सूखा रोग यानि रिकेट्स (Rickets), विटामिन डी की कमी से होता है। यह बच्चों में होने वाला रोग है जिसमें बच्चों की हड्डियां मुलायम हो जाती हैं। कई बार हड्डियां इतनी कमजोर हो जाती हैं कि साधारण दबाव से भी टूट जाती हैं। इसी कारण बच्चों के पैर टेढ़े और स्पाइन असामान्य होकर मुड़ जाती है। इस प्रकार के रोग को बड़ों में अस्थि-मृदुता (Osteomalacia) कहा जाता है।
कैसे होता है रिकेट्स? (About Rickets in Hindi)
विटामिन डी हड्डियों में कैल्शियम और फास्फोरस को अवशोषित करता है ऐसे में विटामिन डी की कमी होने पर शरीर में विटामिन सी और फॉस्फोरस की कमी भी हो जाती है। 3 से 36 महीने तक के बच्चों में रिकेट्स होने का खतरा ज्यादा होता है। इसके अलावा जिनकी त्वचा का रंग काला होता है उन्हें भी रिकेट्स का खतरा बना रहता है क्योंकि ऐसी त्वचा पर धूप का प्रभाव कम पड़ता है।

कारण :

रिकेट्स बीमारी का एक मुख्य कारन विटामिन डी की कमी (Deficiency of Vitamin D) है। आहारनली से कैल्शियम और फास्फोरस के शोषण में सहायता के लिए विटामिन डी जरूरी होता है। बच्चों की हड्डियों में मजबूती के लिए भी कैल्शियम और फास्फोरस की जरूरत होती है, ऐसे में जब शरीर के रक्त में कैल्शियम और फास्फोरस की कमी महसूस होती है तो रक्त इसकी पूर्ति हड्डियों से करता है और अपना संतुलन बनाता है। नतीजतन हड्डियां मुलायम और हड्डियों की संरचना कमजोर हो जाती है।
रिकेट्स के कारण (Causes of Rickets in Hindi)
सूरज की रोशनी ना मिलना (Sun Light)-
सन लाइट विटामिन डी का प्रमुख स्त्रोत है। लेकिन आजकल के माहौल में बच्चे घर के बाहर खेलना पसंद नहीं करते। माता पिता भी बच्चे को इंडोर एक्टिविटी में लगाना ही पसंद करते हैं। ऐसे में बच्चों को सूरज की रोशनी से पर्याप्त विटामिन डी नही मिल पाता।
खाना (Food)- बच्चों को पौष्टिक खान पान ना मिल पाने के कारण भी विटामिन डी की कमी झेलनी पड़ती है। मछली का तेल, अंडे की जर्दी और दूध आदि में भी विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में होता है। अगर बच्चें की डाइट प्लान में यह चीजें ना हों तो उसे रिकेट्स (Rickets) का खतरा हो सकता है।

बचाव :

रिकेट्स से बचने के उपाय (Treatment of Rickets in Hindi)

  • बच्चों को पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी का सेवन कराएं।
  • कुछ देर धूप में रहना भी जरूरी है इसलिये बच्चों को भी सन बाथ दें।
  • खाने पीने पर भी विशेष ध्यान दें। विटामिन सप्लिमेंट लिए जा सकते है साथ ही अंडे की जर्दी, मछली औए दूध का प्रचुर मात्रा में सेवन करें।
  • इसके साथ ही चिकित्सक से भी परामर्श लें। चिकित्सक बच्चे की हड्डियों को दबाकर उनकी नकारात्मकता को देखते हैं।
  • सूखा रोग की परिस्थिति को एक्स रे द्वारा भी जाना जा सकता है। साथ ही यूरिन और रक्त की जांच द्वारा भी बीमारी और उसमें हो रहे सुधार का पता लगाया जा सकता है।
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