दूसरों के लिए सर्वश्रेष्ठ की चाहत करना सीखें जैक पूनन | 12 September 2021हमारा आवेग परमेश्वर को ज़्यादा और ज़्यादा अच्छी तरह से जानना होना चाहिए क्योंकि यही अनन्त जीवन है। हमारा अनन्त कालपरमेश्वर को ज्यादा, और ज़्यादा जानने में बीतने वाला है। इसलिए जिस किसी में परमेश्वर को जानने का आवेग है, उसके लिए अनन्तकाल नीरस नहीं होगा। हमारा पार्थिव जीवन भी फिर नीरस नहीं होगा। आइए, उत्पत्ति के अध्याय 2 में परमेश्वर ने जिस तरह आदम के साथ व्यवहार किया, उसमें से हम परमेश्वर और उसके मार्गों के बारे में कुछ सीखें। वहाँ हम यह पाते हैं कि वह परमेश्वर था जिसने…
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हमारा लक्ष्य परिपक्वता की ओर बढ़ना है जैक पूनन | 22 August 2021रोमियों 8 में आत्मा और जीवन के बारे में बात की गई है। जब हम पवित्र आत्मा की अधीनता के इस जीवन में पहुँच जाते हैं, तब हमारा पिता हमारे जीवन के हर एक हालात में काम करने लगता है कि फिर सब कुछ मिलकर हमारी अनंत भलाई के लिए काम करें। भले ही दूसरे लोग हमें नुकसान पहुँचाने की कोशिश करें, लेकिन परमेश्वर इसे हमारे भलाई के लिए काम करता है और हम जानते हैं कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम करते हैं, उनके लिए परमेश्वर सभी बातों को एक…
कलीसिया को मसीह की देह के रूप में महत्व देना जैक पूनन | 15 August 2021कुरिन्थ की कलीसिया को, पौलुस ने लिखा, “तुम सब मिलकर मसीह की देह हो, और अलग अलग उसके अंग हो” (1 कुरिन्थियों 12:27)। इफिसियों के मसीहियों को लिखी पौलूस की पत्री विश्वासियों के मसीह में एक देह होने के महान सत्य पर केन्द्रित है। मसीह कलीसिया का सिर है, और कलीसिया उसकी देह है (इफिसियों 1:22,23)। हरेक विश्वासी इस देह का अंग है। हम इफिसियों 4:1-2 में पढ़ते हैं “इसलिये मैं जो प्रभु में बन्दी हूँ तुम से विनती करता हूँ कि जिस बुलाहट से तुम बुलाए गए थे, उसके…
अतीत को पीछे छोड़ दे जैक पूनन | 26 December 2021जैसा कि हम इस वर्ष के अंत में आते हैं, शायद कुछ लोग ऐसे होंगे जो यह महसूस करते है कि क्योंकि उन्होने अपने जीवन के बीते समय में परमेश्वर के विरुद्ध पाप किया और परमेश्वर को निष्फल किया, इसलिए अब वे अपने जीवन के लिए परमेश्वर की सिद्ध योजना को पूरा नहीं कर सकते।आइए हम देखें कि इस विषय पर परमेश्वर का वचन क्या कहता है और हमारी समझ या तर्क पर निर्भर न रहें। सबसे पहले देखें कि बाइबल कैसे आरंभ होती है। आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी…
प्रलोभन के समय में विश्वासयोग्य रहना जैक पूनन | 13 March 2022परमेश्वर ने शैतान और हमारी लालसाओं को शक्तिशाली होने की अनुमति दी है कि हम यह कल्पना करने वाले न हो जाएं कि हम अपनी शक्ति से उन पर जय पा सकते हैं। हम परमेश्वर की सामर्थ्य पाने के लिए मजबूर हो जाते हैं। जब इस्राएल के जासूसों ने कनान के रहने वालों से अपनी तुलना की तो उन्होंने स्वयं को टिड्डियों की तरह पाया। फिर भी यहोशू और कालेब ने परमेश्वर की सामर्थ्य में भरोसा रखा और देश में घुसकर उन भीमकाय दैत्यों को मार डाला। अपनी सभी लालसाओं पर…
