*प्रभु के प्रति हमारा विश्वास एक पुल(Bridge)के समान है, जो आपको और प्रभु को आपस में जोड़े रखता है| विश्वास है तो सबकुछ है, विश्वास नहीं तो कुछ भी नहीं है| विश्वास की सबकी, अपनी परिभाषा हो सकती है| विश्वास का रिश्ता, चंगाई और दुआओं के सुने जाने से नहीं, प्रभु से है ; वो सुने या ना सुने तब भी वो मेरा प्रभु है *अगर दुआ ना सुनी जाए, तो इसका मतलब यह नहीं है, कि आप गुनहगार हैं, या आपका विश्वास कमज़ोर है| प्रभु की मर्ज़ी को समझने की ज़रूरत है| अपने आपको प्रभु की मर्जी पर छोड़ दें,और विश्वास रखें कि प्रभु जो कुछ भी करेगा आपके लिए बेहतर ही करेगा।
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर

