जब कोई हमें चोट पहुँचानेवाली बात कहता है या हमारे साथ रूखा व्यवहार करता है, तो हमें बहुत बुरा लगता है। खासकर अगर कोई दोस्त या रिश्तेदार ऐसा करे, तो चोट और गहरी होती है। तब समस्याओं का सामना करने में हिम्मत टूट जाती है, हम हन्ना से बहुत कुछ सीख सकते हैं। उसकी सौतन उस पर लगातार ताने कसती थी। (1 शमू. 1:12) हन्ना की तरह हम भी अपनी चिंताओं और परेशानियों के बारे में काफी देर तक यहोवा से प्रार्थना कर सकते हैं। यह ज़रूरी नहीं कि हमें प्रार्थना में बहुत सुंदर और दमदार शब्द कहने हैं। हो…
Author: Rajesh Ranjan Nirala
TO MY HEAVENLY FATHERHAPPY FATHER’S DAYपिता परमेश्वर की तरफ से कुछ ऐसी बातें मुझे मिली जो मै आपके सामने पेश कर रहा हूं इसे आप ध्यान से सुने, यदि हमने इनका पालन किया तो जीवन भर कभी भी कोई दुख कोई तकलीफ़ हमारे पास नहीं आयेगी :——–यदि हम आत्मिक पिता परमेश्वर का मान सम्मान करने के साथ-साथ अपने संसारिक पिता का उतना ही मान सम्मान करते हैं तो वह पिता परमेश्वर की निगाहों में उतम माना जाता है।पिता परमेश्वर की आज्ञा है:—–(1)*पिता की सख्ती बर्दाश करो, ताकी काबील बन सको,*(2)*पिता की बातें गौर से सुनो, ताकी दुसरो की न सुननी…
*हे बच्चों, प्रभु में अपने माता-पिता के आज्ञाकारी बनो, क्योंकि यह उचित है। “अपनी माता और पिता का आदर कर कि तेरा भला हो, और तू धरती पर बहुत दिन जीवित रहे।”* इफिसियों 6:1-3.यह परमेश्वर की आज्ञा है कि हम अपने माता-पिता का आदर करना चाहिए। लेकिन दुख की बात है कि कई लोग अपने माता-पिता के साथ अनादर और दुर्व्यवहार करते हैं, यह जाने बिना कि वे जो आज बोते है, वही कल काटेंगे। तो आइए हमेशा अपने माता-पिता को वह आदर और सम्मान दें, जिसके वे हकदार हैं।आमीनप्रभु आपको अपने माता-पिता का आज्ञाकारी बनाएरैव्ह राजेश गिरधर
*प्रभु के प्रति हमारा विश्वास एक पुल(Bridge)के समान है, जो आपको और प्रभु को आपस में जोड़े रखता है| विश्वास है तो सबकुछ है, विश्वास नहीं तो कुछ भी नहीं है| विश्वास की सबकी, अपनी परिभाषा हो सकती है| विश्वास का रिश्ता, चंगाई और दुआओं के सुने जाने से नहीं, प्रभु से है ; वो सुने या ना सुने तब भी वो मेरा प्रभु है *अगर दुआ ना सुनी जाए, तो इसका मतलब यह नहीं है, कि आप गुनहगार हैं, या आपका विश्वास कमज़ोर है| प्रभु की मर्ज़ी को समझने की ज़रूरत है| अपने आपको प्रभु की मर्जी पर छोड़…
*समय समय पर प्रभु का धन्यवाद अदा करते रहना चाहिए. *एक निर्माणाधीन भवन की सातवीं मंजिल से ठेकेदार ने नीचे काम करने वाले मजदूर को आवाज दी.*निर्माण कार्य की तेज आवाज के कारण मजदूर सुन न सका कि उसका ठेकेदार उसे आवाज दे रहा है.*ठेकेदार ने उसका ध्यान आकर्षित करने के लिए एक 1 रुपये का सिक्का नीचे फेंका जो ठीक मजदूर के सामने जा कर गिरा.**मजदूर ने सिक्का उठाया और अपनी जेब में रख लिया और फिर अपने काम मे लग गया.**अब उसका ध्यान खींचने के लिए ठेकेदार ने पुन: एक 5 रुपये का सिक्का नीचे फैंका.**फिर 10 रुपये का…
