क्या ही आनंद का वह वर्ष होगा

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द्वारा लिखित :   जैक पूननश्रेणियाँ :   चेले

पुरानी वाचा में, परमेश्वर ने इस्राएलियों को अनेक प्रकार के विश्राम दिन मनाने की आज्ञा दी थी। साप्ताहिक विश्राम दिन के बारे में तो सभी लोग जानते हैं। लेकिन कुछ विश्राम दिन ज़्यादा जाने-माने नहीं थे। एक सब्त का विश्राम वर्ष था जो हर 6 साल के बाद आता था (लैव्य. 25:2-4)। दूसरा पचासवाँ वर्ष सब्त था जो प्रत्येक सात सब्त वर्ष के अंत में (प्रत्येक 49 वर्ष के बाद) आता था। इस पचासवें विश्राम वर्ष को ‘जुबली वर्ष’ कहा जाता था (लैव्य. 25:8-12)।

जुबली वर्ष में इस्राएलियों को “पूरे देश के सभी गुलाम कर्ज़दारों की मुक्ति की घोषणा” करनी होती थी, और वह ” सभी के कर्ज़ माफ कर देने का समय” होता था (लैव्य. 25:10 – लिविंग) ।

प्रभु ने हरेक सात वर्ष के बाद भी सभी कर्ज़ माफ करने की आज्ञा दी थी, जिसमें हरेक देनदार के पास जिस किसी के भी नाम का वचनपत्र रहता था, उस पर “पूरा दाम चुका दिया गया है,” लिख देना ज़रूरी होता था… क्योंकि प्रभु हरेक देनदार को उसके कर्ज़ में से मुक्त कर देता था (लैव्य. 15:1-10 को ध्यानपूर्वक पढ़ें)

विश्राम के वर्ष बड़ी आशिष और आनन्द के समय होते थे। “जुबली” शब्द का अर्थ है “आनन्द की पुकार ।” जुबली का वर्ष एक बड़े आनन्द की पुकार के वर्ष के रूप में मनाया जाना था, क्योंकि हरेक कर्ज़ माफ कर दिया जाता था, और हरेक कर्ज़दार को मुक्त कर दिया जाता था। इसलिए इस वर्ष के बारे में प्रभु ने इस्राएलियों से कहा, “तुम्हारे लिए वह कितने हर्ष का वर्ष होगा!” (लैव्य. 25:11 – लिविंग)

अब, नई वाचा में, हमारे लिए सप्ताह का हरेक दिन विश्राम का दिन है, क्योंकि प्रभु के लिए हरेक दिन पवित्र है।

और हम हरेक वर्ष को विश्राम वर्ष के रूप में मनाते हैं क्योंकि हमारे लिए हरेक वर्ष जुबली वर्ष है – ऐसा वर्ष जिसमें हम ऐसे हरेक व्यक्ति को क्षमा करते हुए मुक्त कर देते हैं जिसने हमारा नुकसान किया हो या हमारे साथ बेईमानी की हो। इस तरह, हमारे जीवन का हरेक वर्ष प्रसन्नता से भरा हो सकता है- क्योंकि हमारे लिए हरेक वर्ष हर्ष का वर्ष है।

हमारी बुलाहट दूसरों पर दया करने की है, वैसे ही जैसे परमेश्वर ने पर दया की है। सभी मनुष्यों के साथ हमारे सभी व्यवहारों में, यह वाक्यांश “जैसा परमेश्वर ने हमारे साथ किया है”- हमारे जीवन का आदर्श वाक्य होना चाहिए।

हमने प्रभु से मुफ्त में बहुत पाया है। तो हम दूसरों को भी मुफ्त में देने वाले हों (मत्ती 10:8) – कंजूस होकर नहीं, बल्कि उदारता के साथ एक बड़े दिल वाले होकर।

प्रभु ने जो क्षमा हमें प्रदान की है, उसका अनोखापन हमारे मनोभाव में से कभी नहीं मिटना चाहिए। हमारा पूरा जीवन अब परमेश्वर के प्रति कृतज्ञता की अभिव्यक्ति के रूप में जीना चाहिए, जो उसने कलवरी के क्रूस पर हमारे लिए किया।

सुसमाचार की खुश – ख़बरी यह है कि हम इस तरह के अप्रिय अस्तित्व से मुक्त हो सकते हैं। अब हमारे भीतर से लगातार जीवन के जल की नदियाँ बह सकती हैं, और हमारी जिस परिवार से भी मुलाकात हो, हम उसके लिए एक आशिष बन सकते हैं।

हम दूसरों पर वैसे ही दयावंत हो सकते हैं जैसे परमेश्वर ने हम पर दया की है।
हम दूसरों को वैसे ही मुक्त कर सकते हैं जैसे परमेश्वर ने हमें मुक्त किया है।
हम दूसरों को वैसे ही आशिष दे सकते हैं, जैसे परमेश्वर ने हमें आशिष दी है।
हम दूसरों को वैसे ही सेंतमेंत दे सकते हैं, जैसे सेंतमेंत हमें मिला है।
हम दूसरों के प्रति वैसा ही विशाल हृदय रख सकते हैं, जैसा परमेश्वर ने हमारे प्रति रखा है।

यह साल – और हर साल – हम सभी के लिए एक खुशी का साल हो सकता है, अगर हम उन सभी को रिहा कर दें, जिनके पास हमारा कुछ भी बकाया है, या जिसने हमें किसी भी तरह से चोट या नुकसान पहुंचाया है। उन मनमुटावों को स्थायी रूप से मिटा दो और सभी मनुष्यों के प्रति दयालु बनो और इस प्रकार आज प्रभु के साथ एक नई शुरुआत करो।

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