बाइबिल मे लिखा है :-बुलाए हुए तो बहुत हैं पर चुने हुए कम है।क्योंकि सुसमाचार बहुतों को सुनाया जाता मगर सब उस पर विश्वास नहीं करते; और जो करते तथा अपना जीवन यीशु मसीह को देते व उसके पीछे चलने का निर्णय लेते वही होते हैं चुने हुए; फिर चाहे परिस्थितियां कैसी भी हो वो पलट कर नहीं देखते दूसरों को भी सहारा देकर सम्भाल लेते हैं।
जीवन मे दुखों का आना तो आवश्यक है क्योंकि दुखो मे ही रहकर व्यक्ति जीना सीखता है, अपने तथा गैरों की पहचान करता है, मजबूत बनता है।जीवन के संघर्ष मे विजय हांसिल करता है।यह दुख हमारे जीवन में अपने आप नहीं आते बहुत बार हमारे ही कारण आते हैं जिनका पता हमे बाद मे लगता है इन दुखों को जीने से व्यक्ति मजबूत होकर चलना सीख जाता है, ठोकर नहीं खाता प्रभु हमे मजबूत करना चाहता है वो नहीं चाहता कि उसके बच्चे किसी भी काम मे नाकाम हो इसीलिये वह कहता है मैं ने तुझे दुख की भट्टी मे परखकर चुन लिया है।यह वचन अपने आप मे एक गर्व को दर्शाता है इससे पता चलता है प्रभु ने हमे अकेला नहीं छोडा वो हमारे साथ है पल पल हमारी अगुवाई करने के लिये यह वचन परमेश्वर के प्रेम को दर्शाता है कि वो हमसे कितना प्यार करता है।
धन्यवाद यीशु ।
प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर

