परमेश्वर की आवाज़ और शैतान की आवाज़ के बीच अंतर करना

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द्वारा लिखित :   जैक पूननश्रेणियाँ :   परमेश्वर को जानना चेले मसीह के प्रति समर्पण

पतरस ने एक भले मन- मिज़ाज में होकर यीशु को क्रूस पर चढ़ने से रोकना चाहा था। लेकिन यीशु ने तुरन्त उस सुझाव में शैतान की आवाज़ को पहचान लिया था और उसने पतरस से कह दिया था, “ऐ शैतान मुझसे दूर हट; तू परमेश्वर की नहीं मनुष्यों की बातों पर मन लगाता है” (मत्ती 16:23)।

वहाँ हम यह देखते हैं कि हम अपने हृदयों में परमेश्वर की आवाज़ और शैतान की आवाज़ के बीच सिर्फ तभी फर्क कर सकेंगे जब हमारे मन परमेश्वर की बातों में लगे हुए होंगे। अगर हमारे मन और प्राथमिक रुचि मुख्य तौर पर हमारी अपनी बातों पर लगे होंगे, तो हम शैतान की आवाज़ को परमेश्वर की आवाज़ समझने की गलती कर सकते हैं। इसलिए यह अच्छा होगा कि हम अपने सारे कामों में अपनी – पढ़ाई, काम धंधे और खेल-कूद में भी एक स्वर्गीय नज़रिया बनाए रखें। सब कुछ परमेश्वर की महिमा के लिए करें।

कॉलेज में अच्छी पढ़ाई करें, मैदान में अच्छा खेलें, और हमेशा परमेश्वर की महिमा करें ऐरिक लिडैल की तरह, जिसने अपनी आत्मिक आस्थाओं के साथ कोई समझौता नहीं किया था हालांकि इसमें उसे अपना ओलम्पिक का स्वर्ण पदक भी खोना पड़ा था। एक मसीही के रूप में आपके कुछ अलग मापदण्ड हैं, दूसरों के सामने यह बताने में कभी लज्जा महसूस न करें। ऐसा करने में प्रभु आपकी मदद करे।

स्कूल या कॉलेज में, काम पर, या घर पर आप जिन लड़ाइयों का सामना करते हैं, उनके बीच परमेश्वर का सम्मान करने की सच्ची इच्छा पैदा करें। प्रभु आपको शत्रु के हर हमले का सामना करने और उस पर विजय पाने के लिए अनुग्रह और शक्ति देगा जिसके द्वारा शैतान आपसे समझौता करवाने की कोशिश करेगा। शैतान के विरुद्ध प्रभु सदैव आपकी ओर है और वह आपको उस दुष्ट पर जय पाने में सक्षम करेगा।

परमेश्वर ने इस पृथ्वी पर बहुत सी बातों को लुभावनी और आकर्षक होने की अनुमति दी है, कि जब हम उनके द्वारा प्रलोभित किए जाएं, तब हम यह साबित कर सकें कि हम पृथ्वी पर सबसे बढ़कर परमेश्वर से प्रेम करते हैं। इस तरह हम शैतान को लज्जित करते हैं। सृष्टिकर्ता स्वयं उसकी सारी सृष्टि से कहीं ज़्यादा महान् कहीं ज़्यादा अद्भुत, और कहीं ज़्यादा संतोषजनक है। यह सत्य है इसलिए हम इस पर विश्वास करते हैं और हमारा यही विश्वास हमें संसार के आकर्षणों पर जयवंत करता है। जब हम अपनी आँखें बंद करके इस विश्वास के अनुसार जीवन जीते हैं, तब धीर-धीरे हमारी भावनाएं भी इसका अनुसरण करने लगेंगी। हमें पहले अपनी भावनाओं पर ध्यान नहीं लगाना चाहिए।

शैतान के खिलाफ लड़ाई हमारी आत्मा के लिए अच्छी होती है। हम सिर्फ इसी तरह सशक्त हो सकते हैं। मसीह के अच्छे योद्धा बनें। प्रभु आप पर भरोसा कर रहा है, और हम भी आप पर भरोसा कर रहे हैं कि आप प्रभु के झण्डे को ऊँचा और जयवंत रखेंगे जिससे प्रभु का नाम कभी बदनाम न हो!

अगर सैनिक अपने देश को स्वतंत्र और मुक्त बनाए रखने के लिए इतना ज़्यादा बलिदान कर सकते हैं, तो हमें अपना सब कुछ (अपना जीवन भी) बलिदान कर देने के लिए और भी कितना ज़्यादा तैयार रहना चाहिए कि हमारे जीवनों के द्वारा हर तरह से प्रभु सम्मानित हो और शैतान लज्जित हो।

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