Author: Rajesh Ranjan Nirala

एक बहुत बड़ा सवाल आज हम सबके सामने खड़ा है ,कि क्या हम अपने परमेश्वर के साथ इमादारी बरतते हुए चलते हैं यह हमें अपने अन्तर्मन से पूछना होगा इसका जवाब सच्चाई से देखें तो तकरीबन न ही होगा ।हम विश्वासी लोग जब भी मुसिबतों का सामना करते हैं , जब भी बीमारियों का सामना करते हैं , जब भी गरीबी का सामना करते हैं , जब भी लडाईयों का सामना करते हैं तब हमें अपना परमेश्वर बहुतायत से याद आता है ।यह बात बिलकुल ही सही है तब तब हम प्रभु के दासो के पास जाकर प्रार्थना करवाते ,…

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*जब सुख और आनंद हों , तब परमेश्वर से कोई शिकायत नहीं रहती| दुखों और समस्याओं के आते ही , परमेश्वर से शिकायत होने लगती|* अधिकतर लोग यह कहते सुने जा सकते हैं , परमेश्वर ने ऐसा क्यों किया? ; या परमेश्वर ने मेरे साथ ऐसा क्यों होने दिया? ; मेरे ही साथ ऐसा क्यों होता है? कुछ और भी शिकायते रहती हैं , जैसे कि , परमेश्वर मुझसे नाराज़ है ; वो मेरी प्रार्थनाओं का उत्तर नहीं देता ; या , उसने मुझे छोड़ दिया है| अहम् सवाल यह है , क्या आपकी सोच सही है? क्या आप परमेश्वर…

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बाइबिल मे परमेश्वर मनुष्य को हमेशा चैतावनी देता आया है,और कहता आया है ऐ मेरे बच्चों सुधर जाओ , निकल जाओ ,बचो ,मत डरो, व्यभिचार से भागो , किसी का बुरा न करो , माँ बाप का आदर करो , पत्नी से सम्भलकर बोलो ,इस तरह के शब्दों के द्बारा परमेश्वर हमे हमेशा आगाह करता आया है पर मनुष्य फिर भी इन शब्दों को सुनकर अनसुना करता है जब उस का परिणाम बुरा आता तो उसकी उँगली परमेश्वर की ओर उठती है तूने हमें बचाया क्यों नहीं उसके बाद शुरू होता है बुराई का सिलसिला,लडाई कि शुरुआत, गरीबी की शुरुआत,…

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हमारा परमेश्वर सब से महान सर्वशक्तिमान है । वो हमारे जीवन को सुरक्षित रखने वाला परमेश्वर है ; माँगने से पहले देनेवाला परमेश्वर है , हमारे पुकारते ही सुननेवाला परमेश्वर है , दुनियां किसी के भी पीछे चले हम तो यहोवा ही के पीछे चलेंगे हमारा परमेश्वर अति महान परमेश्वर है ; वो विलम्ब से क्रोध करनेवाला परमेश्वर है , उसने हमारे लिये अपने एकलौते पुत्र को भी न रख छोडा ; हमारे पापों की क्षमा के कारण उसे भी सूली पर चढवा दिया ; ऐसा भला परमेश्वर है हमारा ।उसके आश्चर्यक्रम अगर हम लि खने लगें तो इस जगत से…

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शान्ति एक ऐसा शब्द है जिसकी चाहत सब करते मगर मिलती उसी को है जो परमेश्वर के पीछे पूरे मन आत्मा जीवन प्राण से हो लेता वही शान्ति पा जाता है ।सच्ची शान्ति यीशु मसीह के पास आकर ही मिलती है यह दुनियां के कम लोग ही गहराई से जान पाए हैं जो जान पाए उन्होंने फिर कुछ और जानने समझने की कोशिशों को छोड दिया संसार भी शान्ति चाहता ढूँढता भी है कोई किसी की खुशी में खुश होकर , कोई किसी के दुख मे शामिल होकर , कोई किसी के सपनों को पूरा करके शान्ति पाता है तो…

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हे यहोवा मैं तुझे सराहूंगा क्योंकि तू ने मुझे खींचकर निकाला है,और मेरे शत्रुओं को मुझ पर आनन्द करने नहीं दिया।हे मेरे परमेश्वर यहोवा, मैंने तेरी दोहाई दी और तू ने मुझे चंगा किया है।हे यहोवा,तू ने मेरा प्राण अधोलोक में से निकाला है,तू ने मुझ को जीवित रखा और कब्र में पड़ने से बचाया है। आओ प्राथर्ना करें :—✝परमेश्वर आपको परिवार सहित सदा स्वस्थ एवं सुखी रखे हर एक इंफेक्शन से महामारी से तथा शैतान की देखी अनदेखी चालों से सदा बचा कर रखे । तथा घर-परिवार में सुख-समृद्धि मेल-मिलाप खुशहाली बनाए रखे तथा आपकी कमाई के समस्त…

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*ईश्वर “टूटी” हुई चीज़ों का इस्तेमाल कितनी ख़ूबसूरती से करता है ..,,* *जैसे ….**बादल टूटने पर पानी की फुहार आती है ……**मिट्टी टूटने पर खेत का रुप लेती है….**फल के टूटने पर बीज अंकुरित हो जाता है …..**और बीज टूटने पर एक नये पौधे की संरचना होती है ….**इसीलिये जब आप ख़ुद को टूटा हुआ महसूस करे तो….* *समझ लिजिये ईश्वर आपका इस्तेमाल किसी बड़ी उपयोगिता के लिये करना चाहता है….।**इसीलिए सदैव प्रसन्न रहें और हँसते रहें*।आमीनप्रभु आपको आशीष देरैव्ह राजेश गिरधर

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*परमेश्वर पिता, और हमारे प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शान्ति मिलती रहे।* *उसी ने अपने आप को हमारे पापों के लिये दे दिया, ताकि हमारे परमेश्वर और पिता की इच्छा के अनुसार हमें इस वर्तमान बुरे संसार से छुड़ाए।**उस की स्तुति और बड़ाई युगानुयुग होती रहे। आमीन॥*इस वचन से परमेश्वर आपको आशीष और बरकत दे।**अमीन।*रैव्ह राजेश गिरधर

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💁🏻‍♂ *→मैं कोन हूँ ?* अपने परमेश्वर की निगाह में :– *1__→मै परमेश्वर की संतान हूँ।*2___→मैं जयवन्त से भी बढ़कर हूँ।*3___→मैं एक सैनिक हूँ।*4__→मैं विजयी हूँ।*5___→मैं पवित्र आत्मा का मन्दिर हूँ।*6___→में एक चुना हुआ वंश और राज पदधारी याजकों का समाज हूँ।*7___→मैं ज्योती की संतान हूँ।*8___→मैं परमेश्वर का बेटा हूँ परमेश्वर मेरा आत्मिक पिता है।9___→मैं एक नई सृष्टी हू।*10___→मै जगत की ज्योति हूँ।11___→मैं पृथ्वी का नमक हूँ।*12___→मैं मसीह का मित्र हूँ।*13___→मैं मसीह की देह का एक सदस्य हूँ।*14___→मैं एक मंदिर परमेश्वर का निवासस्थान हूँ उस का आत्मा और उसका जीवन मुझमे वास करता है।*15___→मैं शैतान का शत्रु हूँ।16___→मैं परमेश्वर द्वारा चुना…

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