रोमियो 4:4 काम करने वाले की मजदूरी देना दान नहीं, परन्तु हक समझा जाता है।
*मजदूर की मजदूरी उसका हक बनता है परंतु आज हम किस मजदूर को मजदूरी दे रहे हैं क्या हम परमेश्वर के उस मजदूर को उसकी मजदूरी दे रहे हैं जिसके द्वारा पवित्र आत्मा हमारे जीवन में काम करते है जिसकी प्रार्थना में सामर्थ है, जिसके द्वारा हमें दुखों से,परेशानी से,और बीमारियों से बार-बार छुटकारा मिलता है किस सेवक की प्रार्थना से हमें चंगाई मिलती है क्या हम उसे उसकी मजदूरी दे रहे हैं या उसकी मजदूरी किसी और को दे रहे हैं अगर हम ऐसा कर रहे हैं, तो यह बडे दुख की बात है क्योंकि आज देखने में आता आ रहा है कि सच्चा सेवक बहुत दुख और तकलीफ उठा रहा है परंतु झूठे सेवक मौज-मस्ती का जीवन जीने में मस्त हैं क्योंकि वह धोखे के साथ परमेश्वर की भेड़ों को लूट रहे हैं*
मत्ती 10:10 मार्ग के लिये न झोली रखो, न दो कुरते, न जूते और न लाठी लो, क्योंकि मजदूर को उसका भोजन मिलना चाहिए।
*उदाहरण के तौर पर हम किसी के पास अगर नौकरी करते हैं तो अगर हमारा मालिक हमारी तनख्वाह किसी और को दे तो हमें कैसा लगेगा हमें कितना गुस्सा आएगा और गुस्सा का आना भी जायज है क्योंकि हमारी मेहनत तो कोई और ले कर चला गया यह तो बहुत दुख की ही बात है, कि परमेश्वर के चुने हुए सेवक जिससे द्वारा आपके जीवन में चंगाई और बरकत आपको मिल रही है वह रात दिन आपके लिए प्रार्थना करता रहता है और जो परमेश्वर पिता के द्वारा चुना गया है उसे उसकी मजदूरी ना देना सबसे बड़ा पाप है या उसकी मजदूरी किसी दूसरे को दे देना कितनी गलत बात है क्योंकि आज ऐसा ही हो रहा है*
आप सब इस पर विचार करें
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर

