इबोला वायरस के बाद दुनियाभर में आतंक फैलानी वाली नई बीमारी है जीका। जीका वायरस लोगों के लिए इतना खतरनाक है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जीका वायरस पर ग्लोबल इमरजेंसी घोषित की है। जीका वायरस ब्राजील समेत कई अन्य अमेरिकी देशों में फैला हुआ है और इन्हीं देशों के आने वाले लोगों के द्वारा इसके विश्व के अन्य देशों में फैलने के आसार हैं। आइये जानें जीका वायरस और इसके संक्रमण के विषय में पूर्ण जानकारी (Zika Virus Information in Hindi)।

•क्या है जीका वायरस? (What is Zika Virus)
जीका वायरस एडीज मच्छर से फैलता है। जीका वायरस का पहला मामला वर्ष 1947 में युगांडा में पाया गया था। इसके बाद दशकों तक इसके बेहद कम मामले सामने आए जिस कारण वैज्ञानिकों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। लेकिन 2013 के बाद और विशेषकर 2015 में इसके कई मामले सामने आए और ब्राजील की एक बड़ी आबादी इसकी चपेट में आने लगी। •जीका वायरस से खतरा (Effects of Zika Virus)
जीका वायरस जानलेवा नहीं होता लेकिन इसके कारण गर्भवती महिलाओं को बहुत खतरा होता है। इस वायरस की वजह से गर्भ में पल रहे बच्चे का मस्तिषक पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता है और यह एक स्थाई समस्या बन जाती है। जीका वायरस के कारण बच्चों में अविकसित मस्तिषक के दोष को माइक्रोसिफेली (Microcephaly) कहा जाता है। •जीका वायरस संक्रमण के लक्षण (Symptoms of Zika Virus in Hindi)
जीका वायरस से प्रभावित शख्स को काफी तेज बुखार आता है, जोड़ों में दर्द होता है और शरीर पर रेशेज (लाल धब्बे) हो जाते हैं। •जीका वायरस की जांच (Diagnosis of Zika Virus)
जिस प्रकार डेंगू और चिकनगुनिया की जांच की होती है उसी प्रकार जीका वायरस की जांच भी होती है। ब्लड टेस्ट के द्वारा इसके बारे में पता लगाया जा सकता है। अगर कोई व्यक्ति प्रभावित देश या जगह से आया हो और उसे बुखार या अन्य कोई लक्षण दिखें तो तुरंत इसकी जांच करानी चाहिए। • भारत में जीका वायरस का खतरा (Zika Virus effect in India)
भारत में फिलहाल इस बीमारी के कोई केस नहीं पाए गए हैं लेकिन अगर कोई शख्स जीका वायरस से प्रभावित जगह से लौटकर आता है तो उसे खास ध्यान रखना चाहिए। ऐसे शख्स को अगर बुखार है तो तत्काल स्वास्थ्य विभाग को बताना चाहिए और टेस्ट कराना चाहिए। अभी तक जीका वायरस से निपटने के लिए किसी दवाई या वैक्सीन का निर्माण नहीं हुआ है, ऐसे में मच्छरों से बचना ही एकमात्र उपाय है।

लक्षण :

• आँखें लाल होना
• जोड़ों में दर्द
• बुखार
• उल्टी
• कमज़ोरी

बचाव :

• जीका वायरस का इलाज (Treatment of Zika Virus in Hindi):

  • सीडीसी के अनुसार जीका इंफेक्शन से लड़ने के लिए अभी किसी इंजेक्शन या दवाई को इजाद नहीं किया गया है। इससे पीड़ित व्यक्ति को पूरी तरह से आराम करना चाहिए, खूब सारा पानी पीना चाहिए, बुखार की सामान्य दवाई लेनी चाहिए।
  • जीका वायरस से संक्रमित होने पर खुद को मच्छर के काटने से बचाना चाहिए अन्यथा यह वायरस मच्छरों द्वारा अन्य लोगों में पहुंच सकता है। पीड़ित रोगी का मच्छरों से बचाव बहुत जरूरी है। नोट: बुखार आने पर एस्प्रिन (Aspirin), ब्रूफेन जैसी दवाइयां बिलकुल नहीं लेनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं के लिए खास निर्देश (Tips For Pregnant Women)
    सीडीसी के द्वारा अन्य देशों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं को यह सुझाव दिया गया है कि वह अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका या जीका प्रभावित अन्य देशों में ना जाएं। जीका वायरस से प्रभावित जगहों पर रहने वाली गर्भवती महिलाओं को निम्न बातों का ख्याल रखना चाहिए:
    •खुद को मच्छरों के काटने से बचाना चाहिए।
    •रात को सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करना चाहिए और मच्छरों के काटने से बचने वाली क्रीम लगानी चाहिए।
    •अगर मच्छरों के काटने पर सिरदर्द, हल्का बुखार, लाल आंखें, जोड़ों में दर्द जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
    •अगर गर्भवती नहीं हैं तो कुछ दिनों के लिए प्रेगनेंसी के प्लान को टाल देना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को मच्छरों से बचने की पूरी कोशिश करनी चाहिए क्योंकि जीका वायरस के कारण उनके गर्भ में पल रहे बच्चों के मस्तिष्क को सबसे अधिक नुकसान होता है।
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