आज हर उम्र के लोग इससे परेशान हैं और दुनिया भर में इसके सरल व सहज इलाज की खोज जारी है। दिनभर बैठे कर काम करने से यह समस्या और भी बढ़ जाती है। कमर दर्द अगर नीचे की तरफ बढ़ने लगे और तेज हो जाए, तो जल्द से जल्द डॉक्टर को दिखाएं। कभी-कभी दर्द कुछ मिनट ही होता है और कभी-कभी यह घंटों तक रहता है। 30 से 50 वर्ष की आयुवर्ग के लोग इसकी चपेट में अधिक आते हैं। वे महिला और पुरुष इसके अधिक शिकार होते हैं, जिन्हें अपने काम की वजह से बार-बार उठना, बैठना, झुकना या सामान उतारना, रखना होता है।

कारण :

• गलत पोश्चर (Posture),

• लेटकर या झुककर पढ़ना या काम करना,

• कंप्यूटर के आगे बैठे रहना,

• अचानक झुकना,

• वजन उठाना,

• झटका लगना,

• गलत तरीके से उठना-बैठना,

• अनियमित दिनचर्या,

• सुस्त जीवनशैली,

• शारीरिक गतिविधियां कम होना,

• गिरना,

• फिसलना,

• दुर्घटना में चोट लगना,

• देर तक ड्राइविंग करना,

• उम्र बढने के साथ-साथ हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और इससे डिस्क पर जोर पड़ने लगता है,

• कमर की हड्डियों या रीढ़ की हड्डी में जन्मजात विकृति या संक्रमण,

• पैरों में कोई जन्मजात खराबी या बाद में कोई विकार पैदा होना।

लक्षण :

• चलने-फिरने, झुकने या सामान्य काम करने में भी दर्द का अनुभव होना, झुकने या खांसने पर शरीर में करंट सा अनुभव होना।

• नसों पर दबाव के कारण कमर दर्द, पैरों में दर्द या पैरों, एडी या पैर की अंगुलियों का सुन्न होना,

• पैर के अंगूठे या पंजे में कमजोरी,

• रीढ के निचले हिस्से में असहनीय दर्द,

• समस्या बढने पर पेशाब और मल त्यागने में परेशानी,

• स्पाइनल कॉर्ड के बीच में दबाव पडने से कई बार हिप या थाईज के आसपास सुन्न महसूस करना.

आयुर्वेदिक उपचार :

• घुटने मोड़ें (Band knee)
नीचे रखी कोई वस्तु उठाते वक्त पहले अपने घुटने मोड़ें फिर उस वस्तु को उठाएं। ऐसा करने से कमर पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ेगा और कम तकलीफ होगी।

• लहसुन (Garlic)
भोजन में लहसुन का पर्याप्त उपयोग करें। लहसुन कमर दर्द का अच्छा उपचार माना गया है। लहसुन के प्रयोग से पुराने से पुराना कमर दर्द भी ठीक होने लगता है।

• गूगुल (Benzoin)
गूगुल कमर दर्द में बेहद राहत देता है। कमर दर्द में उपचार के लिए गूगुल की आधा चम्मच गरम पानी के साथ सुबह-शाम सेवन करें। ऐसा करने से कमर दर्द में आराम मिलता है।

• मसाला चाय (Tea)
चाय बनाने में 5 कालीमिर्च के दाने, 5 लौंग पीसकर और थोड़़ा सा सूखे अदरक का पाउडर डालें। दिन मे दो बार इस तरह की मसाला चाय पीएं। मसाला चाय पीते रहने से कमर दर्द में लाभ होता है।

• सख्त बिस्तर (Tough Bedding)
सख्त बिस्तर पर सोने से भी कमर दर्द में बेहद आराम मिलता है। ऐसा करने से कमर समतल रहती है और पूरी कमर पर समान दबाव पड़ता है। औंधे मुंह पेट के बल सोना भी हानिकारक है।

•दालचीनी (Cinnamon)
2 ग्राम दालचीनी का पाउडर एक चम्मच शहद में मिलाकर दिन में दो बार लेते रहने से कमरदर्द में राहत मिलती है।

