजन और चुभन कम होती है।
गर्म सिकाई के लिए गर्म पानी की बोतल को तौलिया में लपेट कर गर्दन की सिकाई करें। जबकि, ठंडी सिकाई करने के लिए बर्फ के टुकड़ों को तौलिया में लपेटकर, उस तौलिया से सिकाई करें। सिकाई करते वक्त कम से कम दो से तीन मिनट तक गर्दन की लगातार सिकाई होनी चाहिए। यह पूरी प्रक्रिया 15 से 20 मिनट में दोहराएं। इस विधि को आराम होने तक दिन में दो बार करें। • लहसुन (Garlic)
यदि जोड़ों में दर्द है तो लहसुन का इस्तेमाल बेहद अच्छे परिणाम दे सकता है। इसके औषधीय गुण गर्दन के दर्द, सूजन और जलन को ठीक करते हैं। लहसुन की दो कली हर सुबह खाली पेट पानी के साथ खाएं। खाना बनाने वाले किसी भी तेल में लहसुन की कुछ कलियां डाल कर भून लें। इस तेल को गुनगुना होने तक ठंडा करें और प्रभावित हिस्से की मालिश करें। इस विधि को दिन में दो बार किया जा सकता है। • हल्दी (Turmeric)
हल्दी के औषधीय गुण किसी से छिपे नहीं है लेकिन अच्छी बात यह भी है कि यह जोड़ों के दर्द में भी उतनी ही प्रभावी है। हल्दी रक्त संचार तेज करके जोड़ों के दर्द से आराम देती है और गर्दन की अकड़न को भी कम करती है। • अदरक (Ginger)
जोड़ों के दर्द के इलाज के लिए अदरक भी बेहतरीन प्रभाव दिखाता है। यह हर्ब भी गुणों से भरपूर है जो कि रक्त संचार को तेज करती है जिससे गर्दन के दर्द से राहत मिलती है। एक दिन में लगभग तीन कप अदरक की चाय पिएं। अदरक की चाय बनाने के लिए पानी में अदरक उबालें और ठंडा करके इसमें शहद मिलाएं। इस पेय को पिएं। प्रभावित हिस्से की अदरक के तेल से मसाज भी की जा सकती है। • सेब साइडर सिरका (Apple Cider Vinegar)
सेब का सिरका भी जोड़ों के दर्द से राहत देने में बहुत अच्छा असर दिखाता है। यह जोड़ों के दर्द और सूजन से राहत देता है। किसी कपड़े को सेब के सिरके में भिगोकर दर्द वाले स्थान पर लपेंटें और कुछ घंटों के लिए छोड़ दें। दिन में दो बार इस विधि को करें। दो कप सेब साइडर सिरका को गुनगुने पानी में डालकर नहाया भी जा सकता है। एक गिलास पानी में कच्चा सेब साइडर सिरका और शहद मिलाकर पीने से भी लाभ होता है। • लाल मिर्च पाउडर (Red Chillie Powder)
लाल मिर्च पाउडर भी जोड़ों के दर्द से राहत देने में बहुत प्रभावी है। उपचार के लिए एक कप नारियल के तेल को गरम करके, उसमें दो बड़े चम्मच लाल मिर्च पाउडर मिलाएं। इस मिश्रण से प्रभावित हिस्से पर लगाकर तकरीबन 20 मिनट के लिए छोड़ दें। ज्यादा आराम के लिए इस मिश्रण को प्रतिदिन दर्द वाले हिस्से पर लगाएं। बचाव : • गतिशील रहें (Keep moving)
जोड़ों के दर्द से राहत के लिए गतिशील रहें, यानि जोड़ों की मूवमेंट होती रहनी चाहिए। लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहने से भी जोड़ों में कठोरता महसूस होती है। • जोड़ों को चोट से बचाएं (Prevent joints from injury)
जोड़ों पर लगी चोट, हड्डी को तोड़ भी सकती है, इसलिए जोड़ों को चोट से बचाकर रखें। जब भी कोई ऐसा खेल खेलें जिसमें जोड़ों पर चोट लगने का डर हो, तो ज्वाइंट सेफ्टी पेड्स (Joint safety pads) पहनें। टेनिस और गोल्फ खेलते समय भी ब्रेसेस (braces) पहनें। • वजन को नियंत्रित रखें (Maintain your weight)
यदि आपका वजन नियंत्रण में रहेगा तो आपके जोड़ भी स्वास्थ्य रहेंगे। शरीर का ज्यादा वजन घुटनों और कमर पर अधिक दबाव डालता है, जिससे कार्टिलेज (cartilage) के टूटने का डर रहता है। ऐसे में वजन को नियंत्रण में रखना बेहद जरूरी है। • स्ट्रेचिंग ज्यादा न करें (Do not stretch more)
व्यायाम करते समय स्ट्रेचिंग करने की भी सलाह दी जाती है, लेकिन स्ट्रेचिंग केवल हफ्ते में तीन बार करें। स्ट्रेचिंग को एकदम शुरू करने की जगह, इससे पहले वार्म अप व्यायाम (warm up exercise) करें। • दूध पीएं (Drink milk)
जोड़ों को मजबूत रखने के लिए दूध जरूर पीएं। दूध से हड्डियों को कैल्श्यिम और विटामिन डी मिलता है जिससे हड्डियां मजबूत बनती हैं। यदि दूध पसंद न हो तो दूध से बने अन्य खाद्य पदार्थ जैसे पनीर, दही आदि भी खाए जा सकते हैं। • सही पोश्चर बनाए रखें (Maintain right posture)
जोड़ों के दर्द से राहत के लिए सही पोश्चर में उठना, बैठना और चलना बेहद जरूरी है। सही पोश्चर गर्दन से लेकर घुटनों तक के जोड़ों की रक्षा करता है। • व्यायाम (Exercise)
जोड़ों के स्वास्थ्य के लिए व्यायाम को दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। तैराकी (swimming) भी जोड़ों के दर्द से राहत के लिए अच्छा व्यायाम होती है।
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