PRAISE THE LORD
🙏Good Morning 🙏
विषय:- मूर्ख व बुद्धिमान।
भजन संहिता 14:1,2,3,5
मूर्ख ने अपने मन में कहा है, कोई परमेश्वर है ही नहीं। वे बिगड़ गए, उन्होंने घिनौने काम किए हैं, कोई सुकर्मी नहीं।
परमेश्वर ने स्वर्ग में से मनुष्यों पर दृष्टि की है, कि देखे कि कोई बुद्धिमान, कोई परमेश्वर का खोजी है या नहीं।
वे सब के सब भटक गए, वे सब भ्रष्ट हो गए; कोई सुकर्मी नहीं, एक भी नहीं।
वहां उन पर भय छा गया, क्योंकि परमेश्वर धर्मी लोगों के बीच में निरन्तर रहता है।
इस वचन में मूर्ख, बुद्धिमान व धर्मी शब्दों का इस्तेमाल किया गया है।
वचन बताता हैं कि मूर्ख ने कहा कि कोई परमेश्वर हैं ही नहीं। जो लोग ऐसा कहते हैं कि कोई परमेश्वर नही हैं वह मूर्ख कहलाते हैं।
और यह मूर्ख लोग वे होते हैं जो एक समय में कलीसिया आ रहे थे लेकिन अभी कलीसिया नहीं जा रहे। वह लोग परमेश्वर की आज्ञाओं से भटक गए। परमेश्वर के साथ समय नहीं बिताते हैं।
वचन कहता है कि ऐसे मूर्ख लोगो के काम बिगड़ गए,वह और बुरे-बुरे काम करने लगे। अच्छे सुकर्म करना उनको अब अच्छा नही लगता है।
परमेश्वर ने जब मनुष्यों पर दृष्टि की कि देखे की क्या कोई बुद्धिमान हैं लेकिन ऐसा नही था।
आज भी लोग अपने आप को बुद्धिमान कहते हैं बहुत से काम करते हैं लेकिन परमेश्वर ने जो कहा बस वही नही करते हैं।
वचन कहता हैं जो परमेश्वर के खोजी नही है वह लोग भटक गए। क्योकी उनके लिए सांसारिक बाते ज्यादा अहमियत रखती हैं।
आखिर में परमेश्वर का वचन कहता है कि लेकिन प्रभु धर्मी लोगों के बीच निरन्तर रहता हैं।
इसलिए हम मूर्ख की श्रेणी में न आए। हम परमेश्वर को खोजने वाले बने, उसके पीछे चलने वाले बने ताकि हमारा जीवन अच्छा हो एक भटकाव का जीवन न हो।
तभी हम बुद्धिमान कहलायेंगे।
परमेश्वर आप सभी को आशीष करें।
सभी को जय मसीह की।
Amen 🙏
Hv a blessed day🙌✝️

