लगातार लूज मोशन यानि पतला दस्त आना, उल्टी होना डायरिया कहलाता है। डायरिया वायरल, बैक्टेरियल संक्रमण के कारण तो होता ही है लेकिन सबसे कॉमन कारण है खान-पान में गड़बड़ी, प्रदूषित पानी और आंत की गड़बड़ी। दिन में अगर तीन से अधिक बार पानी के साथ पतला दस्त हो रहा हो तो यह डायरिया का लक्षण है।
डायरिया में शरीर में पानी की कमी हो जाती है जिसे डिहाइड्रेशन कहते हैं जो काफी गंभीर होता है। इससे शरीर कमजोर हो जाता है, शरीर में संक्रमण फैलने का खतरा काफी बढ़ जाता है। समय पर इलाज नहीं होने पर मरीज की जान भी जा सकती है।
आम तौर पर डायरिया 3 से 7 दिनों तक परेशान करता है। डायरिया वैसे तो कभी भी हो सकता है, लेकिन बरसात में वायरल डायरिया ज्यादा परेशान करता है। इसकी वजह गंदा पानी और खाना-पीना है। डायरिया अचानक हो जाता है और कोर्स पूरा होने के बाद ही खत्म होता है। पेट में ज्यादा एसीडिटी बनने से भी डायरिया होती है। यह सभी उम्र के लोगों को परेशान करता है। एक्यूट डायरिया (Acute Diarhea) वयस्कों को साल भर में एक बार और बड़े बच्चों को दो बार होता है। इस बीमारी में सबसे ज्यादा खतरा डिहाइड्रेशन से होता है, जिसमें शरीर से सारा पानी और खत्म हो जाता है। आंत में पानी जाने से पहले ही वो पास हो जाता है।
कारण :
• वायरल डायरिया (Viral Diarrhea)
वायरल इंफेक्शन से सबसे ज्यादा डायरिया होता है। इसके लक्षण कभी सामान्य तो कभी काफी गंभीर हो जाते हैं। पतला दस्त, लूज मोशन, पेट में मरोड़ आना और बुखार इसके सामान्य लक्षण हैं। वायरल डायरिया 3 से 7 दिन तक रहता है।
• रोटावायरस (Rotavirus)
नवजात बच्चों में रोटावायरस वायरल संक्रमण से वायरल डायरिया का खतरा रहता है। इससे बचने के लिए बच्चों को एंटी रोटावायरस इंजेक्शन भी लगाया जाता है।
• नोरोवायरस (Norovirus)
यह वायरल डायरिया वयस्कों और स्कूल जाते बच्चों को सबसे ज्यादा परेशान करता है। नर्सिंग होम, डे केयर सेंटर और रेस्टोरेंट में इसके संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।
• एडेनोवायरस(Adenovirus)
यह वायरल संक्रमण हर उम्र के लोगों को होता है।
• बैक्टीरियल संक्रमण से डायरिया (Bacterial infections)
बैक्टीरियल संक्रमण से हुआ डायरिया काफी सीरियस होता है। बैक्टीरियल संक्रमण प्रदूषित पानी, भोजन, फूड प्वाइजनिंग से होती है। बैक्टीरियल संक्रमण से हुई डायरिया में लगातार उल्टी आना, लगातार लूज मोशन होते रहना, दस्त के साथ सिर्फ पानी आने की शिकायत से मरीज की हालत काफी गंभीर हो जाती है। बैक्टीरियल संक्रमण से पेट में गैस भी बन जाती है। गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण में कभी-कभी दस्त के साथ खून, पोटा और आंव भी आती है।
और भी हैं कई वजह (Some more causes)
• आंतों में सूजन के बाद भी डायरिया होता है
• ई-कोलाई के संक्रमण से भी डायरिया होता है
• अल्कोहल सेवन के साइड इफेक्ट में भी डायरिया होता है
• डायबिटीज के मरीज को भी डायरिया की शिकायत रहती है
• रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी में भी डायरिया की शिकायत होती है
• किसी खास एंटीबायोटिक्स के सेवन से भी डायरिया होता है, खासकर वैसे एंटी बायोटिक्स जो आंत पर प्रभाव डालते हैं
• परजीवी जो प्रदूषित पानी और खाने के जरिए हमारे पेट में जाता है, वो हमारे पाचन तंत्र को बिगाड़ देता है और जिससे डायरिया की शिकायत होती है
• कैंसर की दवा, वजन घटाने की दवा, ब्लड प्रेशर की दवा के साइड इफेक्ट की वजह से भी डायरिया होता है
• एलर्जी से भी डायरिया होती है, खासकर वैसे चीज खाने से मसलन- आर्टिफिशियल स्वीटनर या दूध में लैक्टोज की मात्रा रहने से डायरिया हो सकता है।
लक्षण :
• आंतों में सूजन से हुआ डायरिया
• पतला दस्त या लूज मोशन (पानी की तरह) अगर दो हफ्ते तक रहे।
• दस्त के साथ खून, आंव और पोटा आता है। इससे शरीर काफी कमजोर हो जाता है।
• उल्टी, मितली आने के साथ पतला दस्त आता है। यह पेट और आंत में एसिडिटी बनने से होता है।
आयुर्वेदिक उपचार :
• दही (Yogurt)
दही में मौजूद बैक्टीरिया, शरीर में मौजूद विषैले बैक्टीरिया का नाश कर, डायरिया से बचाते हैं। डायरिया के उपचार के लिए दो कटोरी दही खाने से ही बेहद आराम मिलता है। सादे चावल में दही मिलाकर भी खाई जा सकती है।
• अदरक (Ginger)
अदरक का प्रयोग फूड पॉइजनिंग (food poisoning) होने पर भी किया जाता है, ऐसे में डायरिया से राहत देने में भी अदरक काफी प्रभावशाली है। अदरक के प्रयोग से पेट की ऐंठन (stomach cramps) और दर्द से भी राहत मिलती है। उपचार के लिए अदरक को कद्दूकस करके, उसमें शहद (honey) मिलाकर खाएं। इसके तुंरत बाद पानी न पीएं। अदरक की चाय (बिना दूध की) भी काफी आराम देती है।
• मेथी दाना (Methidana)
डायरिया के इलाज के लिए मेथी दाना बेहद फायदेमंद बताया गया है। एक छोटी चम्मच मेथी दाना को चबाकर, एक बड़ी चम्मच दही खाने से डायरिया से निजात मिलती है। इसके अलावा एक चम्मच मेथी दाना और जीरा (cumin) को भून कर पाउडर बना लें और दो बड़ी चम्मच दही में मिलाकर खाएं। इस मिश्रण को दिन भर में तीन बार खाने से बेहद आराम मिलता है।
• सेब का सिरका (Apple cider vinegar)
सेब का सिरका भी डायरिया में बेहद फायदेमंद है। सेब के सिरके का एसिडिक गुण, डायरिया के बैक्टीरिया को खत्म कर देता है। उपचार के लिए एक गिलास पानी में एक चम्मच सिरका मिलाएं और पी लें। इस मिश्रण को एक दिन में दो से तीन बार तब तक पीएं जब तक डायरिया ठीक न हो जाए।
• केला (Banana)
केले में काफी मात्रा में पैक्टिन तत्व (pectin content) और पौटेशियम होता है, इसलिए डायरिया में केला खाने की सलाह दी जाती है। डायरिया होने पर दो से तीन पके हुए केला रोज खाएं।
• कैमोमाइल चाय (Chamomile tea)
कैमोमाइल डायरिया के उपचार में बेहद फायदेमंद है। डायरिया के उपचार के लिए कैमोमाइल की चाय बनाकर पीएं।
• सफेद चावल (White rice)
