*जब सुख और आनंद हों , तब परमेश्वर से कोई शिकायत नहीं रहती| दुखों और समस्याओं के आते ही , परमेश्वर से शिकायत होने लगती|* अधिकतर लोग यह कहते सुने जा सकते हैं , परमेश्वर ने ऐसा क्यों किया? ; या परमेश्वर ने मेरे साथ ऐसा क्यों होने दिया? ; मेरे ही साथ ऐसा क्यों होता है? कुछ और भी शिकायते रहती हैं , जैसे कि , परमेश्वर मुझसे नाराज़ है ; वो मेरी प्रार्थनाओं का उत्तर नहीं देता ; या , उसने मुझे छोड़ दिया है| अहम् सवाल यह है , क्या आपकी सोच सही है? क्या आप परमेश्वर के बारे में सही अनुमान लगा सकते हैं? परमेश्वर को गहराई से समझना , ज़रूरी है| ज़्यादातर लोगों ने परमेश्वर या शैतान को अपना निशाना बना रखा है| यदि आपको ऐसा लगता है , इसका मतलब यह नहीं है कि , हकीक़त में ऐसा ही है| *भजन 31:22 में लिखा है –मैंने तो घबराकर कहा था , कि मैं यहोवा परमेश्वर की दृष्टि से दूर हो गया हूं ; तौभी जब मैंने दोहाई दी , तब तूने मेरी गिड़गिड़ाहट को सुना लिया| हम भी बहुत बार या तो अपने , या परमेश्वर के बारे में , कोई धारणा बना लेते हैं| आप परमेश्वर के बारे में जो सोच रहे हैं , ज़रूरी नहीं की वो सही हो| ईश्वर इंसान नहीं है , जिसके बारे में हम कोई धारण बना सकें| आपके सोचने से वो वैसा नहीं हो जाता|* 
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर
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