कलीसिया में एकता द्वारा सामर्थ
 जैक पूनन | 08 August 2021
“दो लोग मिलकर उससे दोगुना हासिल कर सकते हैं, जो एक अकेला व्यक्ति कर सकता है, उनको अपने परिश्रम का अच्छा प्रतिफल मिलता है। अगर उसमें से एक गिर जाए तो दूसरा उसे उठा सकता है, लेकिन एक व्यक्ति अगर अकेला गिरता है, तो उसे उठाने वाला कोई नहीं होता, अकेले व्यक्ति पर कोई भी प्रबल हो सकता है लेकिन दो होने से वे उसका सामना कर सकते हैं, और तीन तो और भी अच्छे हैं क्योंकि तीन लड़ियों से बंटी हुई रस्सी जल्दी नहीं टूटती” (सभोपदेशक 4:9-12 टी.एल.बी.)। आपको पंचतंत्र कथाओं में से वह एक कथा याद होगी जिसमें एक किसान ने अपने तीन बच्चों को, जो हर समय आपस में लड़ते रहते थे, एकता के बारे में एक बड़ा पाठ सिखाया। उसने कुछ कमज़ोर लकड़ियों को लेकर उन्हें यह दिखाया कि कैसे एक अकेली लकड़ी को आसानी से तोड़ा जा सकता है, लेकिन लकड़ियों को एक साथ जोड़ दिये जाने पर उन्हें तोड़ना असंभव होता है। सांसारिक लोगों की संतानें भी यह समझती है कि एकता और सहभागिता में शक्ति होती है। बाइबल कहती है, “टिड्डियाँ हालाँकि छोटी होती है फिर भी बहुत समझदार होती है, क्योंकि हालाँकि उनका कोई राजा नहीं होता फिर भी वे झुण्ड में रहती है” (नीतिवचन 30:27 टी.एल.बी.)। इसी में उनकी सुरक्षा और शक्ति है। यीशु मसीह की कलीसिया में हमें यह पाठ दोबारा सीखने की ज़रूरत है।नए नियम में जिस एकता की बात की गई है, वह मसीह की शिषर्ता में उसकी देह के अंगों की एक दूसरे के साथ है – संस्थागत नहीं बल्कि एक जीवंत एकता। इसमें वे लोग शामिल नहीं है जो मसीह की देह से बाहर है – चाहे उन पर “मसीही” होने का लेबल भी क्यों न लगा हो। जीवितों और मृतकों का कोई मेल नहीं हो सकता। जो नया जन्म पाने द्वारा मसीह में जीवित हो चुके हैं, वे सिर्फ़ ऐसे लोगों के साथ ही आत्मिक एकता पा सकते हैं जो परमेश्वर द्वारा इसी तरह जीवित किए गए हैं। मसीही एकता पवित्र आत्मा द्वारा तैयार की जाती है क्योंकि सिर्फ़ वही हमें मसीह के देह का अंग बनाता है। बाइबल हमें उत्साहित करते हुए कहती है कि, “यत्न करों कि मेंल के उस बंधन को सुरक्षित रख सको जिसे पवित्र आत्मा ने बनाया है” (इफिसियों 4:3 एंपलिफ़ाइड बाइबल)। मनुष्य निर्मित कोई भी एकता व्यर्थ होती है।“शैतान के खिलाफ़ युद्ध में जय पाने की प्रतिज्ञा कलीसिया से – मसीह की देह से की गई है।”शैतान एक चालाक शत्रु है और वह जानता है कि एकता में बँधी ऐसी मसीही संगति का वह कुछ नहीं कर सकता जो मसीह और उसके वचन के अधिकार की अधीनता में रहती है। इसलिए, उसकी रणनीति यह होती है कि एक संगति के सदस्यों में फूट, शक और ग़लतफ़हमी पैदा करें जिससे कि वह एक एक सदस्य को अलग करके लकवाग्रस्त कर सके। यीशु ने कहा अधोलोक की सामर्थ्य उसकी कलीसिया पर प्रबल नहीं हो सकती (मत्ती 16:18)। शैतान के खिलाफ़ युद्ध में जय पाने की प्रतिज्ञा कलीसिया से – मसीह की देह से