ऑस्टियोपोरोसिस में अस्थि खनिज घनत्व (BMD) कम हो जाता है, हड्डियां खोखली व कमजोर पड़ने लगती हैं और हल्का दबाव पड़ने पर टूट जाती हैं| ऐसी स्थिति में हड्डी का फिर से जुड़ना मुश्किल हो जाता है। ऑस्टियो आर्थराइटिस में कार्टिलेज (Cartilage) अपनी इलास्टिसिटी (Elasticity) खो देता है।
महिलाओं में होती हैं अधिक समस्या
पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में यह बीमारी ज्यादा पाई जाती है। उम्र के साथ साथ महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजोन का स्तर का घटता जाता है और उनमें ऑस्टियोपोरोसिस होने की आशंका बढ़ने लगती है। रजोनिवृत्ति वाली प्रत्येक तीसरी महिला इस बीमारी से पीड़ित है। बीमारी होने के दौरान इसका जल्द पता नहीं चलता। जब हड्डियों में तकलीफ होती है तो डॉक्टर को दिखाने के बाद पता चलता है कि वे ऑस्टियोपोरोसिस बीमारी से ग्रस्त हैं।
कारण :
• वंशानुगत – अगर पारिवारिक इतिहास हो तो इस बीमारी के होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
• डाइट- ऐसी डाइट लेना जिसमें जिसमें प्रोटीन और कैल्शियम की कमी हो वह भी ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) को बढ़ावा देती है।
• डायबीटीज, थाइराइड जैसी बीमारियों की दवाई कैल्शियम का अधिक अवशोषण (Absorption) करती है, यह चीज भी कई बार बीमारी को बुलावा देती है।
• छोटे बच्चों का बहुत ज्यादा सॉफ्ट डिंक्स पीना भी एक कारण है।
• आरामपसंद- जिनकी दिनचर्या ज्यादा क्रियाशील ना हो, उनको भी इस बीमारी से खतरा होता है।
• सिगरेट/ शराब सेवन- नशायुक्त व्यक्तियों में कैल्शियम ग्रहण करने की क्षमता कम होती है। ऐसे लोगों को भी यह रोग हो सकता है।
• वजन- जो अत्यधिक दुबले होते हैं उन्हें भी इस बीमारी से बचकर रहना चाहिए।
• बढ़ती उम्र – 50 वर्ष से अधिक के पुरुष व महिला को इसका जोखिम अधिक होता है।
• दवाइयों का सेवन- ऐसी बीमारियाँ जहाँ मरीज को स्टेराइड व हार्मोन की दवाइयाँ लेनी पड़े, उन दवाइयों के कारण भी कई बार यह बीमारी सामने आ जाती है।
लक्षण :
• अगर बहुत जल्दी थक जाते हों
• खासकर सुबह के वक्त कमर में फैला हुआ दर्द हो
• शरीर में बार-बार दर्द होता हो
• समस्या बढ़ने पर छोटी-सी चोट फ्रैक्चर की वजह हो सकती है
आयुर्वेदिक उपचार :
•प्रून्स (Prunes)
प्रून्स यानि सूखे प्लम, खाने से हड्डियों की कमजोरी दूर होती है। प्रून्स में मौजूद पोलीफिनोल्स (Polyphenols) हड्डियों को हुए नुकसान की भरपाई करता है। इतना ही नहीं प्रून्स में बोरान (Boron) और तांबा (Copper) जैसे खनिज होते हैं जो कि हड्डियों के लिए जरूरी खनिजों में शामिल हैं।
•सेब (Apple)
सेब में पोलीफिनोल्स (Polyphenols) और फ्लेवनोइड्स (Flavonoids) के साथ ही एंटी ऑक्सीडेंट भी होता है जो कि हड्डियों की सूजन को कम करके उनके घनत्व को बढ़ाता है। इसलिए रोज एक सेब खाने की आदत बनाएं।
•नारियल का तेल (Coconut Oil)
एक्सपर्ट की मानें तो अपने आहार नारियल तेल को शामिल करने से हड्डियों का घनत्व बढ़ता है। साथ ही एस्ट्रोजन की कमी भी पूरी होती है। नारियल के तेल में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट यौगिक हड्डियों के ढांचे को सुरक्षित रखते हैं।
•बादाम का दूध (Almond Milk)
बादाम के दूध में कैल्श्यिम की उच्च मात्रा होती है। इसलिए बादाम का दूध ऑस्टियोपोरोसिस के बेहद अच्छा उपचार है। बादाम के दूध में हड्डियों के लिए जरूरी तत्व मैग्नीशियम, मैगनीज और पौटेशियम भी शामिल होते हैं। ऐसे में रोज एक गिलास बादाम वाला दूध नियमित रूप से पीएं।
•तिल के बीज (Sesame Seeds)
अपने भोजन में तिल के बीज शामिल करने से हड्डियों की कमजोरी दूर होती है। तिल में भी कैल्शियम की उच्च मात्रा होती है, जो कि हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए सबसे जरूरी पोषक तत्व है। इसके साथ ही तिल में मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, मैंगनीज, तांबा (Copper), जस्ता (Zinc) और विटामिन डी भी होता है। उपचार के लिए एक मुट्ठी भुने हुए तिल चबा कर दूध पीएं। इसके अलावा खाने बनाने में भी भुने हुए तिलों को ऊपर से डालकर खाया जा सकता है।
•अनानास (Pine Apple)
अनानास में ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने के लिए जरूरी मैंगनीज शामिल है। मैंगनीज की कमी से हड्डियों का घनत्व कम और हड्डियां पतली हो सकती हैं, ऐसे में अनानास खाने से मैंगनीज की कमी पूरी होती है। उपचार के लिए हर रोज खाना खाने से पहले एक कप अनानास को खाएं। इसके साथ ही अनानास का जूस भी पिया जा सकता है।
•धनिया के बीज (Coriander Seed)
धनिया के पत्ते और बीज दोनों में ही मैग्नीशियम, आयरन, कैल्शियम, पोटेशियम और मैंगनीज आदि पोषक तत्व होते हैं। धनिया के बीजों को गरम पानी में उबालकर कुछ देर ढक कर रखें उसके बाद गुनगुना रहने पर उसमे शहद मिलाकर पीएं। खाने के छौंक में भी धनिया के बीजों का इस्तेमाल किया जा सकता है। हरे धनिया का इस्तेमाल भी खाना बनाने और चटनी के रूप में करना चाहिए।
•इन्हें भी आजमाएं (Tips for Osteoporosis)
• नियमित रूप से व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करें।
• कैल्शियमयुक्त खाने की मात्रा बढ़ाएं। जिसमें दूध, दही, पनीर आदि को खाने में शामिल करें।
• आवश्यक फैटी एसिड भी खाने में शामिल किया जाना जरूरी है।
• धूम्रपान और शराब का सेवन न करें।
• डिब्बाबंद खाने से बचें।
• कैफीन की मात्रा, जैसे चाय, कॉफी और अन्य एनर्जी पेय को कम पीएं।
बचाव :
• भोजन में कैल्शियम के अलावा विटामिन, प्रोटीनयुक्त चीजों खानी चाहिए।
• दूध, दही, पनीर व अंडे का सेवन करना चाहिए।
• नियमित व्यायाम करना चाहिए।
• सुबह की धूप का सेवन लाभदायक होता है।
• शराब और किसी अन्य नशे से दूर रहना चाहिए।
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