डेंगू से कई बार मल्टी - ऑर्गन फेल्योर (Multi Organ Failure) भी हो जाता है। डेंगू बुखार के हर मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत नहीं होती। आमतौर पर एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में डेढ़ से दो लाख प्लेटलेट्स होते हैं। प्लेटलेट्स शरीर में रक्तस्राव (Bleeding) रोकने का काम करती हैं। प्लेटलेट्स अगर एक लाख से कम हैं तो मरीज को फौरन हॉस्पिटल में भर्ती कराना चाहिए।

डेंगू में 24 घंटे में 50 हजार से एक लाख तक प्लेटलेट्स तक गिर सकते हैं। अगर प्लेटलेट्स गिरकर 20 हजार या उससे नीचे पहुंच जाएं तो प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। 40-50 हजार प्लेटलेट्स तक रक्तस्राव नहीं होता। डेंगू में कई बार चौथे – पांचवें दिन बुखार कम होता है तो लगता है कि मरीज ठीक हो रहा है, जबकि ऐसे में कई बार प्लेटलेट्स गिरने लगते हैं।

कारण :

• खाली बर्तनों को उलटा करके रखें।
• पक्षियों के खाने- पीने के बर्तनों को हर रोज साफ करें।
• अगर घर में कूलर है तो उसका पानी दो या तीन दिन बाद अवश्य बदलें।
• घर में स्थित हौदियों, टैंकरों में पानी को साफ रखने के लिए उसमें क्लोरीन की दो चार गोलियां डाल दें।
• घर के आस- पास या छत पर पड़े बेकार टायर, ट्यूब, टूटे हुए मटके, खाली डिब्बों आदि में बरसात का पानी इकठ्ठा न होने दें।

लक्षण :

• उल्टी व शरीर पर लाल-लाल दाने निकल आते हैं
• कमजोरी हो जाती है और चक्कर आते हैं
• डेंगू बुखार के लक्षण आम बुखार से थोड़े अलग होते हैं
• डेंगू शॉक सिंड्रोम (DSS) के मरीजों में साधारण डेंगू बुखार और डेंगू हैमरेजिक बुखार के लक्षणें के साथ-साथ बेचैनी महसूस हो
• डेंगू हेमोरेजिक बुखार में उपरोक्त लक्षणों के अलावा प्लेटलेट्स की कमी से शरीर में कहीं से भी खून बहना शुरू हो सकता है, जैसे नाक से, दाँतों व मसूड़ों से, खून की उल्टी व मल में खून आना आदि
• थकावट व कमजोरी है
• नाड़ी कभी तेज और कभी धीरे चलनेलगती है और रक्त चाप (Blood Pressure) एकदम कम हो जाता है
• बुखार बहुत तेज होता है
• सिरदर्द, कमर व जोड़ों में दर्द होता है
• हल्की खाँसी व गले में खराश महसूस होती है

आयुर्वेदिक उपचार :

• धनिया पत्ती (Coriander Leaves)
डेंगू के बुखार से राहत के लिए धनिया पत्ती के जूस को टॉनिक के रूप में पिया जा सकता है। यह बुखार को कम करता है।

• आंवला (Indian Gooseberry)
आंवला में विटामिन सी की उच्च मात्रा होती है जिससे कि शरीर में एब्जॉर्ब करने की क्षमता बढ़ती है। इससे शरीर ज्यादा लौह तत्व एब्जॉर्ब कर पाता है जो कि डेंगू के बुखार को ठीक करने के लिए जरूरी है।

• तुलसी (Basil)
तुलसी के पत्तों को गरम पानी में उबालकर छानकर, रोगी को पीने को दें। तुलसी की यह चाय डेंगू रोगी को बेहद आराम पहुंचाती है। यह चाय दिनभर में तीन से चार बार ली जा सकती है।

• पपीते की पत्ती (Papaya Leaves)
पपीते की पत्तियां, डेंगू के बुखाार के लिए सबसे असरकारी दवा कही जाती है। पपीते की पत्तियों में मौजूद पपेन एंजाइम (papain enjymes) शरीर की पाचन शक्ति को ठीक करता है, साथ ही शरीर में प्राटीन को घोलने का काम करता है। डेंगू के उपचार के लिए पपीते की पत्तियों का जूस निकाल कर एक एक चम्मच करके रोगी को दें। इस जूस से प्लेटलेट्स की मात्रा तेजी से बढ़ती है।

