अकाल मृत्यु कैसे और क्यों होती है? इसके पश्चात आत्मा एक स्थान पर क्यों बंध जाती है, उसे कब और कैसे मुक्त मिलती है?
यह शरीर पंच भूतों से बना है और इसमें जीव रहता है ना की आत्मा जब तक जीव है तब तक जीवन है जब तक शरीर में जीव है तब तक सजीव है जीव के बिना सभी निर्जीव है।
यदि कोई ऐसी परिस्थिति आ जाती है जिससे यह शरीर नष्ट होने अथवा जीव के रहने के योग्य नहीं रह जाता तो यह शरीर से बाहर निकल जाता है। जैसे कोई मकान गिरने लगता है जर्जर हो जाता है तो उसमें रहने वाले लोग बाहर निकल जाते हैं उसी प्रकार यह प्रक्रिया जीव के साथ भी होती है।
सभी जीवो की आयु निर्धारित होती हैं यदि कोई ऐसी परिस्थिति आ जाती है जैसे दुर्घटना, गोली लगना ,आत्महत्या या हत्या ऐसी परिस्थितियों में शरीर नष्ट हो जाता है और जीव शरीर का त्याग कर देता है l चूंकि आयु पहले से निर्धारित है और शरीर नष्ट हो गया है ऐसी स्थिति में जीव बिना शरीर के अपनी शेष आयु को पूरा करता है l
मरने वाले की आसक्ति अपने मृत्यु स्थल अथवा अपने परिवार मे रहती है जिससे वह एक स्थान पर बंध जाती है। यदि किसी व्यक्ति की आयु 70 वर्ष निर्धारित थी यदि 32 वर्ष में मृत्यु को प्राप्त हो जाता है तो शेष आयु उसे उसी सूक्ष्म शरीर के साथ व्यतीत करनी होती है | अपनी आयु पूरी करने के बाद यमदूत उसे ले जाएंगे। उसके कर्म के अनुसार उसे अन्य योनि प्राप्त होगी उसे इस प्रेतत्व से मुक्ति प्राप्त हो जाएगी l
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