*धर्मियों की ज़िन्दगी में, दुखों और परेशानियों का बने रहना ; और गुनहगारों का फलना फूलना| आख़िर ऐसा क्यों होता है? अय्यूब 21:7 में लिखा है —क्या कारण है कि दुष्ट ज़िन्दा रहते हैं, बल्कि बूढ़े भी हो जाते, और उनका धन बढ़ता भी जाता है| दूसरी ओर धर्मी सच्चाई की राह पर चलते, हुए हमेशा दुखी ही रहते है| किसी शायर ने क्या खूब कहा है – झूठ बोलने वाले कहां से कहां बढ़ गए, एक मैं था की सच बोलता रह गया| बहुतों के दिल में ख़ुदा के इंसाफ पर, शक पैदा होने लगता है| कुछ ये भी कहते हैं, खुदा है तो वो कहां है? *ये सब हताशा, निराशा में पूछे जाने वाले सवाल हैं| उसकी सिर्फ़ एक ही पहचान है, वो कभी ना बदलने वाला ख़ुदा है| बस हम ही उसे समझ नहीं पाते|* अहम् सवाल यह है, कि क्या ख़ुदा ग़लत है, या हमारा ईमान कमज़ोर है? *अगर आपके दिमाग में भी, कुछ ऐसे ही सवाल हैं ; तो उन्हें निकाल फेंकिये| गुनहगार और धर्मी के अंत में, ज़मीन और आसमान का अंतर है| यहाँ गुनहगार सुखी और आप धर्मी होकर भी दुखी हैं ; तो फ़िक्र ना करें, दुखी न हों, ख़ुदा के इंसाफ पर शक न करें | उनका सुख अनंत का दुःख बन जायेगा ; और आपका दुःख अनंत का सुख हो जायेगा|-
आमीन
जय मसिह की प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर

