एक मनुष्य के जीवन में यदि खून की कमी हो तो उसको कमजोरी होती है और उसका जीवन भी खतरे मैं है
ठीक वैसे ही बिना यीशु के लहू के हम एक सामर्थ्य और विजय मसीह जीवन नहीं जी सकते हैं
परमेश्वर भी लहू के विषय में बहुत गंभीर थे 
प्रभु यीशु मसीह जिस दिन वह पकड़वाया जाने को था 
बाईबल बताती है
लूका 22:7,19
[7]तब अखमीरी रोटी के पर्व्व का दिन आया, 
[19]फिर उस ने रोटी ली, और धन्यवाद करके तोड़ी, और उन को यह कहते हुए दी, कि यह मेरी देह है, जो तुम्हारे लिये दी जाती है: मेरे स्मरण के लिये यही किया करो।
1 कुरिन्थियों 11:25
,,,; यह कटोरा मेरे लोहू में नई वाचा है: जब कभी पीओ, तो मेरे स्मरण के लिये यही किया करो।
यहां ध्यान दें (मेरे स्मरण) के लिए यही  किया करो {स्मरण शब्द पर ध्यान दे}
परमेश्वर ने इस्राएलियों को जब उस दंड से बचाया तो मूसा के द्वारा उन्हें फसह का पर्व मानने को कहा ताकि उन्हें स्मरण रहे कि परमेश्वर ने उन्हें उस दिन बचाया था और ठीक प्रभु यीशु मसीह रोटी और दाखरस लेते हैं और कहते हैं मेरे स्मरण के लिए यह किया करो
अर्थात प्रभु भोज और ठीक जिस प्रकार परमेश्वर ने इस्राएलियों को बचाया था और उस दिन के स्मरण के लिए वह फसह का पर्व मनाते थे वैसे ही हम विश्वासी (नया फसह) अर्थात प्रभु भोज मनाते हैं क्योंकि हमारा प्रभु ने हमें बचाया ठीक जैसे परमेश्वर ने इस्राएलियों को लहू के द्वारा एक भयंकर विपत्ति से बचाया जो सारे इस्राएलियों पर पड़ने वाला था वैसे ही प्रभु यीशु मसीह का लहू हम विश्वासियों को बचाता है,
लेकिन किससे हमें बचाता है?
उसका लहू हमें पाप के भयंकर दंड से बचाता है क्योंकि लिखा है
रोमियो 6:23
क्योंकि पाप की मजदूरी तो मृत्यु है, परन्तु परमेश्वर का वरदान हमारे प्रभु मसीह यीशु में अनन्त जीवन है॥
क्योंकि उसका लहू जीवित परमेश्वर का निर्दोष लहू है
अब कुछ देर रुक कर सोचें हमने जो पाप किए थे 
उसका दंड हमें क्या मिलता ?
यदि हमें क्षमा नहीं मिली होती तो?
सारी महिमा केवल हमारे प्रभु यीशु मसीह को ही)
आमीन
प्रभु आप सबको बहुत बहुत आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर
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