विष्णु जी गरुड़ पुराण के माध्यम से , यह भी कहते हैं कि मनुष्य के जीवन के सात चक्र निश्चित है।  जो मनुष्य इस चक्र को पूरा नहीं कर पाते ,ऐसे में अकाल मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं  

अचानक ही मृत्यु होने की वजह से मनुष्य की मोह माया ,इच्छा और तृष्णा बनी रहती है। जो कभी पूरी नहीं हो पाती।  ऐसे में शरीर तो नष्ट हो जाता है , लेकिन अकाल मृत्यु प्राप्त होने वाली आत्माएं अपने परिजनों और जीवित लोगों को कष्ट पहुंचती रहती है और अपनी तृष्णा पूरी करने की कोशिश करती है।

गरुड़ पुराण के अनुसार प्राकृतिक मौत से मरने वाले मनुष्य को 41 दिन में दूसरा शरीर प्राप्त हो जाता है। इसके विपरीत अकाल मृत्यु, व्यक्ति, भूत प्रेत पिशाच, कुष्मांडा, ब्रह्मराक्षस, बेताल और छत्रपाल योनि में भटकता रहता है। उनकी आत्मा को जल्दी से शांति नहीं मिलती। आपको बता दें कि अकाल मृत्यु में आत्महत्या को सबसे निकृष्ट माना जाता है।

आत्महत्या को ग्रंथों के अनुसार घिनौना कृत्य बताया गया है। भगवान श्री विष्णु जी ने गरुड़ पुराण में इसे ईश्वर का निरादर ओर अपमान कहा है। 

श्री हरी कहते हैं कि , आत्महत्या करने वाले मनुष्य की आत्मा पृथ्वी लोक पर तब तक भटकती रहती है , जब तक कि वह प्रकृति द्वारा निर्धारित अपने जीवन चक्र को पूरा नहीं कर लेती , ये एक किस्म की सजा है।

इस प्रकार की आत्मा को , ना तो नरक लोक में जगह मिलती है , और ना ही स्वर्ग लोक में। इस प्रकार की आत्मा को मरने के बाद भी सबसे कष्टदायक स्थिति से गुजरना पड़ता है। यह आत्माएं अंधकार में तब तक भटकती रहती हैं , जब तक कि उनका प्रकृति द्वारा निर्धारित जीवन चक्र पूरा नहीं हो जाता।

आत्महत्या करने वाली आत्माओं! के कष्ट को तो दूर नहीं किया जा सकता , लेकिन गरुड़ पुराण में अकाल मृत्यु को प्राप्त व्यक्ति की आत्मा की शांति हेतु  कई उपाय बताए गए हैं।

Share.

न्यूज़ इंडिया वेब पोर्टल, डिजिटल मीडिया हिंदी न्यूज़ चैनल है जो देश प्रदेश की प्रशाशनिक, राजनितिक इत्यादि खबरे जनता तक पहुंचाता है, जो सभी के विश्वास के कारण अपनी गति से आगे बढ़ रहा है |

Leave A Reply