गौमाता (गाय) से जुड़े 10 अचूक उपाय (टोटके ) जो आपके जीवन में सफलता प्रदान करेंगे
(1) जन्म कुंडली (शुक्र) के दोषों का नाश
यदि आप अपनी जन्म कुंडली में ग्रहों के बीच प्रभाव से परेशान हैं तो इसके लिए भी ज्योतिषीय उपाय मौजूद हैं। किसी की जन्म कुंडली में यदि शुक्र अपनी नीच राषि कन्या पर हो या शुक्र की दशा चल रही हो तो प्रातःकाल के भोजन में से एक रोटी सफेद रंग की देशी गाय को 43 दिन तक लगातार खिलाने से शुक्र का नीचत्व एवं शुक्र संबंधित कुदोष स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं। इसके अलावा गौ को रोटी देने से जन्मपत्री में यदि पितृदोष हो तो वह भी हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है। (Published on Speaking Tree)
(2) ऐसी मान्यता है की जो गौमाता के खुर से उड़ी हुई धूलि को सिर पर धारण करता है (जिसे गौधूलि कहते है), वह मानों तीर्थ के जल में स्नान कर लेता है और सभी पापों से छुटकारा पा जाता है ।
गोधूलि योग
ज्योतिष शास्त्र में गोधूलि नामक एक योग होता है, यह योग गाय से संबंधित है। इस योग के संदर्भ में ऐसा माना जाता है कि यदि किसी के विवाह के लिए उत्तम मुहूर्त नहीं मिल रहा है या फिर भविष्य में किसी के वैवाहिक जीवन में परेशानियां आने के संकेत हैं और उन्हें दूर करना चाहते हैं तो गोधूलि योग में वर–वधु का विवाह करें। (Published on Speaking Tree)
(3) प्राचीन ग्रंथों में सुरभि (इंद्र के पास), कामधेनु (समुद्र मंथन के 14 रत्नों में एक), पदमा, कपिला आदि गायों महत्व बताया है। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभ देवजी ने असि, मसि व कृषि गौ वंश को साथ लेकर मनुष्य को सिखाए। हमारा पूरा जीवन गाय पर आधारित है। शिव मंदिर में काली गाय के दर्शन मात्र से काल सर्प योग निवारण हो जाता है I
(4) गाय के पीछे के पैरों के खुरों के दर्शन करने मात्र से कभी अकाल मृत्यु नहीं होती है। गाय की प्रदक्षिणा करने से चारों धाम के दर्शन लाभ प्राप्त होता है, क्योंकि गाय के पैरों में चार धाम है।
(5) गौ माता की रीढ़ की हड्डी में सूर्य नाड़ी एवं केतुनाड़ी साथ हुआ करती है, गौमाता जब धुप में निकलती है तो सूर्य का प्रकाश गौमाता की रीढ़ हड्डी पर पड़ने से घर्षण द्धारा केरोटिन नाम का पदार्थ बनता है जिसे स्वर्णक्षार कहते हैं। यह पदार्थ नीचे आकर दूध में मिलकर उसे हल्का पीला बनाता है। इसी कारण गाय का दूध हल्का पीला नजर आता है। इसे पीने से बुद्धि का तीव्र विकास होता है। जब हम किसी अत्यंत अनिवार्य कार्य से बाहर जा रहे हों और सामने गाय माता के इस प्रकार दर्शन हो की वह अपने बछड़े या बछिया को दूध पिला रही हो तो हमें समझ जाना चाहिए की जिस काम के लिए हम निकले हैं वह कार्य अब निश्चित ही पूर्ण होगा। धार्मिक ग्रंथों में लिखा है “गावो विश्वस्य मातर:” अर्थात गाय विश्व की माता है।
(6) गौ माता का जंगल से घर वापस लौटने का संध्या का समय (गोधूलि वेला) अत्यंत शुभ एवं पवित्र है। गाय का मूत्र गो औषधि है। मां शब्द की उत्पत्ति गौ मुख से हुई है। मानव समाज में भी मां शब्द कहना गाय से सीखा है। जब गौ वत्स रंभाता है तो मां शब्द गुंजायमान होता है।
(7) गौ–शाला में बैठकर किए गए यज्ञ हवन ,जप–तप का फल कई गुना मिलता है। बच्चों को नजर लग जाने पर, गौ माता की पूंछ से बच्चों को झाड़े जाने से नजर उत्तर जाती है, इसका उदाहरण ग्रंथों में भी पढ़ने को मिलता है, जब पूतना उद्धार में भगवान कृष्ण को नजर लग जाने पर गाय की पूंछ से नजर उतारी गई।
(8) गौ के गोबर से लीपने पर स्थान पवित्र होता है। गौ मूत्र का पवित्र ग्रंथों में अथर्ववेद, चरकसहिंता, राजतिपटु, बाण भट्ट, अमृत सागर, भाव सागर, सश्रुतु संहिता में सुंदर वर्णन किया गया है। गौमूत्र से बहुत सारे असाध्य रोगों जैसे कैंसर आदि का इलाज़ होता हैI काली गाय का दूध त्रिदोष नाशक सर्वोत्तम है I
(9) नौकरी ढूंढने के लिए या उससे जुड़ा कोई भी कार्य करने जाते हो और रास्ते में आपको गाय दिखाई दे तो उसको आप आटा और गुड़ खिला दीजिये I आपकी मनोकामना आवस्य पूर्ण होगी और आपको निश्चित ही नौकरी मिल जायेगी I
(10) गौमाता को जूठी रोटी नहीं खिलानी चाहिए क्योकि गाय को लक्ष्मी का रूप माना गया है और उसमे सभी तेतीश करोड़ देवी–देवताओ का निवास भी होता है ऐसा हमारे धर्म ग्रंथो में बताया गया है I भला गौमाता अर्थात लक्ष्मी को कोई जूठी रोटी खिलाकर कोई कैसे सुखी रह सकता है ?