5 तेरे जीवन भर कोई तेरे साम्हने ठहर न सकेगा; जैसे मैं मूसा के संग रहा वैसे ही तेरे संग भी रहूंगा; और न तो मैं तुझे धोखा दूंगा, और न तुझ को छोडूंगा। यहोशू 1:57 इतना हो कि तू हियाव बान्धकर और बहुत दृढ़ हो कर जो व्यवस्था मेरे दास मूसा ने तुझे दी है उन सब के अनुसार करने में चौकसी करना; और उस से न तो दाहिने मुड़ना और न बांए, तब जहां जहां तू जाएगा वहां वहां तेरा काम सफल होगा। यहोशू 1:78 व्यवस्था की यह पुस्तक तेरे चित्त से कभी न उतरने पाए, इसी में दिन रात…
7 हे यहोवा, मेरा शब्द सुन, मैं पुकारता हूं, तू मुझ पर अनुग्रह कर और मुझे उत्तर दे। भजन संहिता 27:78 तू ने कहा है, कि मेरे दर्शन के खोजी हो। इसलिये मेरा मन तुझ से कहता है, कि हे यहोवा, तेरे दर्शन का मैं खोजी रहूंगा। भजन संहिता 27:89 अपना मुख मुझ से न छिपा॥ अपने दास को क्रोध करके न हटा, तू मेरा सहायक बना है। हे मेरे उद्धार करने वाले परमेश्वर मुझे त्याग न दे, और मुझे छोड़ न दे! भजन संहिता 27:910 मेरे माता पिता ने तो मुझे छोड़ दिया है, परन्तु यहोवा मुझे सम्भाल लेगा॥ भजन संहिता 27:1011 हे…
22 प्रभु यहोवा यों कहता है, देख, मैं अपना हाथ जाति जाति के लोगों की ओर उठाऊंगा, और देश देश के लोगों के साम्हने अपना झण्डा खड़ा करूंगा; तब वे तेरे पुत्रों को अपनी गोद में लिए आएंगे, और तेरी पुत्रियों को अपने कन्धे पर चढ़ाकर तेरे पास पहुंचाएंगे। यशायाह 49:2223 राजा तेरे बच्चों के निज-सेवक और उनकी रानियां दूध पिलाने के लिये तेरी धाइयां होंगी। वे अपनी नाक भूमि पर रगड़ कर तुझे दण्डवत करेंगे और तेरे पांवों की धूलि चाटेंगे। तब तू यह जान लेगी कि मैं ही यहोवा हूं; मेरी बाट जोहने वाले कभी लज्जित न होंगे॥ यशायाह 49:23
कभी कभी हम अपने जीवन में कुछ बुरी घटनाओं के कारण परेशान हो जाते हैं और ये परिस्थितियां कुछ निहित स्वार्थ के लिए पूरा लाभ उठाती हैं। इस परिस्थिति में हमारा हृदय टूट जाता है और लाखों चिंताओं से संघर्ष होता है। इन कठिन परिस्थितियों के दौरान हमारे प्रभु यीशु ने हमें पवित्र आत्मा दिया है कि वही हमें तसल्ली दे सके। हमारे प्रभु यीशु मसीह की मृत्यु के बाद उसके चेलों की हालत भी दुखी थी और वे चिंतित और अपने भविष्य के लिए अनिश्चित थे। उनके अंदर एक डर समा गया। उन्होंने खुद को एक कमरे में बंद…
यीशु ने बड़े दावे के साथ कहा, मांगो तो दिया जाएगा| यह वचन हमारे दिमाग़ में, पत्थर पर छेनी हथौड़ी से खोदे गए अक्षरों की तरह छप गया है| हर इंसान ख़ुदा से कुछ ना कुछ मांगता रहता है| हर एक की अपनी ज़रूरत है ; हर एक की एक मांग है| कभी आपने सोचा है, आपकी सबसे बड़ी ज़रूरत क्या है? अगर ख़ुदा, आपसे सुलेमान की तरह पूछ ले, मांग तुझे क्या चाहिए? तो आपने क्या सोच रखा है? शायद ज़्यादातर हम जिस्म के बारे में ही सोचते हैं| *क्या आप आपनी आत्मा की आवश्यकताओं के लिए भी चिंतित…