जब जब हमने अपने परमेश्वर को पुकारा,चाहे सकंट हो, मुसिबत हो परेशानी हो, या कभी लगे कि हम अपने जीवन में कहीं भी फिसलने लगे,उस समय हमने अपने जीवन में, परमेश्वर को पुकारा तब तब परमेश्वर ने हमें सहारा दिया पर उसकी भी एक शर्त है उसने परमेश्वर से कहा प्रभु मेरा पाँव फिसल रहा है मैं गलत काम करने की चेष्टा कर रहा हूँ मुझे बचाओ तब प्रभु ने उसे बचाया प्रभु को पुकारा तब ही उसने बचाया क्या आज जब हम फिसलते हैं इस जीवन रुपी जहाज मे तो क्या हम प्रभु को पुकारते हैं ज्यादातर लोग ऐसा नही करते बस खोजना शुरू करते कि कोई हमें मुसिबतों से बचा ले मनुष्य पर भरोसा रख कर चलते हैं तब उनका विश्वास टूटता है क्योंकि कोई किसी को नहीं बचा सकता मनुष्य पर भरोसा रखना एक फन्दा ठहरता है परमेश्वर पर भरोसा रखना आजादी होती है।
जब भी किसी को लगे वो फिसलने लग रहा है चाहे वो कोई काम मे हो, व्यापार मे हो, या किसी भी परेशानी का हो तब तब प्रभु को पुकारो वो सुनेगा और बचाने को दोडा आएगा ।
आमीन
प्रभु की सेवा में प्रभु का दास
रैव्ह राजेश गिरधर
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