ग्लूकोमा, काला मोतिया या कांच बिंदु रोग, तंत्र में गंभीर एवं निरंतर क्षति करते हुए धीरे-धीरे दृष्टि को समाप्त ही कर देता है। किसी वस्तु से प्रकाश की किरणें आंखों तक पहुंचती हैं, व उसकी छवि दृष्टि पटल (Retina) पर बनाती है। रेटिना से यह सूचना विद्युत तरंगों द्वारा मस्तिष्क तक नेत्र तंतुओं द्वारा पहुंचाई जाती है। आंख में एक तरल पदार्थ भरा होता है यह तरल पदार्थ आंख के गोले को चिकना किए रहता है यदि इस तरल पदार्थ का रिसाव रुक जाए तो आंख के अंदर का दाब बढ़ जाता है। ग्लूकोमा में अंतर नेत्र पर दाब, प्रभावित आंखों की दाब सहने की क्षमता से अधिक हो जाता है, इसके परिणामस्वरूप नेत्र तंतु को क्षति पहुंचती है, जिससे दृष्टि चली जाती है।
किसी वस्तु को देखते समय ग्लूकोमा से ग्रसित व्यक्ति को केवल वस्तु का केंद्र दिखाई देता है। समय के साथ स्थिति बद से बदतर होती जाती है। सामान्यत: लोग इस पर बहुत कम ही ध्यान देते हैं, लेकिन जब ध्यान देते हैं तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। सामान्य तौर पर यह रोग बिना किसी लक्षण के विकसित होता है व दोनों आंखों को एक साथ प्रभावित करता है। हालांकि यह रोग 40 वर्ष से अधिक आयु के व्यस्कों के बीच पाया जाता है, फिर भी कुछ मामलों में यह नवजात शिशुओं को भी प्रभावित कर सकता है। मधुमेह, आनुवांशिकता, उच्च रक्तचाप व हृदय रोग इस रोग के प्रमुख कारणों में से हैं। विश्व स्तर पर काला मोतिया लगभग छह करोड़ लोगों को प्रभावित करता है और भारत में यह अंधत्व का दूसरा सबसे कारण है।
ग्लूकोमा के प्रकार (Types of Glaucoma)
काला मोतिया रोग मुख्यत: दो प्रकार का होता है- प्राथमिक खुला कोण और बंद कोण कांच बिंदु। इसके अलावा यह सेकेंडरी भी हो सकता है। बच्चों को होने वाला काला मोतिया भी एक प्रकार में अलग से रखा गया है, जिसे कंजनाइटल ग्लूकोमा कहते हैं।
प्राथमिक खुला कोण
इस प्रकार के कांच बिंदु में आंख की तरल निकासी नली धीरे-धीरे बंद होती जाती है। तरल निकासी प्रणाली ठीक ढंग से कार्य नहीं करने के कारण आंख का आंतरिक दाब बढ़ जाता है। यहां हालांकि, तरल-निकासी नली का प्रवेश प्राय: काम कर रहा होता है एवं अवरुद्ध नहीं होता, किंतु रूकावट अंदर होती है एवं द्रव बाहर नहीं आ पाता है। इस कारण आंख के अंदर दबाव में वृद्धि होती है।
कोण बंद
यह एक तीव्र प्रकार का कांच बिंदु होता है। इस स्थिति में आंखों में दबाव तेजी से बढ़ता है आईरिस एवं कार्निया की चौड़ाई कम होती है, परिणामस्वरूप तरल-निकासी नली के आकार में कमी होती है। व्यस्कों में परिधीय दृष्टि की हानि होती है और कुंडल या इंद्रधनुष-रंग के गोले या रोशनी दिखाई देती है उनकी दृष्टि मटमैली या धुंधली हो जाती है। रोगी आंख में दर्द एवं लालिमा अनुभव करते हैं तथा दृष्टि का क्षेत्र इतना कम होता है कि रोगी स्वतंत्र रूप से नहीं चल भी नहीं पाते हैं। जब भी आंखों की चोट के बाद दर्द या दृष्टि में कमी हो तो यह रोग होने की संभावना होती है। मधुमेह के रोगी भी कांच बिंदु से पीड़ित हो सकते हैं।
कंजनाइटल ग्लूकोमा
कंजनाइटल ग्लूकोमा शिशुओं एवं बच्चों में जन्मजात होता है इसके लक्षणों में लालिमा, पानी आना, आँखों का बड़ा होना, कार्निया का धुंधलापन एवं प्रकाश भीति शामिल है।
कारण :
मानव आंख में स्थित कार्निया के पीछे आंखों को सही आकार और पोषण देने वाला तरल पदार्थ (Aqueous Humor Fluid) होता है, लेंस के चारों ओर स्थित सीलियरी उत्तक इस तरल पदार्थ को लगातार बनाते रहते हैं यह तरल पदार्थ पुतलियों के द्वारा आंखों के भीतरी हिस्से में जाता है इस तरह से आंखों में इस तरल पदार्थ का बनना और बहना लगातार होता रहता है।
स्वस्थ आंखों के लिए यह आवश्यक है आंखों के भीतरी हिस्से में कितना दबाव रहे यह तरल पदार्थ की मात्र पर निर्भर रहता है। ग्लूकोमा रोगियों की आंखों में इस तरल पदार्थ का दबाव अत्यधिक बढ़ जाता है कभी-कभी आंखों की बहाव नलिकाओं का मार्ग रूक जाता है, लेकिन सीलियरी ऊतक इसे लगातार बनाते ही जाते हैं, ऐसे में जब आंखों में दृष्टि-तंतु के ऊपर तरल का दबाव अचानक बढ़ जाता है तो ग्लूकोमा हो जाता है। यदि आंखों में तरल का इतना ही दबाव लंबे समय तक बना रहता है तो इससे आंखों के तंतु भी नष्ट हो सकते हैं। समय रहते यदि इस बीमारी का इलाज नहीं कराया जाता है तो इससे दृष्टि पूरी तरह जा सकती है।
लक्षण :
• टयूबलाइट या बल्ब की रोशनी चारों ओर से धुंधली दिखने लगती है, आंखों में तेज दर्द भी होने लगता है।
• धुंधलापन, कई रोगियों को रात में दिखना भी बंद हो जाता है
• मितली या उलटी होना
• सिरदर्द
बचाव :
• खाने में पालक ज्यादा खाएं
• विटामिन ए आंखों के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। ऐसे खाद्य पदार्थ खाएं जिनसे विटामिन ए की पूर्ति हो।
• सौंफ भी स्वस्थ आंखों के लिए अच्छा घरेलू नुस्खा है।
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