जब कोई हमें चोट पहुँचानेवाली बात कहता है या हमारे साथ रूखा व्यवहार करता है, तो हमें बहुत बुरा लगता है। खासकर अगर कोई दोस्त या रिश्तेदार ऐसा करे, तो चोट और गहरी होती है। तब समस्याओं का सामना करने में हिम्मत टूट जाती है, हम हन्ना से बहुत कुछ सीख सकते हैं। उसकी सौतन उस पर लगातार ताने कसती थी। (1 शमू. 1:12) हन्ना की तरह हम भी अपनी चिंताओं और परेशानियों के बारे में काफी देर तक यहोवा से प्रार्थना कर सकते हैं। यह ज़रूरी नहीं कि हमें प्रार्थना में बहुत सुंदर और दमदार शब्द कहने हैं। हो सकता है हम अपनी परेशानियों के बारे में बात करते-करते रोने लगें। उस समय ऐसा न सोचें कि यहोवा हमारी प्रार्थनाओं से परेशान तो नहीं होगा। हमें यहोवा को सिर्फ अपनी समस्याएँ नहीं बतानी चाहिए बल्कि उसका धन्यवाद भी करना चाहिए। पौलुस ने फिलिप्पियों 4:6, 7 में यही सलाह दी है। हम कई बातों के लिए यहोवा का धन्यवाद कर सकते हैं। जैसे, उसने हमें जीवन दिया है, कितनी खूबसूरत चीज़ें बनायी हैं, वह हमसे सच्चा प्यार करता है और उसने वादा किया है कि वह हमें एक अच्छा भविष्य देगा। प्रभु परमेश्वर से विनती करो मागो , विश्वास करना वो आपको कभी भी निराश नहीं करेगा
आमीन
प्रभु हमेशा हमारी विनती को सुन कर पूरा भी करता है