• बकरी का दूध (Goat Milk)
डेंगू बुखार के लिए एक और बुहत प्रभावशाली दवा है बकरी का दूध। बहुत कम होचुकी प्लेटलेट्स को भी बकरी का दूध तुरंत बढ़ाने की क्षमता रखता है। डेंगू के उपचार के लिए रोगी को बकरी का कच्चा दूध थोड़ा-थोड़ा करके पिलाएं, इससे प्लेटलेट्स बढ़ेंगे और जोड़ों के दर्द में भी आराम मिलेगा।

• चिरायता (Chirayta)
चिरायता में बुखार को ठीक करने के गुण होते हैं। डेंगू के बुखार को भी चिरायता के इस्तेमाल से ठीक किया जा सकता है।

• धतूरा (Dhatura)
धतूरे की पत्तियों में डेंगू के बुखार को ठीक करने के गुण होते हैं, लेकिन इसकी खुराक 2 डेसीग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए।

• मेथी के पत्ते (Fenugreek Leaves)
मेथी के पत्ते भी डेंगू के बुखार को ठीक कर सकते हैं। मेथी के पत्तों को पानी में उबालकर हर्बल चाय के रूप में इसका पयोग किया जा सकता है। मेथी से शरीर के विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं जिससे डेंगू के वायरस भी खत्म होते हैं।

• अनार और काले अंगूर (Pomegranate and Black Grapes)
डेंगू बुखार में रक्त की कमी को पूरा करने और प्लेटलेट्स के स्तर को बढ़ाने के लिए अनार और काले अंगूर का रस पीना चाहिए।

• संतरे का जूस (Orange juice)
विटामिन सी से भरपूर संतरा, पाचन शक्ती को बढ़ावा देता है साथ ही शरीर का इम्यूनिटी भी बढ़ाता है। ऐसे में डेंगू रोगी को जल्द से जल्द स्वस्थ होने के लिए संतरे के रस का सेवन करना चाहिए।

बचाव :

डेंगू की रोकथाम (Treatment of Dengue)

• साधारण डेंगू बुखार का इलाज घर पर ही हो सकता है। मरीज को पूरा आराम करने दें। उसे हर छह घंटे में पैरासिटामोल (Paracetamol) दें और बार- बार पानी और तरल चीजें ( नीबू पानी, छाछ, नारियल पानी आदि ) पिलाएं।
• बच्चों का खास ख्याल रखें।
• बुखार कम होने के बाद भी एक-दो दिन में एक बार प्लेटलेट्स काउंट टेस्ट जरूर कराएं। डेंगू में मरीज के रक्तचाप, खासकर ऊपर और नीचे के रक्तचाप के अंतर पर लगातार निगरानी ( दिन में 3-4 बार ) रखना जरूरी है। दोनों रक्तचाप के बीच का फर्क 20 डिग्री या उससे कम हो जाए तो स्थिति खतरनाक हो सकती है। रक्तचाप गिरने से मरीज बेहोश हो सकता है। बच्चों में डेंगू की रोकथाम (Treatment of Dengue in Kids)

• बच्चे नाजुक होते हैं और उनका इम्यून सिस्टम (Immune System of Kids) कमजोर होता है इसलिए बीमारी उन्हें जल्दी पकड़ लेती है। ऐसे में उनकी बीमारी को नजरअंदाज न करें।
• बच्चे खुले में ज्यादा रहते हैं इसलिए इन्फेक्शन होने और मच्छरों से काटे जाने का खतरा उनमें ज्यादा होता है।
• बच्चों घर से बाहर पूरे कपड़े पहनाकर भेजें।
• मच्छरों के मौसम में बच्चों को निकर व टी – शर्ट न पहनाएं।
• रात में मच्छर भगाने की क्रीम लगाएं।
• अगर बच्चा बहुत ज्यादा रो रहा हो, लगातार सोए जा रहा हो, बेचैन हो, उसे तेज बुखार हो, शरीर पर रैशेज हों, उलटी हो या इनमें से कोई भी लक्षण हो तो फौरन डॉक्टर को दिखाएं।
• आमतौर पर छोटे बच्चों को बुखार होने पर उनके हाथ – पांव तो ठंडे रहते हैं लेकिन माथा और पेट गर्म रहते हैं इसलिए उनके पेट को छूकर और रेक्टल टेम्प्रेचर लेकर उनका बुखार चेक किया जाता है। बगल से तापमान लेना सही तरीका नहीं है, खासकर बच्चों में। अगर बगल से तापमान लेना ही है तो जो रीडिंग आए, उसमें 1 डिग्री जोड़ दें। उसे ही सही रीडिंग माना जाएगा।
• बच्चे को डेंगू हो तो उसे अस्पताल में रखकर ही इलाज कराना चाहिए क्योंकि बच्चों में प्लेटलेट्स जल्दी गिरते हैं और उनमें डीहाइड्रेशन (पानी की कमी) भी जल्दी होता है।

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