सादा, सफेद गीले चावल भी डायरिया के दौरान खाने की सलाह दी जाती है। इस तरह के चावल सुपाच्य होते हैं। इस तरह के चावल खाने से दस्त कम आते हैं। सादा चावल को थोड़ा गीला करके खाएं। स्वाद के लिए चावल में दही मिलाकर खा सकते हैं।
• गाजर का सूप (Carrot soup)
गाजर का सूप भी डायरिया में बेहद फायदेमंद है। डायरिया के दौरान शरीर में हुई पोषक तत्वों (nutrients) की कमी को पूरा करने के साथ ही गाजर का सूप इम्यूनिटी (immunity) को मजबूत करता है। सूप बनाने के लिए, गाजर को काट कर उबाल लें और जब गाजर उबलकर पानी में घुल जाए तब, पानी को छान कर अलग करा लें। इसमें स्वादानुसार नमक, भुना जीरा और कालीमिर्च पाउडर मिलाएं।
बचाव :
इलाज और देखभाल (Treatment and Care for Diarrhea)
डायरिया का इलाज घर पर भी संभव है लेकिन जब पतले दस्त लगातार आते रहें, दस्त के साथ सिर्फ पानी आए और शरीर में पानी की कमी हो जाए तो डॉक्टर के पास जाना ही उचित रहता है। दो से तीन दिन तक डायरिया रहता है तो इससे डिहाइड्रेशन हो जाता है और मरीज की स्थिति काफी गंभीर हो जाती है। डायरिया का इलाज सिर्फ पथ्य और परहेज से ही होता है और डिहाइड्रेशन में मरीज को इलेक्ट्रोलाइट्स और सेलाइन (ग्लूकोज पानी) सूई के जरिए चढ़ाना पड़ता है। डायरिया होने पर ज्यादा से ज्यादा इलेक्ट्रोलाइट्स पानी, ओआरएस घोल पीते रहना चाहिए ताकि डिहाइड्रेशन न हो।
चिकित्सकीय इलाज (Medical Treatment for Diarrhea)
आइवी फ्लूयड्स (IV Fluids)
डायरिया में डिहाइड्रेशन होने पर मरीज को डॉक्टर नस के जरिए आइवी फ्लूयड्स चढ़ाते हैं। इससे शरीर में पानी की कमी दूर होती है। जो मरीज डिहाइड्रेशन के बाद कुछ भी खाने-पीने में असक्षम हो जाते हैं उसे आइवी फ्लूयड्स चढ़ाया जाता है। इसमें दवाई भी होती है और इलेक्ट्रोलाइट्स भी होता है। आइवी फ्लूयड्स चढ़ने के बाद मरीज काफी अच्छा फील करता है।
एंटी बायोटिक्स (Antibiotics)
वायरल संक्रमण से हुए डायरिया में संक्रमण को खत्म करने के लिए डॉक्टर मरीज को बायोटिक्स देते हैं। बैक्टेरियल संक्रमण में भी डॉक्टर मरीज को एंटीबायोटिक देते हैं। ई- कोलाई संक्रमण से हुए डायरिया में भी रोगी को एंटीबायोटिक दिया जाता है।
डायरिया की दवा (Diarrhea Medications)
डायरिया से लिए खासकर दस्त को रोकने के लिए एंटी-डायरल दवाएं दी जाती है। लोप्रामाइड एंटी डायरल दवा होती है जो आंत के मूवमेंट को ठीक करती है।
टिप्स (Tips to Prevent Diarrhea)
• डायरिया होने पर तेल-मसालों वाले खाने से परहेज करना चाहिए।
• डायरिया में दूध या दूध से बने पदार्थ नहीं खाना चाहिए, मरीज की हालत और बिगड़ जाती है।
• केले, चावल, सेब का मुरब्बा और टोस्ट का मिश्रण जिसे ब्राट कहते हैं, इसके सेवन से डायरिया में राहत मिलती है।
• कच्चा केला और चावल आंतों की गति को नियंत्रित करने और दस्त रोकने में सहायता करते हैं।
• पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लें लेकिन अगर फिर भी डायरिया बढ़ रहा हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
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