*परमेश्वर के मुँह से निकला , कोई भी वचन व्यर्थ नहीं जाता| फिर भी हमारे मन में शंकाएं सर उठाने लगती हैं|* समस्याओं की कड़ी धूप में , जहां दूर दूर तक कोई साया ना हो ; हमारी आत्मा व्याकुल होने लगती है| कभी लगता है , कहीं परमेश्वर हमसे नाराज़ तो नहीं है| कभी महसूस होता है , उसने हमें छोड़ दिया है| बेचैनी और निराशा के काले साए , हमें डराने लगते हैं| दुखों की लम्बी काली रात में , उम्मीद के चिराग बुझने लगते हैं| जहां भ्रम के चौराहे पर खड़े आप , ये नहीं निर्धारित कर पाते कि, जाना कहां है| विश्वास का दिया , धुएं की कुप्पी बन कर रह जाता है|  *परमेश्वर अपने आप का इनकार नहीं कर सकता| जो उसने कहा है , वो टल नहीं सकता|भजन 31:22 में लिखा है—-मैंने तो घबरा कर कहा था , कि मैं परमेश्वर की दृष्टि से दूर हो गया हूं ; तौभी जब मैंने दोहाई दी , तब तूने मेरी गिड़गिड़ाहट को सुन लिया|केवल शैतान ही नहीं , आपका मन भी आपको भ्रमित कर सकता है| शंकाओं से जूझना और उनपर विजय पाना आपका काम है| वह आग़ के भट्टे और शेरों की मांद में भी आपका साथ नहीं छोड़ेगा|सूरज , पश्चिम से उग सकता है ; मगर परमेश्वर , धोखा नहीं दे सकता|* 
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर
Share.
Leave A Reply