विश्वास का संबंध सिर्फ़, आशीषों और चंगाई ही से नहीं है| हक़ीकत में विश्वास, एक लंगर के समान है|* जब आप मुसीबतों के भंवर में फंसे हों, या ज़िन्दगी के समुंदर में, भयानक तूफ़ान में हो| *ज़िन्दगी के तूफानों में, विश्वास का लंगर ही, आपको स्थिर रख सकता है|* जब बाहर समस्याओं की तेज़ आंधियां हों, अन्दर दिल ओ दिमाग़ बेचैन हो, आप सोचते-सोचते थक जाते हैं| जब निराशा के तूफ़ान, उम्मीद की हर शम्मा बुझाने पर नज़र आती हैं| विश्वास के दामन को थामे रहना आसान नहीं होता है| हार मान लेने या लड़ने का जज़्बा बनाये रखने के, दोराहे पर खड़े आप बेबस नज़र आते हैं| *फ़ैसले की दहलीज़ पर खड़े आप, क़दम उठाने से डरते भी हैं ; और रुकना भी नहीं चाहते हैं| ना आप विश्वासी होते हैं, और ना ही अविश्वासी| ये अवस्था अल्पविश्वास की होती है जहां आप हां और ना के मकड़जाल में उलझ कर रह जाते हैं| इस परिस्थिति को, प्रकाशितवाक्य 3:16 में गुनगुना माना गया है|* यीशु का आत्मा कहता है, तू ना ठंडा है और ना गर्म| *जब भी आप किसी ऐसी परिस्थिति में हों, दहलीज़ पर खड़े-खड़े सोचते ना रहें| कामयाबी आपके इंतज़ार में है, क़दम उठाना ; खड़े रहना ; या पीछे हटना, आपके हांथ में है|
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
रेव्ह राजेश गिरधर
Share.
Leave A Reply