द्वारा लिखित :   जैक पूननश्रेणियाँ :   जवानी घर कलीसिया परमेश्वर को जानना चेले

1. भागो
प्रलोभन पर विजय पाने का सबसे अच्छा तरीका है कि इससे बचें और इससे दूर भागें – जैसा कि यूसुफ ने किया था (उत्पत्ति 39:7-12)। उन सभी जगहों और लोगों से बचें जो आपको ज़ोरदार ढंग से प्रलोभित और कमजोर करते हैं। यीशु ने हमें प्रार्थना करना सिखाया, “हमें परीक्षा में न डाल” (मत्ती 6:13)। और पृथ्वी पर भी, अब से कुछ सालों बाद, आप इस बात के लिए धन्यवादी होंगे कि आप कुछ ऐसी जगहों और लोगों से दूर रहे जो आपकी जय पाने की क्षमता से ज़्यादा आपको प्रलोभित कर रहे थे। आपका ऐसी जगहों और लोगों से दूर रहना प्रभु के आगे यह साबित करने का तरीका होगा कि आप वास्तव में सिर्फ उसे ही प्रसन्न करना चाहते हैं। (इस बारे में नीतिवचन 7 पढ़ें। सभी युवकों के लिए बीच-बीच में पढ़ लेने के लिए वह एक अच्छा अध्याय है)।

विपरीत लिंग से ज्यादा नज़दीकी दोस्त बनने से दूर भागें। ऐसी पुस्तकों से दूर रहें (और ‘इन्टरनेट वैबसाइट’) जो आपकी कामुक लालसाओं को उत्तेजित करती हैं। ऐसे व्यर्थ टी.वी. कार्यक्रमों को देखने द्वारा अपना समय बर्बाद करने से भी दूर भागें। पीठ-पीछे किसी की बुराई सुनने से भी दूर रहें। बुरी बातें सुनने, बुरी बातें पढ़ने, और बुरी बातें देखने से आपके अन्दर सिर्फ बुराई का ही ज्ञान बढ़ेगा। और आपको ऐसी घिनौनी जानकारी की ज़रूरत ही क्या है? वह आपको सिर्फ दूषित और बर्बाद ही करेगी। अब से आप ऐसी सभी जानकारी की तरफ से अपने कान और आँखें बंद कर लेना। दूसरों द्वारा किए जाने वाले बुरे कामों की जानकारी से आप कभी ज़्यादा बुद्धिमान नहीं हो जाएंगे। बाइबल हमें “बुराई के मामले में बच्चे बने रहने” के लिए प्रोत्साहित करती है (1 कुरिन्थियों 14:20)। एक बच्चे का मन सारी बुराई से शुद्ध होता है। और सुसमाचार की खुश-ख़बरी यह है कि हालांकि हमने इतने सालों तक अपने मनों को बुरी बातों से दूषित किया है, लेकिन अब अगर हम वास्तव में इस बुराई से मुक्त होना चाहते हैं, तो पवित्र आत्मा एक बच्चे जैसा शुद्ध मन पाने के लिए दोबारा हमारी मदद कर सकता है। परमेश्वर की कृपा हमारे लिए यह कर सकती है। प्रभु की स्तुति हो! हमें “भलाई के लिए बुद्धिमान और बुराई के लिए भोले बने रहने” के लिए बुलाया गया है (रोमियों 16:19)। इसलिए पवित्र आत्मा से कहें कि वह आपको यीशु की जीवन-शैली का दर्शन कराए। तब आप यह जान सकेंगे कि ‘भलाई के लिए बुद्धिमान होना” क्या होता है।

2.शोक
अगर आप पाप में गिर भी जाते हैं, तो आपको फौरन शोक करते हुए उसके लिए क्षमा माँग लेनी चाहिए, वर्ना आप पाप को मामूली समझने लगेंगे, और आपके लिए जय पाना और ज़्यादा मुश्किल होता जाएगा। इसलिए, जैसे ही आपको यह अहसास हो कि आप कहीं भी परमेश्वर के स्तर से नीचे गिर गए हैं, तो आपको परमेश्वर के साथ अपना लेखा-जोखा तुरतं ठीक कर लेना चाहिए, अपने पाप का अंगीकार करते रहना चाहिए, उसे त्यागते रहना चाहिए, और उससे मन फिराते रहना चाहिए। यदि आप हर बार किसी पाप में पड़ने पर शोक मनाते हैं, तो यह परमेश्वर को इंगित करता है कि आप वास्तव में पाप पर विजय के जीवन के प्यासे हैं। और इसलिए जब भी किसी न किसी बात को लेकर आपके विवेक में जरा सी भी बेचैनी हो तो तुरंत मामले को सुलझा लें। पाप को एक बार में ही परमेश्वर के सामने स्वीकार कर लें, भले ही वह आपके विचारों में केवल एक असफलता ही क्यों न हो। जिस किसी की सम्बंध में आवश्यक हो उससे क्षमा याचना करें। और तब आप देखेंगे कि कैसे परमेश्वर आपको शक्तिशाली रूप से मजबूत करता है।

3. धीरज से सहना:
यह जय पाने का रहस्य है। यह करते रहें – जैसे आप किसी समस्या में तब तक धीरज से बने रहते हैं जब तक कि वह हल नहीं हो जाती। निरुत्साहित हो जाने की परीक्षा में पड़ना एक वैश्विक समस्या है; लेकिन हार न मानें। आपके पैदा होने से भी पहले परमेश्वर ने आपके लिए एक सिद्ध योजना बना रखी थी (भजन संहिता 139:16)। शैतान को उसे बर्बाद न करने दें। प्रभु के पक्ष में खड़े रहें, चाहे इसकी कोई भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े। यीशु ने यूहन्ना 14:30 में कहा है कि जब इस ससांर का शासक आएगा, तो वह (दोष लगाने के लिए) उसमें कुछ भी न पाएगा। अब हमें भी वैसे ही चलने के लिए बुलाया गया है जैसे यीशु चला था। जब शैतान आपके पास आए, तो उसे आपमें भी कुछ नहीं मिलना चाहिए। इस वजह से ही हमें “परमेश्वर और मनुष्यों के समक्ष अपने विवेक को निर्दोष बनाए रखने के लिए सदा प्रयास करते रहना चाहिए” (प्रेरितों के काम 24:16)। आपको पूरे हृदय से एक ऐसा जीवन जीने के लिए परमेश्वर की मदद की खोज में रहना चाहिए जिसमें आप जानबूझ कर पाप न करें। अपनी लालसाओं के सामने झुक जाने से आप शैतान को अपने जीवन में पैर रखने का मौका दे देंगे। रोमियों 6:1 यह सवाल पूछता है, “तो क्या हम पाप करते रहें?” फिर रोमियों 6:15 यह सवाल करता है, “क्या हम एक बार पाप कर सकते हैं?” इन दोनों ही सवालों का पुरज़ोर जवाब है “नहीं, ऐसा कभी न हो।” प्रलोभन और गलतियाँ आपके जीवन के अंत तक आपके जीवन का एक निरंतर हिस्सा बने रहेंगे। लेकिन आप कुछ समय बाद सचेत पाप पर विजय प्राप्त कर सकते हैं – और उसके बाद आपका गिरना दुर्लभ हो जाएगा।

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