(11) गरुड़ पुराण– भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ ने भी गरुड़ पुराण में गायों के महत्व का उल्लेख किया है। उनके अनुसार जीवन के बाद मोक्ष प्राप्ति का सीधा मार्ग गाय की सेवा ही है। आप जितनी निष्ठा से उनकी सेवा करेंगे, उनका आदर–सम्मान करेंगे, उनकी देखभाल करेंगे, उतने ही पुण्य प्राप्त करके मृत्यु के बाद मोक्ष हासिल करेंगे।
पौराणिक तथ्यों के अनुसार गाय के सींग में ब्रह्मा विष्णु महेश का वास होता है। गौ के ललाट में गौरी तथा नासिका के अस्ति भाग मे भगवान कार्तिकेय प्रतिष्ठित हैं। इसके अलावा गौ माता में तीर्थों का निवास भी माना जाता है। कहते हैं कि 68 करोड़ तीर्थ एवं 33 करोड़ देवी–देवताओं का चलता–फिरता विग्रह गाय ही है।
(12) गौ माता में तीर्थों का निवास
तो यदि आप किसी कारणवश तीर्थ जाने में असमर्थ हैं तो गाय की सेवा करें, आपको सभी तीर्थों का पुण्य प्राप्त हो जाएगा। गाय के दूध, घी, दही, गोवर, और गौमूत्र, इन पाँचो को ‘पञ्चगव्य‘ के द्वारा मनुष्यों के सभी रोग एवं पाप दूर होते है I गौ के “गोबर में लक्ष्मी जी” और “गौ मूत्र में गंगा जी” का वास होता है I
(13) ‘गोप अष्टमी’, कहते हैं इस दिन यदि खास उपाय किए जाएं जीवन भर के लिए सुख-समृद्धि के मार्ग खुल जाते हैं।गोप अष्टमी का उल्लेख ‘निर्णयामृत’ एवं ‘कूर्मपुराण’ में किया गया है। कार्तिक शुक्ल अष्टमी को प्रातः काल के समय गौओं को स्नान कराएं, गंध पुष्पादि से पूजन करें तथा अनेक प्रकार के वस्त्रालंकार से अंलकृत करके उनके गोपालां (ग्वालों) का पूजन करें।इसके बाद गायों को गौ ग्रास देकर उनकी परिक्रमा करें और थोड़ी दूर तक उनके साथ जाएं, मान्यता है कि ऐसा करने से सब प्रकार की अभीष्ट सिद्धि होती है। इसी गोपाष्टमी को सायं काल के समय जब गाय चरकर वापस आएं, तो उस समय भी उनका आतिथ्य अभिवादन करें, कुछ भोजन कराएं और उनकी चरणरज को मस्तक पर धारण कर ललाट पर लगाएं तो जीवन में सौभाग्य की वृद्धि होती है।
(14) पौराणिक तथ्यों के अनुसार गाय के सींग में ब्रह्मा विष्णु महेश का वास होता है। हिन्दू धर्म के प्रसिद्ध धार्मिक ग्रंथों में से एक भविष्य पुराण में कहा गया है – शृंगमूले गवां नित्यं ब्रह्मा विष्णुष्च संस्थितौ । श्रंरग्राग्रे सर्व तीर्थानि स्थावराणि चराणि च।। षिवो मघ्ये महादेवः सर्वकारण कारणम। ललाटे संस्थिता गौरी नाषावंषे च शणमुखः।। तात्पर्य है कि गौओं के सींग की जड़ में सदा ब्रह्मा और विष्णु प्रतिष्ठित हैं। सींग के अग्र भाग में चराचर समस्त तीर्थ प्रतिष्ठित हैं, मध्य भाग में ब्रह्मा जी हैं। गौ के ललाट में गौरी तथा नासिका के अस्ति भाग मे भगवान कार्तिकेय प्रतिष्ठित हैं। इसके अलावा गौ माता में तीर्थों का निवास भी माना जाता है। कहते हैं कि 68 करोड़ तीर्थ एवं 33 करोड़ देवी–देवताओं का चलता–फिरता विग्रह गाय ही है।
(15) हिन्दू धर्म के महानतम ग्रंथ महाभारत में गौ पूजा से संबंधित कुछ बातें उल्लेखनीय हैं। इसमें कहा गया है कि जो व्यक्ति, गाय माता (हिन्दू धर्म में गाय को माता की उपाधि दी गई है) की सेवा और सब प्रकार से उनका अनुगमन करता है उस पर संतुष्ट होकर गौएं उसे अत्यन्त दुर्लभ वर प्रदान करती हैं। ऐसी भी मान्यता है कि गाय की सेवा के साथ–साथ उसकी साफ–सफाई का भी ध्यान रखें, उन्हें समय से भोजन कराएं, उनके आसपास के वातावरण को साफ–सुथरा रखें और उन्हें मक्खी–मच्छर से भी बचाएं तो उस व्यक्ति को कपिला गाय के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।
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