पाचन तंत्र में किसी गड़बड़ी के कारण भोजन न पचने को अपच या अजीर्ण (Indigestion) कहते हैं। यह खुद में कोई रोग नहीं है परन्तु इसके कारण कई गंभीर रोग हो सकते है या यह किसी गंभीर रोग का लक्षण हो सकता है। यदि अपच वाली स्थिति काफी दिनों तक बराबर बनी रहती है तो शरीर में खून का बनना बंद हो जाता है और व्यक्ति धीरे-धीरे कमजोर होता जाता है। इसलिए इस रोग को साधारण नहीं समझना चाहिए।
कारण :
कई बार समय-असमय भोजन करने से,कभी-भी,कहीं-भी,कुछ-भी खाने-पीने तथा बार-बार खाते रहने से पहले खाया हुआ भोजन ठीक से पच नहीं पाता है और दूसरा भोजन पेट में पहुँच जाता है। ऐसे में पाचन तंत्र भोजन को पूर्ण रूप से नहीं पचा पाता जो अजीर्ण का मुख्य कारण है।
अपच पेट के कुछ खास रोगों के कारण भी हो हो सकता है जैसे कि :
• अल्सर (Ulcer)
• गर्ड
• पेट के कैंसर
• गैस्ट्रोपॉरेसिस (Gastroparesis यह अक्सर मधुमेह रोगियों में होता है)
• पेट का संक्रमण
• चिड़चिड़ा आंत्र सिंड्रोम
• पुरानी अग्न्याशयशोथ (Chronic Pancreatitis)
• थायराइड रोग (Thyroid)
कुछ खास दवाएं भी अपच का कारण बन सकती हैं, जैसे कि:
• एस्पिरिन (Aspirin) और कई अन्य दर्द निवारक गोलियाँ
• एस्ट्रोजन और मौखिक गर्भ निरोधक
• स्टेरॉयड दवाएं (Steroids)
• कुछ एंटीबायोटिक दवाएं (Antibiotic)
• थायराइड दवाएं
कुछ जीवनशैली संबंधित आदतें भी अपच के लिए जिम्मेदार होती हैं जैसे:
• उच्च वसा वाले खाद्य पदार्थ खाने, बहुत ज्यादा भोजन, या तनावपूर्ण स्थितियों के दौरान खाना खाना
• बहुत ज्यादा शराब पीना
• सिगरेट धूम्रपान
• तनाव और थकान
लक्षण :
• अपच होने पर भूख नहीं लगती
• कभी-कभी रोगी को घबराहट भी हो जाती है
• खट्टी-खट्टी डकारें आती हैं
• छाती में तेज़ जलन होती है
• जी मिचलाता है
• जीभ पर मैल जम जाना, पेट फूलना आदि भी अजीर्ण रोग के प्रमुख लक्षण हैं
• नींद भी नहीं आती और कभी-कभी दस्त भी होता है
• पेट फूल जाता है, जी मिचलाता है और कब्ज की शिकायत हो जाती है
• पेट में गैस बनना
• पेट में भारीपन महसूस होता है
• भोजन हजम नहीं होता
• मुंह में बार बार पानी भर जाता है तथा पेट में हर समय हल्का-हल्का दर्द होता रहता है
• रोगी को पसीना अधिक आता है
• सांस में दुर्गंध निकलना
आयुर्वेदिक उपचार :
• सेब का सिरका (Apple cider vinegar)
सेब के सिरके में यूं तो एसिडिक गुण होते हैं लेकिन यह एसिड से राहत देने में भी प्रभावी है। अपच से राहत के लिए एक चम्मच कच्चे और अनफिल्टर्ड सेब के सिरके को एक कप पानी में मिलाएं। इसके बाद इसमें एक चम्मच कच्चा शहद मिलाएं। इस पेय को दिन में दो से तीन बार पीएं। अपच से राहत मिलेगी।
• सौंफ (Saunf)
अपच से बचाव के लिए सौंफ भी बेहद गुणकारी है। बहुत मसालेदार और वसा वाले खाने से होने वाली अपच को बेहद जल्दी ठीक कर देती है। अपच से बचाव के लिए सौंफ के दानों को तवे पर हल्का सा गर्म करें और उसका पाउडर बना लें। पानी के साथ इस पाउडर को दिन में दो बार लें। सौंफ के दानों से तैयार चाय या सौंफ को यूं ही मुंह में डालकर चबाने से भी अपच से राहत मिलती है। साथ ही यह माउथ फ्रेशनर की तरह काम भी करती है।
• अदरक (Ginger)
अदरक में मौजूद पाचन रस और एंजाइम खाने को पचाने में बेहद लाभकारी हैं। अपच से राहत के लिए अदरक के छोटे छाटे टुकड़ों पर नमक डालकर उन्हें यूं ही चबाया जा सकता है। इसके अलावा दो चम्मच अदरक के रस में नींबू का रस, थोड़ा सा काला और थोड़ा सा सफेद नमक मिलाकर बिना पानी के पीने से बेहद राहत मिलती है।
इसके अलावा अदरक के रस और शहद को गुनगुने पानी के साथ भी लिया जा सकता है। अदरक की चाय भी बेहद लाभकारी होती है। इतना ही नहीं खाना बनाने में अदरक का प्रयोग मसाले के तौर पर करने से भी अदरक बेहद लाभ देता है।
• बेकिंग सोडा (Baking Soda)
अपच से बचने के लिए बेकिंग सोडा सबसे आसान घरेलू उपाय है। आधे गिलास पानी में थोडा़ सा बेकिंग सोडा मिलाकर इस पानी को पीएं। इससे तुरंत राहत मिलती है।
• अजवायन (Ajwain)
अजवायन पेट को दुरूस्त रखने और खाने को पचाने के साथ ही पेट दर्द से भी राहत देती है। सौंठ और अजवायन को मिलाकर पाउडर बनाएं। एक चम्मच पाउडर में काली मिर्च मिलाएं और गर्म पानी के साथ पीएं। इस पेय को दिन में एक या दो बार पी सकते हैं। अजवायन के दानों को मुंह में रखकर चबाने से भी आराम मिलता है।
• हर्बल चाय (Herbal Tea)
पुदीना या कैमोमाइल की हर्बल या ग्रीन टी भी पाचन शक्ति को दुरूस्त रखती है। खाना खाने के बाद एक कप हर्बल टी पीने से खाना जल्दी पचता है और पेट में वसा भी जमा नहीं होती। ऐसे में आपका वजन भी ठीक रहता है। लेकिन खाने के बाद सामान्य चाय या कॉफी से बचना चाहिए।
• नमकीन छाछ (Salted Buttermilk)
खाने के साथ नमकीन छाछ का इस्तेमाल भी आपकी पाचन शक्ति को बढ़ाता है। रात के समय दही की जगह छाछ में काला नमक और भुना हुआ जीरा डालकर पीएं। पेट में जलन से भी राहत मिलेगी। इतना ही नहीं सुबह नाश्ते में और दोपहर के खाने में भी छाछ का इस्तेमाल सर्वोत्तम है। गर्मियों के दिनों में यह पेट के साथ ही पूरे शरीर के लिए भी फायदेमंद है।
बचाव :
• मिर्च, मसाले, गरिष्ठ भोजन, मछली, शराब, अंडा, आदि का सेवन न करें।
• हरी सब्जियां जैसे – मूली, पालक, मेथी, लौकी, तोर, परवल आदि का सेवन करें।
• रेशे वाली चीजें अधिक मात्रा में खाएं।
• चोकर वाले आटे की रोटी खाएं।
• रात्रि के भोजन के बाद थोड़ा बहुत जरूर टहलें।
• धूम्रपान छोड़ दें।
• मादक पेय पदार्थों से बचें।
• यदि अजीर्ण पुराना हो तो गेहूं की दलिया, मूंग की दाल, छाछ, पतली रोटी आदि के सिवाय और कुछ न खाएं।
• दिन में चार-पांच गिलास पानी जरूर पिएं| जाड़े की ऋतु में गुनगुना पानी पी सकते हैं।
• फ्रिज में रखा भोजन, साग-सब्जी, दाल आदि न खाएं। सदैव ताजा तथा पौष्टिक भोजन करें।
• मन में क्रोध, ईर्ष्या, तनाव, आदि नकारात्मक विचारों को बिलकुल न आने दें। मन के विचारों का सीधा प्रभाव पेट पर पड़ता है।
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