किताबी ज्ञान, अनुभव की तुलना में कमतर ही माना जायेगा| आप किसी के बारे में जानते हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि आप उस व्यक्ति को जानते हैं| *परमेश्वर को समझने के लिए, किताबी ज्ञान से ज़्यादा, अनुभव की ज़रूरत है|* कैंसर का मरीज़ ही, कैंसर के दर्द को समझ सकता| जो मौत के मुँह से निकला हो, वो ही मौत की भयानकता को समझ सकता है|धनवान निर्धनता की परिभाषा समझा सकता है, लेकिन ग़रीबी को नहीं समझ सकता| *परमेश्वर को समझने के लिए, व्यक्तिगत अनुभव बहुत ज़रूरी हैं| दूसरों की गवाही केवल आपके उत्साह को बढ़ा सकती हैं ; लेकिन व्यक्तिगत अनुभव ही, आपके विश्वास को और मज़बूत बना सकता है|अय्यूब 19:27 में लिखा है—उसका दर्शन मैं आप अपनी आंखों से अपने लिए करूंगा, और ना कोई दूसरा| दूसरों की आंखों से, परमेश्वर को देखने वाले, परमेश्वर को नहीं समझ सकते| दूसरों के नज़रिए से आप परमेश्वर को नहीं पहचान सकते|दुखों और समस्याओं से भागने वाले, अनुभव से वंचित रह जाते हैं| अय्यूब के अनुभव ने, उसे परमेश्वर के और क़रीब पहुंचा दिया|यदि हम अय्यूब के अनुभव को, तराज़ू के एक पलड़े पर और दो गुनी आशीष को दूसरे पर रख दे ; तो निश्चित ही, अनुभव का पलड़ा भारी निकलेग| आपका अनुभव ही आपकी सबसे बड़ी दौलत हैं|* 
आमीन
प्रभु आपको और आपके परिवार को आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर
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