की गई है। एक विश्वासी जो दूसरे विश्वासियों से अलग होता है, वह स्वयं को हारा हुआ पा सकता है। शैतान ने पृथ्वी पर मसीह के रहने के दिनों में उस पर लगातार हमले किए, लेकिन वह उस पर प्रबल न हो सका। अंत में, मसीह ने क्रूस पर शैतान की उस शक्ति को उससे ले लिया जो उसे मनुष्य पर प्राप्त थी (इब्रानियों 2:14; कुलुस्सियों 2:15)। आज शैतान जी उठे मसीह पर हमला नहीं कर सकता, इसलिए अब उसका हमला मसीह की देह, कलीसिया पर होता है। शैतान पर जय तभी सम्भव हैं, जब हम मसीह के शीर्षस्थ एक देह के रूप में एक होकर खड़े होते हैं। एक मसीही संगति में अगर एक सदस्य भी अपना काम नहीं कर रहा है, तो देह की शक्ति उतनी कम हो जाती है। शैतान, यह जानते हुए, एक समूह के व्यक्तियों को लगातार अलग/एकांत करने की, या एक समूह (या कलीसिया) में फूट डालकर दलबंदी करने की कोशिश करता रहता है। इनमें से किसी भी तरीक़े से वह अपने उद्देश्य में सफल हो जाता है। इस वजह से ही हमें हर समय शैतान की युक्तियों से सचेत रहने की ज़रूरत होती है, कहीं ऐसा न हो कि वह हमारे और मसीह की देह के अंगों के बीच की कड़ियों को कमज़ोर कर दे।यीशु ने परमेश्वर से प्रार्थना करने वाले व्यक्तिगत विश्वासियों से बहुत सी प्रतिज्ञाएँ की है। लेकिन मत्ती 18:18,19 में, हम मसीह की देह के एक भाग से की गई प्रतिज्ञा को पाते हैं जो एकमत होकर प्रार्थना कर रहे है – “जो कुछ तुम पृथ्वी पर बाँधोगे”, यीशु ने कहा, “वह स्वर्ग में बँध जाएगा और जो कुछ तुम पृथ्वी पर खोलोगे, वह स्वर्ग में खुल जाएगा। मैं तुमसे फिर कहता हूँ कि, अगर तुम में से दो जन पृथ्वी पर किसी विनती के लिए एकमत हो तो वह मेरे स्वर्गीय पिता की ओर से उनके लिए पूरी हो जाएगी?(टी.एल.बी.)। पद 19 में जिस शब्द का अनुवाद “एकमत” किया गया है, वह यूनानी शब्द से “सिम्मफोनियों” है जिसमें से अंग्रेज़ी का “सिम्फनी” शब्द बना है। इन पदों में यीशु यह कह रहा है कि अगर उसके सिर्फ़ दो ही बच्चों के बीच में एकता होगी, तो वह एक संगीत के सुरों के तालमेल की तरह होगी। इसका अर्थ यह है कि यह बात एक विश्वासी की प्रार्थना के अंत में “आमीन” कह देने से कुछ ज़्यादा है। संगीतमय जुगलबंदी एक-साथ प्रार्थना करने वालों के बीच आत्मा का एक गहरा तालमेल दर्शाती है। जब मसीहियों के एक छोटे समूह की सहभागिता एक अच्छे निर्देशन वाली संगीत मंडली की जुगलबंदी की तरह होती है, तब (यीशु ने कहा कि) उनकी प्रार्थनाओं में वह अधिकार होगा कि वे जो कुछ भी माँगेंगे, वह उन्हें मिल जाएगा। मसीहियों के ऐसे समूह के पास यह अधिकार होगा कि वे शैतान की शक्तियों को बाँध सके और उसके बंदियों को रिहा कर सके। ऐसी सहभागिता द्वारा ऐसे अधिकार का इस्तेमाल कर पाने का कारण बताते हुए यीशु ने कहा, “क्योंकि जहाँ दो या तीन मेरे नाम से इकट्ठा होते हैं वहाँ उनके बीच में मैं हूँ (पद 20 एंपलिफ़ाइड)। मसीह जो सिर है, ऐसी सहभागिता के बीच अपने अधिकार