गुप्त पापों से स्वयं को शुद्ध करना जैक पूनन | 20 March 2022अगर एक विश्वसी परमेश्वर के सम्मुख नहीं रहेगा, तो वह बहुत आसानी से अपनी असली आत्मिक दशा से अनजान हो जाएगा। यह बात उस ताड़ना से स्पष्ट हो जाती है जो प्रकाशितवाक्य में प्रभु ने सात कलीसियाओं के दूतों को दी। लौदीकिया की कलीसिया के दूत (प्राचीन) से उसने कहा था, “तू नहीं जानता कि तू कितना अभागा, तुच्छ, दरिद्र, अंधा और नंगा है।”परमेश्वर हमारे जीवनों में ऐसे बहुत से अलग-अलग हालात तैयार होने देता है जो हमारे हृदयों में छुपी बातों को उजागर कर देते हैं। गुज़रे सालों में, विभिन्न्…
द्वारा लिखित : जैक पूननश्रेणियाँ : परमेश्वर को जानना चेले आत्मा भरा जीवन अगर हम अपने मसीही जीवन का एक रेखाचित्र बनाएं तो उसमें बहुत से उतार चढ़ाव होंगे। और सभी का यही अनुभव होता है। लेकिन जैसे-जैसे साल गुज़रते जाते हैं, हमारी सामान्य दिशा ऊपर की तरफ जाने वाली होनी चाहिए। हम धीरे-धीरे ऊपर की तरफ आगे बढ़ते हैं, और हमारे रास्ते के बीच में उतार-चढ़ाव और समतल स्थान आते रहते हैं। फिर हमारे गिरने की जगहें कम और समतल जगहें ज़्यादा आने लगती हैं। यह ज़रूरी नहीं है कि हमारा ऊपर की तरफ बढ़ना एकाएक और सटीक रूप में होगा…
द्वारा लिखित : जैक पूननश्रेणियाँ : जवानी घर कलीसिया परमेश्वर को जानना मूलभूत सत्य चेले रोमियों 7:14-25 ऐसे लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण भाग है जो सिद्धता की तरफ बढ़ते रहना चाहते हैं। पौलुस वहाँ एक नया जन्म पाए हुए विश्वासी के रूप में अपने अनुभव की बात कर रहा है, क्योंकि एक व्यक्ति जिसने मन नहीं फिराया है, वह यह नहीं कह सकता, “क्योंकि मैं भीतरी मनुष्यत्व में आनन्दपूर्वक परमेश्वर की व्यवस्था से सहमत रहता हूँ” (रोमियों 7:22)। पौलुस द्वारा रोमियों को लिखा गया पत्र अध्याय 1 से शुरू करते हुए “उद्धार के लिए परमेश्वर की सामर्थ्य” (रोमियों 1:16) का क्रमानुसार बयान करता है। अध्याय 3,4 व…
द्वारा लिखित : जैक पूनन प्रार्थना सिर्फ परमेश्वर से बोलना नहीं बल्कि परमेश्वर की सुनना भी है। और परमेश्वर से बात करने से ज्यादा महत्वपूर्ण सुनना है। इस बात पर विचार करें: अगर आप एक ज़्यादा ईश्वर-भक्त और बड़ी उम्र वाले व्यक्ति से फोन पर बात करेंगे, तब आप बोलने से ज्यादा सुनने का काम करेंगे। सच्ची प्रार्थना में भी ऐसा ही होना चाहिए – यह ज़रूरी है कि आप परमेश्वर से जितना अधिक बात करते हो, उससे कहीं अधिक तुम्हें परमेश्वर की बात सुननी चाहिए। अगर आपकी कुछ करने में बहुत दिलचस्पी होगी, तो आप अपने आपको आसानी से…
द्वारा लिखित : जैक पूननश्रेणियाँ : जवानी Struggling चेले आपके पास बाकी चाहे जो कुछ भी हो, लेकिन विश्वास के बिना परमेश्वर को प्रसन्न करना असम्भव है (इब्रा. 11:6)। अदन की वाटिका में हव्वा की असफलता असल में विश्वास करने की ही असफलता थी। जब वह उस पेड़ की सुन्दरता द्वारा प्रलोभित हुई थी, और तब अगर उसने सिर्फ परमेश्वर के सिद्ध प्रेम और बुद्धि में विश्वास किया होता, तो यह समझ में न आने के बाद भी कि एक प्रेम करने वाले परमेश्वर ने क्यों उस पेड़ का फल खाने से उसे रोका है, उसने पाप न किया होता। लेकिन जब शैतान…