अरुचि रोग या अरोचक बीमारी का दूसरा नाम अग्रिमांद भी है। जिस का अर्थ है-भोजन के प्रति रुचि का पूरी तरह से समाप्त हो जाना। अरुचि रोग की प्रारंभिक अवस्था में भूख की कमी और कमजोरी का अहसास होने लगता है। अरुचि का अर्थ यह भी होता है कि भूख लगी हो और भोजन भी स्वादिष्ट हो, फिर भी भोजन न खाया जाए। इस रोग से लगातार प्रभावित रहने से इंसान धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है और उसकी कार्यक्षमता पर भी असर होने लगता है।

कारण :

• पाचन तंत्र में गड़बड़ी होने के कारण जीभ में किसी भी प्रकार का स्वाद न होना

• बुखार होना, विषम ज्वर (मलेरिया) के बाद

• जिगर तथा आमाशय की खराबी

• पेट साफ न रहना यानी कब्ज होना

• अनियमित ढंग से आहार करना

• देर तक जागना, सुबह देर से उठना

• भोजन का स्वादिष्ट न होना

• भूख कम करने वाले आहार का सेवन

• चाय-कॉफी का अधिक सेवन करना, आदि

• अधिक चिंता या तनाव में रहना

• भय

• क्रोध

• घबराहट

लक्षण :

• कम खाने पर भी पेट भरा प्रतीत होना

• किसी कार्य को करने की इच्छा नहीं होना

• खाना खाने की इच्छा न होना

• खून की कमी होना

• चेहरा कांतिहीन एवं काला पड़ जाना

• ज्यादा प्यास लगना

• थोडी सा काम करने पर थकान होना

• मानसिक अशांति से ग्रस्त होना

• मुँह में गरमी एवं मुँह से बदबू आना

• शरीर के वजन में दिन-ब-दिन कमी होते जाना

• सूखी डकारें आना

• हृदय के समीप लगातार जलन होना

आयुर्वेदिक उपचार :

अदरक (Ginger)
भूख जगाने के लिए आप आधा चम्मच कटे हुए अदरक काला नमक के साथ खाना खाने से आधा घंटे पहले खाएं, काफी काम करेगा। इसे इस्तेमाल करें। आप खाने को ना नहीं कर सकते हैं इसे लेने के बाद। आप अदरक के चाय का भी सेवन कर सकती हैं।

संतरा (Orange)
संतरों में भी भूख जगाने की क्षमता होती है। संतरा न सिर्फ आपके पाचन तंत्र को ठीक करता है बल्कि इससे कब्ज भी दूर होता है। इसे जब मन करे चार-छह फांक छीलकर खाते रहें। इसे काले नमक, नींबू के रस के साथ भी खा सकती हैं या फिर जूस भी पी सकते हैं।

मिंट (Mint)
मिंट भूख लगाने की कुदरती दवा है। एनोरेक्सिया के इलाज में इसे आजमाया जा सकता है। इसके स्वाद और खास सुगंध के कारण भूख की इच्छा जगती है। इसे खाने से डिप्रेशन और तनाव भी कम होगी। दो चम्मच मिंट के पत्ते से निकाले जूस रोज सुबह पीएं या फिर मिंट से बनी चाय भी पी सकती हैं।

लेमन बाम (Lemon Balm)
यह नर्व टॉनिक की तरह काम करता है और इससे भूख भी लगती है। इसे खाने से तनाव कम होता है और नींद भी अच्छी आती है। एक चम्मच लेमन बाम की सूखी पत्तियों को एक कप गर्म पानी में डालें और इसे थोड़ी देर ढ़ंक दें। ठंढा होने पर इसे चाय की तरह पीएं। काफी काम करेगा।

हर्बल चाय (Herbal Tea)
हर्बल चाय या ग्रीन टी और कई तरह के जड़ी-बूटियों को मिला कर बनी चाय पीने से भूख जगती है। तनाव और डिप्रेशन कम होती है। एनोरेक्सिया में हर्बल टी पीने की सलाह दी जाती है।

मसाज (Massage)
मसाज थेरेपी सिर्फ तनाव और डिप्रेशन ही नहीं दूर करती है बल्कि इससे भूख भी लगती है। मेडिकल जर्नल में एनोरेक्सिया के इलाज में मसाज थेरेपी को भी मेडीसिन के रुप में शामिल किया गया है। किसी स्पा में जाकर हर्बल मसाज ट्रेंड मसाजर से लें, काफी फायदा करेगा।

योग (Yoga)
एनोरेक्सिया बीमारी से पैदा हुई भावनात्मक असुरक्षा को दूर भगाता है योग। योग में ऐसे कई आसन हैं खासकर- कपोतआसन(कबूतर के समान), शलभआसन। इसे करने से आप बहुत जल्द ठीक हो सकती हैं।

एक्यूपंक्चर और एक्यूप्रेशर (Acupuncture and Acupressure)
एक्यूपंक्चर और एक्यूप्रेशर दोनों की मदद से एनोरेक्सिया से लड़ी जा सकती है। इसे आजमाने से आपको अच्छा अनुभव होगा और रिलैक्स महसूस करेंगे। किसी खास नर्व पर एक्यूपंक्चर या एक्यूप्रेशर करने से भूख भी लगने लगती है।

लहसुन (Garlic)
लहसुन भूख जगाने की सबसे कारगर घरेलू उपाय है। इसे खाने के बाद एक खास तरह के एंजाइम का स्राव होता है जो भूख जगाता है और पाचन क्रिया को मजबूत करता है। रोज सुबह कच्चे लहसुन के तीन और चार दाने एक कप पानी के साथ खा लें। अगर कच्चा लहसुन खाने में कड़वा लगता है तो उसे उबाल कर उसमें नमक और नींबू के रस मिला कर भी खा सकते हैं।

बचाव  : 

• गेहूं के चोकर में सेंधा नमक और अजवायन मिलाकर रोटी बनाकर खाने से भूख तेज होती है।n
• एक सेब या सेब के रस के प्रतिदिन सेवन से खून साफ होता है और भूख भी लगती है।n
• एक गिलास पानी में जीरा, हींग, पुदीना, कालीमिर्च और नमक डालकर पीने से अरुचि दूर होती है।n
• प्रतिदिन मेथी में छौंकी गई दाल या सब्ज़ी के सेवन से भूख बढ़ती है।n
• नींबू को काटकर इसमें सेंधा नमक डालकर भोजन से पहले चूसने से कब्ज दूर होकर पाचनक्रिया तेज हो जाती है।

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