अदन की वाटिका से आदम को निकाले जाने के बाद, कितने ही बार प्रभु ने, इंसान से करीबी रिश्ता बनाने की कोशिश की ; मगर हर बार इंसान उससे दूर होता चला गया|* किसी की ज़िन्दगी में सुधार लाने के लिए आपका धैर्य का होना बहुत जरूरी है ,आपने प्रभु की मुहब्बत के बारे में बहुत सुना होगा, कभी आपने उसके धैर्य को समझने की कोशिश की है?* प्रभु का तीन बार इनकार करने के बाद पतरस मछली पकड़ने फिर से झील पर पहंच गए, यीशु का धैर्य देखिये, वो फ़िर से मिलने झील के किनारे पहुंच गया| *पतरस का सफ़र बड़ा अजीब सा था| वो दुनियां से यीशु की ओर, फिर यीशु से दुनियां की ओर चला गया|*जब पतरस फ़िर से दुनियां से, यीशु की ओर बढ़ रहा था| यीशु ने पतरस से कोई शिकायत नहीं की, बस पूछा, क्या तू मुझसे मुहब्बत करता है? *हमारा भी यीशु से जुड़ना और अलग होना, इसी तरह से चलता रहता है| मगर ये यीशु का धैर्य है, कि वो बार-बार हमसे मिलने चला आता है| वो, हमसे शिकायतें नहीं करता, हमसे नाराज़ नहीं होता| ऐसा ख़ुदा और कहां पाओगे| अगर कहीं मिल जाए,या मिल गया हो तो दूसरो को भी बता कर आशीषित हो जाओ,और आशीष का कारण बन जाओ ।
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर

