पवित्र आत्मा में बपतिस्मा और उसके दान- वरदान का मूल्य करे
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द्वारा लिखित : जैक पूननश्रेणियाँ : कलीसिया परमेश्वर को जानना आत्मा भरा जीवन

हमारे समय में, जिस तरह से पवित्र आत्मा में बपतिस्मा पाने (डुबोए जाने) को एक तुच्छ रूप दिया जा रहा है, उसके प्रति हमें गंभीर रूप से विचार करने की ज़रूरत है। आज मसीही जगत में हम दो अतिवादी दशाएँ पाते हैं: एक वे जो पूरी तरह से पवित्र आत्मा के बपतिस्मे का इनकार करते हैं, और दूसरे वे जो उसकी तुच्छ, भावुकता भरी नकल को महिमान्वित करते हैं (जिससे न तो वे सेवकाई के लिए सामर्थ्य और न जीवन में पवित्रता प्राप्त कर पाए है)। हमें इन दोनों दशाओं से दूर रहने की और पवित्र आत्मा का सामर्थ्य पाने के लिए परमेश्वर की खोज करने की ज़रूरत है कि हम एक ऐसा जीवन बिता सकें और एक ऐसी सेवा कर सकें जैसी हमें करनी चाहिए।
हम जिस ऊँचाई तक स्वयं पहुँचे हैं, हम कलीसिया को उससे ज़्यादा ऊँचा नहीं ले जा सकते। अगर स्वयं हमारा अनुभव ही नकली है, तो हम दूसरों की अगुवाई भी नकली अनुभवों में ही करेंगे। हमें असल में पवित्र आत्मा में डुबोए जाने की ज़रूरत है। लेकिन वह काफी नहीं होता है। अगर हमें प्रभु के लिए उपयोगी होना है, तो हमें लगातार पवित्र आत्मा की भरपूरी में रहने की ज़रूरत है। हमें हर समय “आत्मा से परिपूर्ण होते रहने” की ज़रूरत होती है (इफिसियों 5:18)।
अगर हमारी कलीसिया में हमें एक प्रभावशाली सेवकाई करनी है, तब हमारी कलीसिया के भाइयों व बहनों की आत्मिक उन्नति के प्रति हममें एक असली दिलचस्पी होनी चाहिए। यह बात हमारा मार्ग-दर्शन करते हुए हमें नबूवत का दान पाने की तरफ ले जाएगी कि हम अपने साथी – विश्वासियों के साथ एक प्रभावशाली रूप में सहभागिता कर सकें। पवित्र आत्मा के इस दान के बिना वचन की सेवकाई में परमेश्वर की सेवा करना असम्भव है। इसलिए हमें पूरे हृदय से इस दान की खोज में रहना चाहिए। यीशु का वह दृष्टान्त जिसमें एक मनुष्य आधी रात को अपने पड़ोसी के घर इसलिए गया कि उसके घर आए एक मित्र के लिए कुछ खाने को मिल सके, हमें यह सिखाता है हमारी कलीसिया में जो लोग ज़रूरतमंद हैं, हमें उनकी देखभाल करने की चिंता होनी चाहिए। यह बात हमें परमेश्वर के द्वार को तब तक खटखटाते रहने वाला बना देगी “जब तक कि वह हमें पवित्र आत्मा की उतनी सामर्थ्य नहीं दे देता जितनी हमारी ज़रूरत है” (लूका 11:8 को 11:13 के साथ पढ़ें)।
नई वाचा में, नबूवत का अर्थ पवित्र आत्मा के अभिषेक से भरकर परमेश्वर का वचन इस तरह बोलना है जिससे कलीसिया की आत्मिक उन्नति हो, और उसे उपदेश और सान्त्वना मिले (1 कुरिन्थियों 14:4, 24, 25 )। 1 कुरिन्थियों 14 में, पौलुस स्थानीय कलीसिया की सभाओं में नबूवत के महत्व पर ज़ोर देता है। अगर कलीसिया का ऐसी अभिषिक्त नबूवत के बिना उन्नत होना सम्भव है, तब हमें यही कहना पड़ेगा कि परमेश्वर ने कलीसिया को यह दान व्यर्थ ही दिया है। तब “नबूवत करने की धुन” में रहने का उपदेश एक अनावश्यक उपदेश होता (1 कुरिन्थियों 14:1, 39)। लेकिन यह एक हकीकत है कि कलीसिया की उन्नति के लिए यह एक अनिवार्य वरदान है। एक कलीसिया जिसमें पवित्र आत्मा के अभिषेक में नबूवत करने वाला एक भाई भी न हो, उस कलीसिया की जल्दी ही आत्मिक मृत्यु हो जाएगी।
पवित्र आत्मा के अभिषेक को अनदेखा करना मानो यह कहना होगा कि पिंन्तेकुस्त के दिन उसका आना व्यर्थ था, और यह कि हम उसके द्वारा योग्यता प्रदान किए जाने के बिना ही प्रभु का काम करने योग्य हैं! यह कहना ऐसा कहने जैसी ही गंभीर भूल होगी कि प्रभु यीशु का पृथ्वी पर आना व्यर्थ था, और यह कि हम उसके बिना ही स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकते हैं! त्रिएकता के तीसरे व्यक्ति को अनदेखा करना पवित्र आत्मा को तुच्छ समझने के बराबर है, और यह ऐसा ही गंभीर पाप है जैसा त्रिएकता के दूसरे व्यक्ति के आने को अनदेखा करना है।
हम पवित्र आत्मा के अभिषेक का सिर्फ इस वजह से अवमूल्यन न करें क्योंकि कुछ विश्वासियों द्वारा इसकी निंदा की गई है। अगर आपके पास पवित्र आत्मा की सामर्थ्य नहीं है, तो आप प्रभु का काम करने के लिए अपने स्वयं की मानवीय योग्यता और अनुभव पर निर्भर हो जाएँगे। और इससे परमेश्वर के उद्देश्य कभी हासिल नही किए जा सकेंगे।
हमें एक ओर तो लोगों को फरीसीवाद और विधिवाद से मुक्त करने की ज़रूरत है, और दूसरी ओर पाप से समझौता कर लेने और साँसारिकता से मुक्त करने की ज़रूरत है। ऐसी सेवकाई के लिए कौन पर्याप्त है? सिर्फ वही जिसे पवित्र आत्मा ने इस योग्य बनाया हो। इस वजह से ही हमें पवित्र आत्मा की बुद्धि और सामर्थ्य पाने के लिए लगातार परमेश्वर की खोज करते रहने की ज़रूरत होती है (इफिसियों 1:17; 3:16 )। इन्हें पाने के लिए, हमें प्रार्थना करने की भी ज़रूरत है।
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