समस्याएं कैसी भी हों , उनका समाधान परमेश्वर के पास है| *लेकिन हमारी मानसिक कमज़ोरी , शैतान की ताक़त बन जाती है|कभी-कभी ख़ुद को समझाना, मुश्किल हो जाता है| हमें ख़ुद से बात करना ,सीखना चाहिए|* भजन 23 में दाऊद ख़ुद से कहता है मैं नहीं डरूंगा| *ख़ुद से कहते रहिये , मैं अभी टूटा नहीं हूं ; अभी हारा नहीं हूं| जो आवाज़ अन्दर से आती है , वो ही हार जीत का फ़ैसला करती है|* गतसमनी बाग़ में चेलों ने , दिमाग़ की आवाज़ सुनी , जो सो जाने के लिए कह रही थी| आत्मा तैयार थी , मगर उसकी आवाज़ नहीं सुनी|यीशु चेलों को समझा रहा था , तुम मेरे साथ जाग सकते हो ; तुम नींद से हारे नहीं हो| शरीर और आत्मा का युद्ध तो यीशु भी लड़ रहा था| यीशु के दिमाग़ में भी, कटोरे के टल जाने का ख़्याल ज़ोर पकड़ रहा था| किसी एक के कमज़ोर पड़ते ही दूसरा हावी हो जाता ; फ़िर चाहे वो शरीर हो या आत्मा| विश्वास के सहारे से बड़ा; कोई और सहारा नहीं हो सकता| *परमेश्वर पर विश्वास करने वाले में; आत्मविश्वास भी होना चाहिए| विश्वास के साथ मैदाने जंग में खड़े रहिये , आपका दुश्मन आपसे ज़्यादा ताकतवर नहीं है|
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर

