कभी तनाव (Tanav) लेने से व्यक्ति में किसी भी कार्य को बेहतर करने की लगन पैदा हो जाती है लेकिन स्थिति तब बिगड़ती है जब यह तनाव हावी होने लगता है। जब कोई भी व्यक्ति तनाव लेता है तो उसे कई प्रकार की समस्याओं से परेशान होना पड़ सकता है जैसे:

• उसका रक्तचाप बढ़ जाता है।
• सांसे सामान्य से तेज चलती हैं।
• पाचन शक्ति प्रभावित होती है।
• रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है।
• मांसपेशियां भी तनाव लेने लगती हैं।

कारण :

जब कोई व्यक्ति खुद पर दबाव महसूस करता है तब व्यक्ति के शरीर से कुछ खास केमिकल निकलते हैं जो शरीर को ज्यादा ऊर्जा और ताकत देते हैं जिससे आप खुद को सहज महसूस कर सकें। जब खुद को असहज या डरा हुआ महसूस करते हैं तब यह केमिकल उल्टा असर दिखाने लगते हैं। तनाव परिस्थिति पर निर्भर करता है, कोई व्यक्ति साधारण बात पर भी तनाव ले लेता है जबकि कोई व्यक्ति बिल्कुल भी तनाव नहीं लेता। कोई बड़ी- बड़ी बात भी नहीं सोचता जबकि कोई कई छोटी-छोटी बातों को एक साथ सोचता रहता है।

सामान्य बाहरी कारण (Common External Reasons)
• जीवन में कोई बड़ा नकारात्मक बदलाव
• स्कूल या कॉलेज में किसी भी तरह का कोई दबाव
• रिश्तों में दरार
• आर्थिक तंगी
• काम का ज्यादा बोझ
• बच्चे और परिवार की स्थिति ठीक न होना

सामान्य कारण (Common Reasons of Stress)
• बहुत दूर का सोचते रहना
• खुद से नकारात्मक बातें करते रहना
• खुद में कमी ढूंढते रहना
• खुद में आत्मविश्वास की कमी होना

लक्षण :

• कोई मुझे पसंद नहीं करता, ऐसी भावनाएं होना
• नाखुन काटते रहना या एक ही जगह टकटकी लगा कर देखते रहना
• नींद न आना
• या तो बहुत भूख लगना या बिल्कुल भूख न लगना
• लगातार सर्दी से परेशान रहना
• हमेशा दुखी महसूस करना या बहुत खुशी की बातों पर भी खुश न होना
• ज्यादा गुस्सा और निराश होना
• लोगों के साथ खुद को असहज महसूस करना
• लगातार सिर दर्द और पीठ दर्द
• दूसरों को नजरअंदाज करना
• किसी एक चीज पर ध्यान न लग पाना
• मन में हमेशा नकारात्मक विचार आना
• पेट खराब होना या पेट में अल्सर होना
• मन में आत्महत्या जैसे ख्याल आना
• बहुत ज्यादा सोना या बिल्कुल न सोना

आयुर्वेदिक उपचार :

• ग्रीन टी (Green tea)
ग्रीन टी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट (Anti Oxidents) शरीर तथा दिमाग को शांत करते हैं तथा मूड में सकारात्मक बदलाव लाते हैं। ग्रीन टी में मौजूद थियानीन (Theanine) सतर्कता और ध्यान बढ़ाता है। यदि किसी को ग्रीन टी पसंद न हो तो ब्लैक टी भी पी जा सकती है।

• संतरा (Orange)
संतरा में विटामिन सी उच्च मात्रा में पाया जाता है जो कि इम्यूनिटी (immunity) को बढ़ाने में सहायक है। संतरे में विटामिन ए और बी के साथ अन्य स्वास्थ्य वर्धक मिनरल भी पाये जाते हैं। तनाव से राहत के लिए रोजाना संतरे का एक गिलास ताजा जूस पीएं।

• दूध (Milk)
एक गिलास दूध शरीर को भरपूर एंटीऑक्सीडेंट और जरूरी पोषक तत्व देता है। यह सभी पोषक तत्व व्यक्ति को तनाव से लड़ने की शक्ति देते हैं और चित्त को शांत रखते हैं। रोजाना सुबह नाश्ते में तथा रात को सोने से पहले एक गिलास गरम दूध पीना तनाव से राहत देता है।

• बादाम (Almond)
बादाम में विटामिन बी, ई, मैग्नीशियम, जिंक, सेलेनियम (selenium) तथा अन्य स्वास्थ्य वर्धक वसा पाई जाती है। जिस कारण यह तनाव से राहत देते हैं। बादाम को भून कर या कच्चा भी खाया जा सकता है। यदि ऐसे खाना संभव न हो तो बादाम का पाउडर बनाकर, दूध के साथ खाया जा सकता है।

• पालक (Spinach)
पालक में भरपूर मात्रा में विटामिन ए, बी और सी से भरपूर होती हैं। इनमें मिनरल (minerals) भी प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं जो तनाव से लड़ने की शक्ति देते हैं। एक कप पालक रोजाना खाने से शरीर और दिमाग दोनों को राहत मिलती है। पालक का सूप बनाकर, सब्जी, सलाद या ऑमलेट आदि में डालकर खाया जा सकता है।

• डार्क चॉकलेट (Dark chocolate)
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक डार्क चॉकलेट खाना तनाव से बचने का बेहद आसान और स्वादिष्ट तरीका है। डार्क चॉकलेट खाने से शरीर में फील गुड हार्मोन (feel good hormone) का स्त्राव होता है जिसके कारण व्यक्ति खुशी महसूस करता है और तनाव से राहत मिलती है।

• जामुन (Blue berries)
जामुन में उच्च मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जिससे तनाव घटता है। जामुन को रोजाना खाने से तनाव, इन्सोमनिया (insomnia) और अन्य तरह के मूड डिस्ऑर्डर (mood disorder) से राहत मिलती है। जामुन को सलाद आदि में मिलाकर खाया जा सकता है। तनाव से राहत के लिए जामुन का जूस भी पीया जा सकता है।

बचाव :

• किसी भी प्रकार का नशा न करें।
• भरपूर नींद और आराम जरूर करें।
• खुद के ऊपर दबाव महसूस न करें।
• मन को व्यवस्थित तथा मजबूत करने के लिए पुस्तकें ज्यादा पढ़ें।
• दूसरों को भी सुनना सीखें।
• गुस्से पर काबू रखें।
• कुछ समय निकालकर अपनी पसंद की चीजें भी करें।
• अपने अंदर के बच्चे को मरने न दें। कभी कभी बच्चों की तरह खेलना भी जरूरी है।

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