• ऑटिज़्म (Autism) के लक्षण बच्चे के तीन साल की उम्र होने से पहले ही दिखने शुरू हो जाते है।ऑटिस्टिक बच्चे सामाजिक गतिविधियों के प्रति उदासीन होते है, वो लोगों की ओर ना देखते हैं, ना मुस्कुराते हैं और ज्यादातर अपना नाम पुकारे जाने पर भी सामान्य: कोई प्रतिक्रिया नहीं करते हैं।
• हाल की एक समीक्षा के अनुसार प्रति 1000 लोगों के पीछे दो मामले ऑटिज़्म (Autism) के होते हैं। पिछले कुछ दशकों में ऑटिज़्म (Autism) के मामलों में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि हुई है जिसका एक कारण चिकित्सीय निदान के क्षेत्र मे हुआ विकास है लेकिन क्या असल में ये मामले बढ़े है यह अपने आप में एक प्रश्न है।
कारण :
• मस्तिष्क की गतिविधियों में असामान्यता होना.
• मस्तिष्क के रसायनों में असामान्यता.
• आनुवंशिक आधार.
• परिणाम बताते हैं कि कम अंतराल पर हुई गर्भावस्थाओं से जन्म लेने वाले बच्चों में ऑटिज़्म विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है.
बचाव :
• खिलौनों के साथ खेलने का सही तरीका दिखाएँ
• बच्चे को घर के अलावा अन्य लोगों से नियमित रूप से मिलने का मौका दें
• बच्चे को तनाव मुक्त स्थानों जैसे पार्क आदि में ले कर जायें
• अन्य लोगों को बच्चे से बात करने के लिए प्रेरित करें
• तथा उसके किसी भी प्रयत्न को प्रोत्साहित करना न भूलें
• गलत व्यवहार दोहराने पर बच्चे को कुछ ऐसा काम करवांए जो उसे पसंद नही है
• यदि बच्चा कुछ देर गलत व्यवहार न करे तो उसे तुरंत प्रोत्साहित करें
• खेल-खेल में नए शब्दों का प्रयोग करें
• बारी-बारी से खेलने की आदत डालें
• धीरे-धीरे खेल में लोगो की संख्या को बढ़ते जायें
• छोटे-छोटे वाक्यों में बात करें
• साधारण भाषा का प्रयोग करें
• रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले शब्दो को जोड़ कर बोलना सिखांए
• पहले समझना तथा फिर बोलना सिखांए
• बच्चे को अपनी जरूरतों को बोलने का मौका दें
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