द्वारा लिखित : जैक पूननश्रेणियाँ : जवानी कलीसिया परमेश्वर को जानना चेले

परमेश्वर का लक्ष्य हमें मसीह समान बनाना है। इससे जुड़े ये तीन महत्वपूर्ण पद हैं:
1. रोमियों 8:28, 29: हमारा पिता सारी बाहरी बातों को इस तरह जोड़ता है कि वे हमें इस लक्ष्य तक पहुँचने योग्य बना देती हैं।
2. 2 कुरिन्थियों 3:18 : पवित्र आत्मा हमें भीतरी तौर पर भरता है और इस लक्ष्य की तरफ ले जाता है।
3. 1 यूहन्ना 3:2, 3 : जिन्हें मसीह के लौटने की आशा है, वे इस लक्ष्य की तरफ बढ़ते जाते हैं।
अगर हम यीशु के साथ मरेंगे, तो यकीनन उसके साथ जीएंगे भी। अगर हमारा परमेश्वर में विश्वास होगा हम “यीशु के मरने” के साथ सहमत हो जाएंगे – परमेश्वर द्वारा हमारे लिए तैयार की गई उन स्थितियों में अपनी स्वेच्छा में मर जाने के लिए (जो अपना भोग-विलास, अपना सम्मान, अपनी प्रतिष्ठा आदि चाहती है), और जिसमें हमें यह पूरा विश्वास होगा कि इसके बदले में जो अलौकिक जीवन परमेश्वर हमें देगा, वह उस सड़े हुए आदमीय जीवन से बहुत ज़्यादा श्रेष्ठ होगा जिसे हम मृत्यु के हवाले कर रहे हैं।
जो जीवन हमने अपने माता-पिता से विरासत में पाया है, यीशु का जी- उठा जीवन उससे बहुत श्रेष्ठ है। लेकिन इससे पहले कि परमेश्वर हमें यीशु का जीवन दे, हमे स्वेच्छा से इस आदमीय जीवन को मौत के हवाले करना होगा (2 तीमु. 2:11; 2 कुरि. 4:10 )। इसे हम इस तरह भी चित्रित कर सकते हैं। यह मानो ऐसा है कि भिखारी के डिब्बे के अन्दर पड़े कुछ सिक्कों (वह सड़ा हुआ आदमीय जीवन) के बदले परमेश्वर से दस लाख रुपए पा लेना। ऐसे सौदे को कोई मूर्ख ही इनकार करेगा। लेकिन संसार ऐसे मूर्खों से भरा पड़ा है। उनके जीवन के अंत में उनके हाथ में वे थोड़े से सिक्के ही होते हैं (उनका भ्रष्ट आदमीय जीवन), जबकि अपना पार्थिव जीवन पूरा करने के पहले वे उनकी पृथ्वी की परीक्षाओं में ( ईश्वरीय स्वभाव पाने द्वारा) आत्मिक रूप में धनवान हो सकते थे। इसलिए यह कोई हैरानी की बात नहीं कि बाइबल हमारी लालसाओं को भरमाने वाली कहती है (इफि. 4:22), क्योंकि वे हमें मूर्ख बनाते हुए इस धोखे में रखती हैं कि वे हमें खुशियाँ देंगी !
परमेश्वर के प्रेम के दो चिन्ह ये हैं कि जब हम किसी मामूली बात में भी ग़लती करते हैं, तो वह हमें डाँटता और ताड़ना देता है ( इब्रानियों 12:5-8: प्रका. 3:19)। इससे यह साबित होता है कि वह हमसे पुत्रों की तरह व्यवहार करता है। और परमेश्वर हमें यीशु के समान बनाने के लक्ष्य की ओर दृढ़ता से कार्य करता है, जब हम उसी लक्ष्य के प्रति गंभीर होते हैं।
हमारे जीवनों के लिए परमेश्वर के पास जो योजना है, वह तभी पूरी हो सकती है जब हम उसे पूरे हृदय से खोजते हैं वर्ना नहीं ( इस बारे में यिर्मयाह 29:11-13 पढ़ें)। जो यत्नपूर्वक परमेश्वर को खोजते हैं, वह उन्हें प्रतिफल देता है (इब्रा. 11:6 – के.जे.वी.)। इसलिए आपको अभी से ही, उसे यत्नपूर्वक खोजना शुरू कर देना चाहिए।
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