यीशु ने बड़े दावे के साथ कहा, मांगो तो दिया जाएगा| यह वचन हमारे दिमाग़ में, पत्थर पर छेनी हथौड़ी से खोदे गए अक्षरों की तरह छप गया है| हर इंसान ख़ुदा से कुछ ना कुछ मांगता रहता है| हर एक की अपनी ज़रूरत है ; हर एक की एक मांग है| कभी आपने सोचा है, आपकी सबसे बड़ी ज़रूरत क्या है? अगर ख़ुदा, आपसे सुलेमान की तरह पूछ ले, मांग तुझे क्या चाहिए? तो आपने क्या सोच रखा है? शायद ज़्यादातर हम जिस्म के बारे में ही सोचते हैं| *क्या आप आपनी आत्मा की आवश्यकताओं के लिए भी चिंतित हैं?* समस्याओं से लड़ने और शैतानी ताकतों से झूझने की सामर्थ्य के बारे में आपका क्या विचार है? क्या स्वर्गीय सामर्थ्य आपकी सूची में सबसे ऊपर है? हर रोज़ शैतान ना जाने कितनी ही आत्माओं को नाश कर रहा है| *धर्मी होने का दावा करने वाले भी संसारिकता के मकड़ जाल में उलझे हुए हैं|कितने ही पासबानों ने अपनी पदवी और दौलत की ख़ातिर, अपनी सेवाओं को बर्बाद कर लिया है|कलीसिया के रहनुमाओं को राजनीति का ऐसा नशा चढ़ा है, जो उतरने का नाम नहीं ले रहा है|* दूसरी ओर कलीसिया विनाश की ओर बढ़ती जा रही है| हमें जितनी ज़मीनों की चिंता है, शायद उतनी आत्माओं की नहीं है| *शैतान से ज़ोर आज़मायिश में, हम कमज़ोर साबित हो रहे हैं|यशायाह 40:29 में लिखा है—- वह थके हुए को ताक़त देता है ; और कमज़ोर को बहुत सामर्थी बनाता है| ईमानदार पासबान ; और ना जाने कितने ही प्रार्थना योद्धा, हालात से लड़ते-लड़ते थक चुके हैं|हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं|कुछ अपनी और अपने परिवार की लड़ाई लड़ते हुए थक चुके हैं| आपको समाधान से पहले स्वर्गीय, ताक़त और सामर्थ्य की सख्त ज़रूरत है| जो हम प्रभु से नहीं मांगते,और नतीजा क्या निकल रहा है वो हम सबके सामने है, अब आप ही सोचिए हमे प्रभु से क्या मागना है,
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर

