गरुड़ पुराण के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की अकाल मृत्यु हो जाती है तो उसके परिजनों को उस व्यक्ति का तर्पण नदी या तालाब में करना चाहिए। और उसकी आत्मा की इच्छा पूर्ति के लिए पिंडदान और दान पुण्य जैसे अच्छे कर्म करने चाहिए। यह कर्म कम-से-कम तीन से चार वर्षों तक करना चाहिए। ऐसा करने से भटकती आत्मा को मुक्ति मिल पाती है।

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