द्वारा लिखित : जैक पूननश्रेणियाँ : जवानी चेले साधक

जब हम स्वर्ग में जाएंगे, तो हम उन स्वर्गदूतों को देखेंगे जिन्होंने हमारी उस समय रक्षा की थी जब हम पृथ्वी पर यात्राएं करते थे। जब उस अंतिम दिन हम अपने पूरे जीवन को एक चलचित्र की तरह प्रदर्शित होते हुए देखेंगे, तब हमें यह पता चलेगा कि ऐसे हज़ारों स्वर्गदूत हैं जिन्हें हमारी रक्षा करने के लिए हमें धन्यवाद देना होगा। अभी तो हमें सिर्फ सड़कों पर “बाल-बाल बच जाने” की थोड़ी सी घटनाओं की ही जानकारी है। लेकिन उस दिन हम जानेंगे कि इस तरह “बच निकलने” की और भी बहुत सी घटनाएं हुई हैं जिनमें हम बचाए गए थे। इसलिए धन्यवादी हों।
सारी बातें मिलकर हमारे लिए भलाई उत्पन्न करती हैं। कुछ साल पहले जब मेरे साथ दुर्घटना हुई थी, तब मैंने यह कहा था, “प्रभु, तूने कलवरी पर मेरे लिए जो कुछ किया है, मैंने उसके लिए तुझे अब तक पर्याप्त धन्यवाद भी नहीं दिया है। इसलिए मुझे थोड़ा और समय दे कि मैं तुझे “धन्यवाद” दे सकूँ”। और तब मेरे मन में यह वाक्य आया था: “जो कुछ प्रभु ने हमारे लिए क्रूस पर किया है, हमारे जीवन उस काम के लिए निरंतर एक धन्यवाद की अभिव्यक्ति होने चाहिए।”
हर बात में परमेश्वर का एक उद्देश्य होता है। याकूब के बारे में यह लिखा है कि “उसने अपनी लाठी के सिरे पर सहारा लेकर विश्वास से परमेश्वर की आराधना की (जो असल में उसकी बैसाखी थी और वह उसके बिना चल नहीं सकता था, क्योंकि परमेश्वर ने उसकी जाँघ की नस को मरोड़ दिया था) और याकूब ने दूसरों को आशिष दी (इब्रा. 11:21 )। वह लाठी (बैसाखी) सशक्त रूप में आत्म-निर्भर याकूब को लगातार यह याद दिलाती रहती थी कि उसे हरेक बात के लिए एक असहाय रूप में परमेश्वर पर निर्भर रहने की ज़रूरत है। इस प्रकार वह इस्राएल बन गया – परमेश्वर का राजकुमार जिसके पास परमेश्वर और मनुष्यों के साथ शक्ति थी। यह तब था जब वह उस कमजोर अवस्था में आ गया था कि वह दूसरों को आशीर्वाद दे सकता था (जैसा कि पद कहता है)। मैं प्रार्थना करता हूं कि आप भी अपनी मानवीय शक्ति के टूटने के अनुभव के बारे में कुछ जानेंगे, ताकि आप अकेले परमेश्वर पर निर्भर रहें, और दूसरों के लिए कहीं अधिक बड़ी आशीष बन सकें, अन्यथा आप कभी भी नहीं हो सकते थे।
परमेश्वर ने आपके जीवन की पूरी तरह (हर विवरण की) से योजना बनाई है। वह शैतान को आप पर आक्रमण करने की अनुमति देता है, जैसे उसने शैतान को यीशु पर आक्रमण करने की अनुमति दी थी। लेकिन यीशु ने अपनी आत्मा को शुद्ध रखा और आप भी अपनी आत्मा को शुद्ध रख सकते हैं। “परमेश्वर सब कुछ जानता है जो तुम्हारे साथ हो रहा है” (अय्यूब 23:10 – लिविंग अनुवाद), तब भी जब आप कठिन परिस्थितियों में हों; और वह हर विवरण की योजना बनाता है (रोमियों 8:28)। तो उसमें अपना आराम पाएं। ऐसी परिस्थितियों में जहाँ आप पाते हैं कि “मनुष्य की सहायता व्यर्थ है” अकेले परमेश्वर पर निर्भर रहने का अनुभव करना अच्छा है। आत्मीक रूप से विकसित होने का यही एकमात्र तरीका है। सी. टी. स्टड ने एक बार कहा था, “मैं तंग जगह की विलासिता से प्रेम करता हूँ, ताकि मैं देख सकूँ कि वहाँ परमेश्वर मेरे लिए क्या चमत्कार करेगा”।
जब हम महसूस करते हैं कि परमेश्वर पिता ने हमें चुना है, परमेश्वर के पुत्र ने हमें अपने लहू से खरीदा है और पवित्र आत्मा ने अब हमें परमेश्वर का अपना होने के लिए मुहर लगा दी है, तो यह हमारे भीतर एक जबरदस्त मुक्ति लाएगा (इफिसियों 1:1-13)। हमारा उद्धार पूरी तरह से परमेश्वर के अनुग्रह से हुआ था। परमेश्वर ने बस हमारे “हाँ” कहने की प्रतीक्षा की और फिर उसने यह सब किया (इफिसियों 2:1-8)। वह हमारी अनुमति के बिना हमें नहीं बचा सकता था, क्योंकि हम रोबोट नहीं हैं।
परमेश्वर ने हमें जगत की उत्पत्ति से पहले चुन लिया था इससे पहले कि हमने कुछ भी भला या बुरा किया था (रोमि. 9:11 ) – और उसने यह फैसला किया था कि वह हमें मसीह में पवित्र आत्मा की हरेक आशिष देगा। इसलिए हमारे बारे में वह अब अपना विचार नहीं बदलेगा।
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