के साथ मौजूद रहता है और इसलिए अधोलोक की शक्तियां उस सहभागिता के ख़िलाफ़ कभी नहीं टिक सकती। जिस कलीसिया का “प्रेरितों के काम” में बयान किया गया है, वह इस अधिकार की वास्तविकता को इसलिए जानती थी क्योंकि उनकी सहभागिता में ऐसी एकता थी। इन सभी (11 प्रेरितों) ने अपने मन के साथ पूरी सहमति के साथ प्रार्थना करने के लिए खुद को समर्पित कर दिया ….. “और सभी विश्वास करने वाले एकजुट और एक साथ थे … और दिन-प्रतिदिन वे नियमित रूप से मंदिर में संयुक्त उद्देश्य के साथ इकट्ठे होते थे …… “और उन्होंने (प्रेरितों और अन्य विश्वासियों) ….. परमेश्वर के लिए एक संयुक्त मन के साथ अपनी आवाज उठाई …..(प्रेरितों के काम 1:14; 2:44,46;4:24 एंपलिफ़ाइड)। क्योंकि वे मसीह के अधिकार के नीचे एक देह के रूप में जुड़े हुए थे, इसलिए वे प्रार्थना में प्रभु के अधिकार को इस्तेमाल कर सके। ये बहुत पढ़े लिखे नहीं थे और उनका न तो कोई सामाजिक प्रभाव था और न ही उन्हें कोई आर्थिक समर्थन प्राप्त था, फिर भी उन्होने मसीह के लिए भी उस समय के संसार को उलट पलट कर दिया था। पतरस जब कारावास में बंद कर दिया गया था, तो हेरोदेस की सारी शक्ति भी परमेश्वर के सामने घुटनों पर झुकी हुई कलीसिया का सामना न कर सकी थी (प्रेरितों के काम 12:5-11)। जब एक देह के रूप में वह कलीसिया आगे बढ़ी , तो शैतान के राज्य की बुनियादी हिलने लगी थी, और उसने पूरे रोमी साम्राज्य में मसीह की जय और अधिकार को स्थापित कर दिया था (इसकी एक उदाहरण के लिए देखें प्रेरितों के काम 19:11-20)।आज शैतान एक विभाजित कलीसिया की उन कोशिशों का मज़ाक़ उड़ाता है जिसमें वह चालबाज़ियों, उपकरणों, सभाओं, धर्म-सैद्धांतिक ज्ञान, चतुर वाक्य शैली और प्रशिक्षित आराधना मंडलियों द्वारा उसके गढ़ों में से उसे निकालने की कोशिश करते हैं। इनमें से कुछ भी शैतान के ख़िलाफ़ काम नहीं कर सकता। अब यह फिर से ज़रूरी हो गया है कि कलीसिया मसीह के शीर्षस्त एक देह होने की वास्तविकता को जाने। मसीहियों की एक ऐसी संगती जिसके सदस्यों का आपस में सही तालमेल हो, जो एक दूसरे के लिए प्रेम में बढ़ रही हो, और जो मसीह और उसके वचन के प्रति आज्ञाकारी हो, वह पृथ्वी पर शैतान और उसके राज्य के लिए सबसे बड़ा ख़तरा होती है। शैतान इससे ज़्यादा और किसी बात से नहीं डरता। यह हमारी प्रार्थना का विषय हो कि प्रभु हमारी मदद करें कि हम प्रतिदिन मसीह में एक देह होने के महिमामय सत्य की ज्योति में चल सके। जगत में मसीही लोग जैसे जैसे इस सत्य को समझने और इसके अनुसार जीने वाले होते जाएंगे, वैसे वैसे हम कलीसिया को, हालाँकि उसकी संख्या कम होगी, उसकी पहली महिमा में पुनः स्थापित होता हुआ देखेंगे; तब वह परमेश्वर के हाथों में एक ऐसा साधन होगी जो अंधकार की शक्तियों को हराएगी और एक ज़रूरतमंद जगत को आशीष देने वाला एक माध्यम बन जाएगी।
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