• शरीर को गर्म रखें (Warm Body)
कमर दर्द पुराना हो तो शरीर को गर्म रखें और गरम वस्तुएं खाएं। ऐसा करने से कमर दर्द में बेहद राहत मिलती है। सर्दियों में दर्द ज्यादा हो तो ध्यान रखें कि दर्द वाला हिस्सा हवा के संपर्क में न आए।

• बर्फ की सिकाई (Ice Foment)
दर्द वाली जगह पर बर्फ का प्रयोग करना भी लाभकारी उपाय है। इससे भीतरी सूजन भी समाप्त होगी। कुछ रोज बर्फ़ का उपयोग करने के बाद गरम सिकाई प्रारंभ कर देने से अनुकूल परिणाम आते हैं।

• पौष्टिक भोजन (Proper Nutrition)
भोजन मे टमाटर, गोभी, चुकंदर, खीरा, ककड़ी, पालक, गाजर, फ़लों का प्रचुर मात्रा में उपयोग करें।

• भाप की सिकाई (Steam Foment)
नमक मिले गरम पानी में एक तौलिया डालकर निचोड़ लें। पेट के बल लेटकर दर्द के स्थान पर तौलिये द्वारा भाप लेने से कमर दर्द में राहत मिलती है।

• मालिश (Massage)
रोज सुबह सरसों या नारियल के तेल में लहसुन की तीन-चार कलियाँ डालकर (जब तक लहसुन की कलियाँ काली न हो जायें) गर्म कर लें फिर ठंडा कर प्रभावित जगह पर मालिश करें।

• नमक (Salt)
कढ़ाई में दो-तीन चम्मच नमक डालकर इसे अच्छे से सेक लें। थोड़े मोटे सूती कपड़े में यह गरम नमक डालकर पोटली बांध लें। कमर पर इसके द्वारा सेक करें।

बचाव :

• कमर दर्द के ज्यादातर मरीजों को आराम करने और फिजियोथेरेपी से राहत मिल जाती है।

• स्लिप डिस्क या कमर दर्द की समस्या होने पर दो से तीन हफ्ते तक पूरा आराम करना चाहिए।

• दर्द कम करने के लिए डॉक्टर की सलाह पर दर्द-निवारक दवाएं, मांसपेशियों को आराम पहुंचाने वाली दवाएं लें।

• जीवनशैली बदलें।

• वजन नियंत्रित रखें। वजन बढ़ने और खासतौर पर पेट के आसपास चर्बी बढ़ने से रीढ़ की हड्डी पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

• नियमित रूप से पैदल चलें। यह सर्वोत्तम व्यायाम है।

• शारीरिक श्रम से जी न चुराएं। शारीरिक श्रम से मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं।

• अधिक समय तक स्टूल या कुर्सी पर झुककर न बैठें। कुर्सी पर बैठते समय पैर सीधे रखें न कि एक पर एक चढ़ाकर।

• अचानक झटके के साथ न उठें-बैठें। एक सी मुद्रा में न तो अधिक देर तक बैठे रहें और न ही खड़े रहें।

• कमर झुका कर काम न करें। अपनी पीठ को हमेशा सीधा रखें।

• ऊँची एड़ी के जूते-चप्पल के बजाय साधारण जूते-चप्पल पहनें।

• सीढ़ियाँ चढ़ते-उतरते समय सावधानी बरतें।

• यदि कहीं पर अधिक समय तक खड़ा रहना हो तो अपनी स्थिति को बदलते रहें।

• दायें-बायें या पीछे देखने के लिए गर्दन को ज्यादा घुमाने के बजाय शरीर को घुमाएं।

• देर तक ड्राइविंग करनी हो तो गर्दन और पीठ के लिए तकिया रखें। ड्राइविंग सीट को कुछ आगे की ओर रखें, ताकि पीठ सीधी रहे।

• अधिक ऊँचा या मोटा तकिया न लगाएँ। साधारण तकिए का इस्तेमाल बेहतर होता है।

• अत्यधिक मुलायम और सख्त गद्दे पर न सोएं। स्प्रिंगदार गद्दों या ढीले निवाड़ वाले पलंग पर सोने से भी बचें।

• पेट के बल या उलटे होकर न सोएं।

• परंपरागत तरीकों से आराम न पहुंचे तो सर्जरी ही एकमात्र विकल्प है। लेकिन सर्जरी होगी या नहीं, यह निर्णय पूरी तरह विशेषज्ञ का होता है।

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