रूबेला में व्यक्ति के शरीर पर तेजी से छोटे छोटे दाने उभर आते हैं। रूबेला का संक्रमण व्यक्ति के शरीर में दाने उभरने के एक सप्ताह पहले से दाने खत्म होने के बाद तक रह सकता है। रूबेला में सिर के बीच से या कानों के पीछे से दानों की शुरूआत होती है। इसके बाद धड़ और हाथ पैर पर दाने उभरते हैं। तीन से चार दिन में दाने सूख जाते हैं। कुछ लोगों को इस दौरान दस्त और उल्टी भी हो सकती है।

कारण :

रूबेला का कारण, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना ही है। संकमित व्यक्ति के खांसने और छींकने से रोग के जीवाणु हवा में तैरने लगते हैं और इसके संपर्क में आने वाले किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकते हैं। छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं या ऐसा कोई भी व्यक्ति जिसकी इम्यूनिटी कम हो, रूबेला का शिकार हो सकता है। रूबेला से पीड़ित व्यक्ति में कई जटिलताएं भी हो सकती हैं, खासकर गर्भवती महिला के शिशु में

• मोतियाबिंद
• बहरापन
• शरीर के कई अंगों में डिफेक्ट
• मानसिक रूप से कमजोरी
• सामान्य शारीरिक विकास न होना
• उंगलियों और घुटनों में अर्थराइटिस के लक्षण आना

लक्षण :

• गाल के अंदर नीले या भूरे धब्बे नजर आना
• जलन के साथ लाल आंखें
• नाक का बंद होना
• निरंतर खांसी बने रहना,
• मांसपेशियों में ऐंठन और अकड़न महसूस होना
• सिर दर्द होना,
• शरीर पर लाल-गुलाबी, छोटे दानों का उभरना
• बुखार

बचाव :

टिप्स (Tips to Prevent German Measles)

• शरीर को पूरी तरह से आराम दें।
• दोस्तों, सहकर्मियों, खासकर गर्भवती महिलाओं को अपनी बीमारी के बारे में बताएं और खुद से दूर रहने की सलाह दें।
• ऐसे लोगों से भी दूर रहें जिनकी इम्यूनिटी कमजोर हो।
• संक्रमित व्यक्ति अपने इस्तेमाल की सभी चीजें दूसरे लोगों से दूर रखे।
• दूसरे लोगों को संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से बचना चाहिए। साथ ही रोगी को खुद भी इस संबंध में सावधानी रखनी चाहिए।

उपचार (Treatment of German measles)

• पानी में नींबू डालकर पीएं।
• नारियल का पानी पीएं।
• लिकोरेसी की जड़ के पाउडर में शहद मिलाकर रोगी को चटाएं।
• नीम की पत्तियों को डालकर पानी गरम करें, इस पानी से संक्रमित व्यक्ति को स्नान कराएं।
• लहसुन की कलियों को पीसकर उसमें शहद मिलाकर, रोगी को चटाएं।
• आंवला पाउडर को पानी के साथ मिलाकर, इस पानी से शरीर पोंछे।
• जौ के पानी में बादाम के तेल की कुछ बूंदे डालकर पीएं।

ध्यान रखने योग्य बातें (Precautions for german measles)

• रोगी को एकांत कमरे में रखें, जहां घर के अन्य सदस्य कम जाते हों।
• रोगी को गरम पानी पीने को देते रहें। खासकर सुबह खाली पेट जरूर गरम पानी पीने को दें।
• रोगी को समय-समय पर तरह तरह के जूस पीने को दें।
• इम्यूनिटी बढ़ाने वाला खाना, फल और सब्जियां खाने को दें।
• रोगी को सूरज की रोशनी से बचा के रखें।
• दूध या दूध से बने अन्य खाद्य पदार्थ रोगी को न दें।
• रोगी का कमरा हमेशा साफ और हवादार रखें।

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