नाकामयाबी, उम्मीद के दरवाज़े बंद करने को बरकरार नज़र आती है|* कहते हैं, उम्मीद पर आसमां टिका है ; मगर लगता है यह बातें क़िताबों के पन्नों में सिमट कर रह गई है| हकीक़त में ऐसा लगता है कि विश्वास की ज़मीं पर सपनों और ख़्यालों के शीशे, गिरकर चकनाचूर हो रहे हैं| *नाकामयाबी से बड़ा दर्द, दुनियां में कोई और नहीं है| ख़ास तौरपर, जब आप अच्छे होकर, बुराई से हार जाते हैं|* किसी शायर ने क्या ख़ूब कहा है –दोपहर तक बाज़ार में, सारे झूठ बिक गए, और मैं शाम तक एक सच लेकर बैठा रहा,पर न बेच सकता। कभी-कभी लगता, सच जैसे गूंगा हो गया है, और झूठ की आवाज़, दूर तक सुनाई देती है| *यीशु की आवाज़ को भी कुचलने की कोशिश की गई ; या उसे अनुसना किया गया| लेकिन यीशु की ज़ुबान पर ताला लगाने का दम किस में नहीं था|* चेलों की उड़ान रोकने के लिए, कई बार उनके पर कतरने की कोशिशें की गईं| *लेकिन पर कतरने वाले, ये नहीं जानते, परिंदे (प्रभु पर विश्वास करने वाले)परों से नहीं, हौसलों से उड़ते हैं| उम्मीद का दरवाज़ा हमेशा खुला रखिये, कामयाबी दस्तक देने को है| 2 कुरिन्थियों 2:14 में पौलूस कहता है –ख़ुदा का शुक्र हो, जो मसीह में हमेशा हमें जय के उत्सव में लिए फ़िरता है| आंधियां कैसी भी क्यों ना हों, उम्मीद की शम्मा जलाये रखिये|*
आमीन, आमीन, फिर से कहें आमीन
प्रभु आपका हौसला बुलंद रखें
रैव्ह राजेश गिरधर

