*जीवन में हम कई बार टूटते हैं और यह आवश्यक भी है क्योंकि जब हम टूटते हैं तभी हम यीशु के स्वभाव में बनते हैं*
*यह जान कर, कि तुम्हारे विश्वास के {परखे} जाने से धीरज उत्पन्न होता है।*
इस बात को हमेशा याद रखें परीक्षा के दौरान ही प्रभु का स्वभाव हमारे जीवन में विकसित होता है और सबसे बड़ी खुशखबरी हमारे लिए यह है कि इस परीक्षा के समय हम अकेले नहीं* यहोवा टूटे मन वालों के समीप रहता है*
उस परमेश्वर को हमेशा हमारी परवाह है वह हमारे कलेश में हमें शांति देता है*
*निराशा में आशा वह हमें गिरने के समय फिर से उठाता है जब हमें लगता है कि सबकुछ खत्म अब कुछ नहीं हो सकता*लेकिन हमारा परमेश्वर वहीं से फिर से नई शुरुआत शुरू करता 
भूले नहीं हमारा परमेश्वर सून्य मैं से अद्भुत चीजें उत्पन्न करता है*
इसलिए हिम्मत ना हारे प्रार्थना करें चिंता नहीं विश्वास करें*
क्योंकि जब यीशु ने परीक्षा की दशा में दुख उठाया, तो वह उन की भी सहायता कर सकता है, जिन की परीक्षा होती है॥*
आमीन
प्रभु हमेशां आपके साथ है
रैव्ह. राजेश गिरधर
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