उद्धार , अनुग्रह और प्रेम की चर्चा बहुत होती है| *यदि हम उद्धार पाने के बाद भी , आत्मिक युद्ध हार जाते हैं ; तो क्रूस पर यीशु का बलिदान , व्यर्थ हो जायेगा|* आप हर पल आत्मिक युद्ध में हैं| गुलामी सिर्फ़ पापों की ही नहीं है| इंसान अपनी आदतों का , खाने का भी ग़ुलाम है| *इस वक़्त मोबाईल , शैतान का घातक हथियार बनते जा रहा है|* छोटे बच्चे यू ट्यूब पर अशलील वीडियों देख रहे हैं| पति-पत्नी के संबंधों में दूरियां बढ़ती जा रही हैं| टी. वी. सीरियल एडिकशन बन गए हैं| *लोग ज़िन्दा इंसानों से दूर और निर्जीव मोबाईल सेअधिक जुड़ते जा रहे हैं| बहुत से लोग इसके ग़ुलाम बनते जा रहे हैं| इस आदत से लड़ने को जीतने की ताक़त कितनों में है| इफसियों 6:10 में लिखा है —निदान प्रभू में और उसकी शक्ति के प्रभाव में बलवन्त बनो| जो भी इन आदतों के गुलाम हो गए हैं , क्या उनके अन्दर परमेश्वर की सामर्थ्य है? क्रूस का बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए|*
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह, राजेश गिरधर

