मनुष्यों के घाव (Wound) में संक्रमण होने से टिटनस होता है जिसका कारण क्लोस्ट्रीडियम टिटानी बैक्टीरिया (Clostridium Tetani Bacteria) है। यही जीवाणु घाव या चोट में विष पैदा करता है जिससे टिटनस हो जाता है। धीरे-धीरे यही जहर पूरे शरीर में फैलने लगता है जिससे स्थिति घातक हो जाती है। टिटनस के कारण कई बार व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है। टिटनस में शरीर की मांसपेशियों में ऐंठन महसूस होती है और रूक रूक कर दर्द होता है। हालांकि किसी चोट के लगने के बाद यदि तुरंत टिटनस का टीका लगवाया जाए तो इससे होने वाली परेशानियों से बचा जा सकता है।
• स्थानीय टिटनस (Local Tetanus)
यह सबसे साधारण टिटनस होती है, जिसमें घाव या उके आस-पास मांसपेशियों में ऐंठन के साथ दर्द महसूस होता है।
• मस्तक टिटनस (Head Tetanus)
यह मुख्य रूप से सिर पर चोट या कान में संक्रमण के बाद (एक से दो दिनों में) तेजी से फैलती है। यह एक साथ कई मांसपेशियों को प्रभावित करती है। इसमें चेहरे की मांसपेशी भी प्रभावित होती है जिससे जबड़ा बंध जाता है। यह टिटनस जल्द ही साधारण टिटनस में तब्दील हो सकती है।
• नवजात टिटनस (Infant Tetanus)
इस तरह की टिटनस उन बच्चों में ज्यादा होती है जिन्हें गर्भ में मां से इम्यूनिटी नहीं मिल पाती या गर्भवती होने के दौरान टीकाकरण न हुआ हो। ऐसे में कुछ नवजातों का नाभि का घाव सूखने में समय लग जाता है। कई बार उसमें संक्रमण भी हो जाता है। लगभग 14 फीसदी शिशु टिटनस से मर जाते हैं।
• आम टिटनस (General Tetanus)
यह सबसे ज्यादा होने वाली टिटनस है। इसका असर सिर से शुरू होता है और शरीर के बाकी हिस्सों में फैल जाता है। इसके तहत व्यक्ति का जबड़ा बंद हो जाता है, चेहरे की मांसपेशियों में जकड़न महसूस होती है। गर्दन में ऐंठन, छाती और टांगों में जकड़न होती है। इस दौरान पसीना आना, हृदयगति बढ़ जाना और उच्च रक्तचाप भी हो सकता है।
कारण :
क्लोस्ट्रीडियम टिटानी (Clostridium Tetani) छड़ के आकर का जीवाणु है जो दुनिया भर में मिट्टी में पाया जाता है। क्लोस्ट्रीडियम टिटानी टिटनस रोग के लिए जिम्मेदार जीवाणु है। यह बैक्टीरिया दो रूपों में पाया जाता है, पहला डोरमंट या निष्क्रिय रूप में दूसरा सक्रिय रूप में जो जीवाणुओं की संख्या को और भी बढ़ा देता है। किसी भी तरह की चोट में टिटनस हो सकती है।
• घाव से
• सर्जरी में
• प्रसव के दौरान
• कोई फोड़ा होने पर
• सुई या इंजेक्शन से नशा करने वालों को
• किसी पुराने जंग लगे लोहे से चोट लगने से
लक्षण :
• उच्च रक्तचाप
• गर्दन में ऐंठन होना
• चिड़चिड़ापन
• चेहरे की मांसपेशियों का जकड़ जाना
• जबड़े का बंद हो जाना
• निगलने में दिक्कत होना
• पसीना खूब आना
• मांसपेशियों में ऐंठन और अकड़न महसूस होना
• सांस लेने में तकलीफ होना
• हृदय गति का तेज होना
बचाव :
• कोई भी ऐसा घाव जिससे त्वचा फट गई हो, उसे तुरंत पानी और साबुन से साफ किया जाना चाहिए।
• घाव को कभी खुला न छोड़ें। खुले घाव के संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है।
• यदि घाव से खून बह रहा हो तो तो उस पर सूती और सूखा कपड़ा बांधें।
• रक्त को रोकने के लिए घाव के ऊपर दबाव डालें, जिससे रक्त बहना रूक जाए।
• घायल व्यक्ति को तुरंत टिटनस का टीका लगवाना चाहिए।
टिटनस के अन्य उपचार (Treatment of Tetanus)
• घाव को गरम पानी से धोएं और कोई एंटीसेप्टिक क्रीम या पाउडर लगाएं।
• तारपीन के तेल से शरीर की मालिश करें, इसमें पैर, जबड़े और गर्दन पर हल्के हाथ से दबाव डालते हुए मालिश करें।
• घाव के ऊपर तेल को गरम करके उसमें हल्दी मिलाकर लगाएं
• मोमबत्ती के मोम को पिघलाकर भी घाव पर लगाया जा सकता है
• कटे स्थान पर नीम का तेल लगाने से भी टिटनस का डर नहीं रहता
न्यूज़ इंडिया वेब पोर्टल, डिजिटल मीडिया हिंदी न्यूज़ चैनल है जो देश प्रदेश की प्रशाशनिक, राजनितिक इत्यादि खबरे जनता तक पहुंचाता है, जो सभी के विश्वास के कारण अपनी गति से आगे बढ़ रहा है |
